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खेतों के रास्तों पर अभ्यास कर तैयार हो रहे एथलीट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 06 May 2022 11:39 PM IST
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Athletes getting ready by practicing on the paths of the fields
गांव बैजलपर में खेत की सड़क पर अभ्यास करते एथलेटिक्स खिलाड़ी। - फोटो : Fatehabad
भूना। आज विश्व एथलेटिक्स दिवस हैं। 7 मई 1996 से विश्व एथलेटिक्स दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी। इस दिवस का मूल उद्देश्य एथलेटिक्स में युवाओं को भागीदारी करने के लिए प्रोत्साहित करना है। मगर ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों से संबंधित सुविधाओं का पूर्ण रूप से अभाव है। धरातल पर खिलाड़ियों के लिए खेल स्टेडियम की कमी हर जगह पर बनी हुई है। खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए कोच व खेलों का सामान तक उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र के एथलीट खिलाड़ी खेतों के रास्तों को ट्रैक बनाकर अपनी मंजिल पाने के लिए अभ्यास कर रहे हैं।
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नहर की पटरी और खेतों के कच्चे रास्तों पर अभ्यास करके भी कई खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर छाए हैं। भूना खंड का गांव बैजलपुर तो खेल की नर्सरी बन चुका है। बैजलपुर के किसान की बेटी एवं अंतरराष्ट्रीय एथलीट पूजा ओला, हसंगा निवासी राष्ट्रीय एथलीट गोल्ड मेडलिस्ट रामस्वरूप कुकणा, राष्ट्रीय सिल्वर पदक विजेता महेंद्र सिंह, राज्य स्तरीय गोल्ड मेडलिस्ट रेणु सुरा, जिला स्तरीय गोल्ड मेडलिस्ट प्रियंका छिंपा व अमन देवी इनखिया ने एथलेटिक्स में अपनी प्रतिभा का दबदबा कायम रखा हुआ है। संवाद
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पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रहीं
गांव बैजलपर में खेलों से संबंधित पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही है। बैजलपुर के युवाओं ने एथलीट, हॉकी तथा कबड्डी में अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय खेलों में जीत दर्ज करवा चुके हैं। खिलाड़ियों को खेतों के रास्तों व सड़कों पर प्रेक्टिस करनी पड़ रही है। मैंने भी धूल भरे ग्राउंड में दौड़ लगाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने का सफर तय किया है। अगर गांव में खेलों की सुविधाएं होगी तो युवाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
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-पूजा ओला, एथलीट, अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडलिस्ट
खिलाड़ियों को खेलने के लिए ग्राउंड जैसी सुविधा भी नहीं
हसंगा गांव में पिछले कई वर्षों से खेल स्टेडियम बनाए जाने की मांग उठाई जा रही है। बीडीपीओ से लेकर सांसद तक को प्रस्ताव दिए जा चुके हैं। खिलाड़ियों को खेलने के लिए ग्राउंड जैसी सुविधा भी नहीं है। मैंने सबसे तेज धावक बनने के उद्देश्य से खेतों के रास्ते पर अभ्यास करके आगे बढ़ने का संकल्प लिया। सरकार की खेल नीति कागजों में है, धरातल पर नहीं।
रामस्वरूप कुकणा, एथलीट, राष्ट्रीय गोल्ड मेडलिस्ट
सुविधाओं के अभाव में दबकर रह जाती हैं प्रतिभाएं
ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाएं बहुत है, मगर सुविधाओं के अभाव में दबकर रह जाती है। गांव में खेलों से संबंधित किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं होने के बावजूद हसंगा में कई एथलेटिक्स पदक जीत चुके हैं। खेल स्टेडियम व सुविधाओं को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। सुविधाएं मिले तो कई युवा और आगे बढ़कर गोल्ड मेडल ओलंपिक खेलों से हासिल कर सकते हैं।
रेणू सूरा, एथलीट, राज्य स्तरीय गोल्ड मेडलिस्ट
युवा खेलों को लेकर स्टेडियम की बाट जोह रहे
लड़कियां खेल स्टेडियम के अभाव में खेल गतिविधियों से पिछड़ रही हैं। अभ्यास करने के लिए उन्हें कोई उचित सुविधाएं नहीं मिल रही है। युवाओं ने कई बार पंचायत के प्रस्ताव के माध्यम से सरकार से स्टेडियम बनाने की मांग रखी है। ग्राम पंचायत ने 5 एकड़ जमीन भी दी हुई है। मगर पिछले कई वर्षों से हसंगा के युवा खेलों को लेकर स्टेडियम की बाट जोह रहे हैं।

प्रियंका छिंपा, एथलीट, जिला स्तरीय गोल्ड मेडलिस्ट
सड़कों पर सुबह-शाम अभ्यास करना पड़ रहा
एथलेटिक्स दिवस हम कहां पर मनाएं, हमें तो सड़कों पर सुबह एवं शाम को अभ्यास करना पड़ रहा है। पंचायत के पास जमीन उपलब्ध है, लेकिन खिलाड़ियों को प्रेक्टिस करने के लिए स्टेडियम नहीं। गांव में मिनी स्टेडियम व कोच जैसी सुविधाएं हो तो खेल प्रतिभाएं निखर कर सामने आ सकती है। सुविधाओं की कमी के चलते लड़कियों को घरों से बाहर निकलना भी कठिन है। फिर भी हमने आगे बढ़कर खेलों में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
अमन देवी इनखिया, खिलाड़ी
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