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Fatehabad News: एजेंसी ने 310 बेसहारा पशु पकड़े, भुगतान भी हुआ फिर भी शहर में घूम रहे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 08 May 2024 11:11 PM IST
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Agency caught 310 destitute animals, even after payment they were still roaming in the city
फतेहाबाद के हिसार रोड पर घुमते बेसहारा पशु।
फतेहाबाद। नगर परिषद में शहर में घूम रहे बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशाला और नंदीशाला में छोडऩे के लिए रेवाड़ी की एजेंसी को ठेका दे रखा है और भुगतान भी किया जा रहा है। लेकिन एजेंसी ने 10 से 15 दिन अभियान चलाने के बाद पकडऩा ही बंद कर दिया है और दोबारा एजेंसी ने काम ही शुरू नहीं किया है। हालात ये है कि शहर के मुख्य रोड और वार्डों की गलियों में बेसहारा पशु घूम रहे है। इनके कारण हादसे होने का भी डर बना रहता है।
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हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक एजेंसी ने चलाए गए अभियान में 310 पशु पकड़ने का दावा किया है और एजेंसी को भुगतान भी किया जा चुका है। शहर में हो चुके हादसे के बाद ही नगर परिषद ने पकड़ने के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू की थी। एजेंसी को नगर परिषद ने 920 रुपये प्रति पशु के हिसाब से ठेका दिया है। एजेंसी को पशु पकड़कर आसपास की गोशाला या फिर नंदीशाला में छोड़ा जाना है। यहां तक पशुओं की टैगिंग भी की जानी है। संवाद
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हिसार-सिरसा रोड पर जमावड़ा, गलियों में भी रहे घूम
बेसहारा पशुओं को लेकर बुधवार को पड़ताल की तो सामने आया कि शहर के हिसार-सिरसा रोड पर पशुओं को जमावड़ा लग रहा है। इसके अलावा शहर के नहर कॉलोनी, एमसी कॉलोनी, रतिया रोड, अग्रवाल कॉलोनी, हंस कॉलोनी, मिनी बाइपास, स्वामी नगर, भाटिया कॉलोनी, गुरुनानकपुरा मोहल्ला, धर्मशाला रोड पर पशुओं का जमावड़ा मिला। रात के समय पशु मुख्य सड़कों पर आ जाते हैं इस कारण हादसे का खतरा भी बढ़ जाता है।
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जगजीवनपुरा मोहल्ले में हुआ हादसा तो जागे थे अफसर
शहर के जगजीवनपुरा मोहल्ला में पिछले साल अगस्त माह में हादसा हुआ था। पार्षदों ने विरोध किया था तो अफसर जागे थे और टेंडर लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। जगजीवनपुरा मोहल्ला में पशुओं ने गली में खेल रहे बच्चे को उठाकर पटका था। इससे पहले शहर के सिरसा रोड पर बेसहारा पशुओं से टकराने से मोटरसाइकिल सवार दो दोस्तों की मौत भी हो चुकी है।

ठेके को लेकर एजेंसी पर लगाई गई थी 27 शर्तें
- पशुओं को पकडऩे के लिए ठेका एक साल के लिए होगा।
- पकड़े गए पशुओं को सुरक्षित गोशाला में छोडऩा होगा।
- पशुपालन विभाग के कर्मचारी पशुओं की टैगिंग करेंगे।
- गाड़ी में क्षमता से कम ही पशु लोड करने होंगे
- नगर परिषद सीमा में एक साल तक अगर पशु मिलता है तो उसे एजेंसी ही पकड़ेगी।
- एजेंसी के कर्मचारियों को 24 घंटे मोबाइल नंबर ऑन रखना होगा।
- नगर परिषद सीमा में जब भी एजेंसी पशु पकड़ेगी तो पहले मुनादी करवानी होगी ताकि कोई हादसा न हो सके।
- नगर परिषद सीमा में अगर बेसहारा पशु के कारण कोई चोटिल होता है या फिर मौत होती है तो इसकी जिम्मेदारी एजेंसी की होगी।
- एजेंसी को ये रिकॉर्ड भी रखना होगा कि कितने नंदी, कितने गाय व बछड़े पकड़कर गोशाला में छोड़े गए। गोशाला में किस कर्मचारी को पशु सौंपे गए हैं।
- पशुओं को पकड़ने और छोड़ने को लेकर पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी करनी होगी।
कोट
नगर परिषद ने एजेंसी को एक साल का ठेका दे रखा है। एजेंसी को कभी भी बुलाया जा सकता है। अगर शहर में बेसहारा पशुओं की संख्या बढ़ रही है तो एजेंसी को जल्द ही बुला लिया जाएगा और अभियान चलवाया जाएगा।
-राजेंद्र सोनी, ईओ नगर परिषद
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