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नौकरी लगवाने के नाम पर 50 हजार मांगने का आरोप, सीएमओ कार्यालय का कर्मचारी बर्खास्त
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फतेहाबाद। सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा 10 से ज्यादा अलग-अलग पदों पर भर्तियां निकाली हुई हैं। भर्ती को लेकर अभी प्रक्रिया चल रही है और मार्च में इसको लेकर परीक्षा होनी है। लेकिन इससे पहले नौकरी लगवाने के नाम पर सिविल सर्जन कार्यालय के आउटसोर्सिंग पर लगे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर रुपये मांगने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी ने नौकरी लगवाने के नाम पर 50 हजार रुपये मांगे है।
मामले की शिकायत सिविल सर्जन के पास पहुंची तो जांच की गई। इसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी द्वारा नौकरी लगवाने के नाम पर रुपये मांगने का मामला सही मिला। सीएमओ ने मामले में संज्ञान लेते हुए तुरंत बर्खास्त कर दिया है। ठेकेदार को भी इस बारे में सूचित कर दिया है। सिविल सर्जन कार्यालय में पारस चतुर्थ कर्मचारी है। बताया जा रहा है कि पारस ने अपनी जान पहचान सिविल सर्जन कार्यालय में होने की बात कही। इस दौरान एक व्यक्ति से नौकरी लगवाने के नाम पर 50 हजार रुपये मांग लिए। उसने पांच हजार रुपये पहले और 45 हजार रुपये बाद में देने की बात कही। इस मामले की शिकायत सिविल सर्जन के पास पहुंची। सीएमओ ने इस मामले की जांच शुरू की। सीएमओ ने दोनों पक्षों को बुलाया गया। पारस से जब पूछताछ की तो उसने माना कि रुपये मांगे थे। सीएमओ ने तुरंत प्रभाव से पारस की सेवाएं समाप्त कर दी है।
कोट
सिविल सर्जन कार्यालय में अलग-अलग पदों पर भर्ती निकली हुई है। कार्यालय में तैनात एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर आरोप थे कि उसने नौकरी लगवाने के नाम पर रुपये मांगे है। शिकायत के बाद मामले की जांच की गई तो कर्मचारी पारस दोषी निकला। उसे बर्खास्त कर दिया गया है।
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-डॉ. वीरेश भूषण, सिविल सर्जन
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मामले की शिकायत सिविल सर्जन के पास पहुंची तो जांच की गई। इसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी द्वारा नौकरी लगवाने के नाम पर रुपये मांगने का मामला सही मिला। सीएमओ ने मामले में संज्ञान लेते हुए तुरंत बर्खास्त कर दिया है। ठेकेदार को भी इस बारे में सूचित कर दिया है। सिविल सर्जन कार्यालय में पारस चतुर्थ कर्मचारी है। बताया जा रहा है कि पारस ने अपनी जान पहचान सिविल सर्जन कार्यालय में होने की बात कही। इस दौरान एक व्यक्ति से नौकरी लगवाने के नाम पर 50 हजार रुपये मांग लिए। उसने पांच हजार रुपये पहले और 45 हजार रुपये बाद में देने की बात कही। इस मामले की शिकायत सिविल सर्जन के पास पहुंची। सीएमओ ने इस मामले की जांच शुरू की। सीएमओ ने दोनों पक्षों को बुलाया गया। पारस से जब पूछताछ की तो उसने माना कि रुपये मांगे थे। सीएमओ ने तुरंत प्रभाव से पारस की सेवाएं समाप्त कर दी है।
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सिविल सर्जन कार्यालय में अलग-अलग पदों पर भर्ती निकली हुई है। कार्यालय में तैनात एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर आरोप थे कि उसने नौकरी लगवाने के नाम पर रुपये मांगे है। शिकायत के बाद मामले की जांच की गई तो कर्मचारी पारस दोषी निकला। उसे बर्खास्त कर दिया गया है।
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-डॉ. वीरेश भूषण, सिविल सर्जन