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महिलाओं को घूंघट प्रथा से निकाल कर उनके सपनों की उड़ान को बुलंद कर रही अंजू वर्मा
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फतेहाबाद। गांव की महिलाओं में आगे बढ़ने का जज्बा है, लेकिन दिक्कत समाज की कुरीतियां और गैर जरूरी कायदे-कानून डालते हैं। महिलाओं का गहना शर्म और संकोच कहा जाता है, लेकिन असल में यह महिलाओं के लिए बेड़ियों की तरह हैं। इन्हें छोड़कर महिलाओं को समाज के सामने आना होगा और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना होगा। गांव दौलतपुर की 21 वर्षीय बेटी अंजू वर्मा घूंघट की बंदिशें तोड़ कर महिलाओं के सपनों की उड़ान को बुलंद करने में जुटी हैं।
अंजू ने इसकी शुरुआत अपने घर से की है। गांव में कार्यक्रम का आयोजन करके मंच से सबसे पहले अपनी मां को घूंघट नहीं करने के लिए प्रेरित किया। महिलाओं व युवतियों को बड़े पैमाने पर जागरूक करने के लिए अंजू वर्मा ने साल 2017 में ‘बुलंद उड़ान’ एनजीओ का गठन किया। अब यह एनजीओ पूरे देश में युवतियों व महिलाओं को ऑनलाइन प्रशिक्षण देता है, जिसमें उन्हें अधिकारों से लेकर कर्तव्यों तक की जानकारी दी जाती है।
खुद के साथ हुआ शोषण तो बदली दूसरों की राह
अंजू बताती हैं कि स्कूली दिनों में जब जून की एक महीने छुट्टियां हुई तो उसे एक रिश्तेदार अपने घर ले गई। वहां वह 20 दिन उनके पास रही। इस दौरान उससे नौकरों जैसा व्यवहार किया गया। रिश्तेदार के बेटे ने ही उसका शोषण करने की कोशिश की। वह कहती हैं कि वे 20 दिन उसके जीवन के लिए नरक जैसे दिन थे। जैसे ही घर लौटी तभी सोच लिया कि ऐसा ही व्यवहार हर लड़की व महिला को झेलना पड़ता होगा। उसी दिन से बुलंद तरीके से आवाज उठाने लगी।
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20 लड़कियों को शोषण से बचाया
अंजू के अनुसार उनकी संस्था गांवों में सर्वे भी करती है। सर्वे में जानने की कोशिश होती है कि कितनी लड़कियों ने स्कूल छोड़ दिया, कितनी महिलाएं घूंघट निकालती है। कितनी महिलाओं को दहेज प्रथा का शिकार होना पड़ रहा है। सर्वे में आए नतीजों के आधार पर जागरूकता अभियान को बढ़ावा दिया जाता है। अंजू के अनुसार वह अब तक 20 लड़कियों को शोषण से बचा चुकी हैं। इन लड़कियों को स्कूल जाते समय भी छेड़छाड़ या फब्तियां कसने जैसी हरकतों से जूझना पड़ता था।
800 बच्चों को करवाया स्कूल में नियमित
अंजू की संस्था बच्चों के भी मूल अधिकारों का संरक्षण करती है। इसलिए स्कूल छोड़ने वाले या बाल मजदूरी करने वाले बच्चों को भी मुख्यधारा में वापस लाने के लिए संघर्ष करती हैं। अब तक बुलंद उड़ान संस्था 800 बच्चों को स्कूल में नियमित करवा चुकी है।
लेनदेन बैन मुहिम शुरू की
बुलंद उड़ान संस्था ने अब लेनदेन बैन मुहिम शुरू की है। अंजू बताती है कि दहेज तो एक बार देना पड़ता है। मगर छोटे-छोटे शगुन के नाम पर हर परिवार को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इससे बचने के चक्कर में आजकल लोग अपनों को भी नहीं बुला पाते हैं। इसी को लेकर उन्होंने लेनदेन बैन मुहिम शुरू की है। दहेज के साथ-साथ घरों में होने वाले अन्य छोटे-छोटे कार्यक्रमों में भी कोई पैसा या कपड़ा नहीं लेने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसके लिए 10-10 महिलाओं की टीम बनाई जा रही है।
दुष्कर्म पीड़िता की आवाज बनीं, तो मिली धमकी
अंजू बताती हैं कि एक दुष्कर्म पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने बीड़ा उठाया। इसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिली। मगर वह पीछे नहीं हटी। इसके बाद आरोपी को सात साल की सजा भी हुई है।
