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एड्स मरीज को अस्पताल से निकाला
fatehabad
Updated Thu, 03 Jul 2014 11:25 PM IST
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गांव कुम्हारिया निवासी एड्स पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टरों ने इलाज करने से मनाकर दिया और उसे अस्पताल से बाहर निकाल दिया। पीड़ितों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टॉफ से हाथ जोड़कर प्रार्थना की पर कोई फायदा नहीं हुआ। थक हारकर परिजन एड्स पीड़ित को घर ले गए। इस घटना के समय सब लोग मूक दर्शक बने देखते रहे पर एड्स पीड़ित की मदद के लिए कोई आगे नहीं आया।
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एड्स पीड़ित का इलाज कराने आए उसके भाई ने बताया कि उसका भाई ट्रक ड्राइवर का काम करता था। कुछ समय बाद वह बीमार रहने लगा पर दवाई लेने पर वह ठीक हो जाता और काम पर दोबारा चला जाता। ऐसा कई सालों तक चलता रहा। एक दिन अचानक उसका भाई काफी बीमार पड़ गया। जब उसके टेस्ट करवाए तो पता चला कि उसका भाई एचआईवी पीड़ित है और इसे रोहतक ले जाना पड़ेगा।
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हफ्ता भर रोहतक में इलाज चलने के बाद उसे छुट्टी दे दी गई पर उसका इलाज ठीक से नहीं हो पाया और घर आने के एक दो दिन बाद वह फिर से और बीमार पड़ गया। उसे तुरंत सिविल अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया। पर डॉक्टरों ने उसका इलाज करने में असमर्थता जाहिर की और उसे दोबारा रोहतक ले जाने की बात कही। उसके भाई ने जब कहा कि वे रोहतक से अभी इलाज करवाकर आएं है और कोई फर्क नहीं पड़ा तो डॉक्टरों ने ग्लूकोज की बोतल चढ़ाकर उसे बाहर जाने का रास्ता दिखा दिया।
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पत्नी ने छोड़ दिया घर
पीड़ित के भाई ने बताया कि उसका भाई ट्रक ड्राइवर था। एचआईवी पॉजीटिव होने के बाद पत्नी उसके बेटे को लेकर मायके चली गई। परिवार के लोग ही उसका इलाज करवाने के लिए भटक रहे हैं।
इस बारे में सीएमओ एसबी कंबोज ने बतया कि रुटीन में हमारे यहां एड्स के मरीजों का इलाज किया जाता है। हो सकता है मरीज की हालत ज्यादा गंभीर हो इसलिए उसे रोहतक जाने के लिए बोला गया हो। मैं इस बारे में पूछताछ करूंगा। मरीजों के साथ बदसलूकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।