हर युवती या महिला को आजादी से जीने का अधिकार है। सालों से महिलाएं घूंघट करती आ रही हैं। कोरोना के कारण मुंह पर मास्क लगा तो पुरुषों की सांस आफत में आ गई। ऐसे में महिलाओं को कितनी दिक्कत होती है, यह समझ आ गया होगा। महिलाओं की आवाज को बुलंद करने के लिए ही हमने बुलंद उड़ान एनजीओ का गठन किया है।
- अंजू वर्मा, संस्थापक, बुलंद उड़ान
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अंजू ने इसकी शुरुआत अपने घर से की है। गांव में कार्यक्रम का आयोजन करके मंच से सबसे पहले अपनी मां को घूंघट नहीं करने के लिए प्रेरित किया। महिलाओं व युवतियों को बड़े पैमाने पर जागरूक करने के लिए अंजू वर्मा ने साल 2017 में ‘बुलंद उड़ान’ एनजीओ का गठन किया। अब यह एनजीओ पूरे देश में युवतियों व महिलाओं को ऑनलाइन प्रशिक्षण देता है, जिसमें उन्हें अधिकारों से लेकर कर्तव्यों तक की जानकारी दी जाती है।
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खुद के साथ हुआ शोषण तो बदली दूसरों की राह
अंजू बताती हैं कि स्कूली दिनों में जब जून की एक महीने छुट्टियां हुई तो उसे एक रिश्तेदार अपने घर ले गई। वहां वह 20 दिन उनके पास रही। इस दौरान उससे नौकरों जैसा व्यवहार किया गया। रिश्तेदार के बेटे ने ही उसका शोषण करने की कोशिश की। वह कहती हैं कि वे 20 दिन उसके जीवन के लिए नरक जैसे दिन थे। जैसे ही घर लौटी तभी सोच लिया कि ऐसा ही व्यवहार हर लड़की व महिला को झेलना पड़ता होगा। उसी दिन से बुलंद तरीके से आवाज उठाने लगी।
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20 लड़कियों को शोषण से बचाया
अंजू के अनुसार उनकी संस्था गांवों में सर्वे भी करती है। सर्वे में जानने की कोशिश होती है कि कितनी लड़कियों ने स्कूल छोड़ दिया, कितनी महिलाएं घूंघट निकालती है। कितनी महिलाओं को दहेज प्रथा का शिकार होना पड़ रहा है। सर्वे में आए नतीजों के आधार पर जागरूकता अभियान को बढ़ावा दिया जाता है। अंजू के अनुसार वह अब तक 20 लड़कियों को शोषण से बचा चुकी हैं। इन लड़कियों को स्कूल जाते समय भी छेड़छाड़ या फब्तियां कसने जैसी हरकतों से जूझना पड़ता था।
800 बच्चों को करवाया स्कूल में नियमित
अंजू की संस्था बच्चों के भी मूल अधिकारों का संरक्षण करती है। इसलिए स्कूल छोड़ने वाले या बाल मजदूरी करने वाले बच्चों को भी मुख्यधारा में वापस लाने के लिए संघर्ष करती हैं। अब तक बुलंद उड़ान संस्था 800 बच्चों को स्कूल में नियमित करवा चुकी है।
लेनदेन बैन मुहिम शुरू की
बुलंद उड़ान संस्था ने अब लेनदेन बैन मुहिम शुरू की है। अंजू बताती है कि दहेज तो एक बार देना पड़ता है। मगर छोटे-छोटे शगुन के नाम पर हर परिवार को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इससे बचने के चक्कर में आजकल लोग अपनों को भी नहीं बुला पाते हैं। इसी को लेकर उन्होंने लेनदेन बैन मुहिम शुरू की है। दहेज के साथ-साथ घरों में होने वाले अन्य छोटे-छोटे कार्यक्रमों में भी कोई पैसा या कपड़ा नहीं लेने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसके लिए 10-10 महिलाओं की टीम बनाई जा रही है।
दुष्कर्म पीड़िता की आवाज बनीं, तो मिली धमकी
अंजू बताती हैं कि एक दुष्कर्म पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने बीड़ा उठाया। इसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिली। मगर वह पीछे नहीं हटी। इसके बाद आरोपी को सात साल की सजा भी हुई है।
हर युवती या महिला को आजादी से जीने का अधिकार है। सालों से महिलाएं घूंघट करती आ रही हैं। कोरोना के कारण मुंह पर मास्क लगा तो पुरुषों की सांस आफत में आ गई। ऐसे में महिलाओं को कितनी दिक्कत होती है, यह समझ आ गया होगा। महिलाओं की आवाज को बुलंद करने के लिए ही हमने बुलंद उड़ान एनजीओ का गठन किया है।
- अंजू वर्मा, संस्थापक, बुलंद उड़ान