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Fatehabad News: नशे के अंधेरे में उम्मीद की रोशनी, पंचायत ने बदली जिंदगी

Sat, 10 Jan 2026 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sat, 10 Jan 2026 11:18 PM IST
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A ray of hope in the darkness of drug addiction, the Panchayat changed lives
सिद्वांत जैन, पुलिस अधीक्षक
फतेहाबाद। गांव भरपूर के एक युवक जो कि नशे के दलदल में फंसा था उसे सरपंच ने गोद लेकर नशा मुक्ति केंद्र में उपचार करवाया है। सरपंच ने दवाइयों व अन्य खर्च की जिम्मेदारी ली है।
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सरपंच की इस मुहिम से प्रेरित होकर अब 9 गांवों की पंचायतें आगे आईं हैं। ग्राम पंचायतें नशे के दलदल में फंसे दो-दो युवाओं को गोद लेकर उपचार करवाएंगे। गांव भरपूर निवासी अरुण कुमार करीब आठ साल पहले चिट्टा और उसके बाद मेडिकल नशे के दलदल में फंस गया। नशे के चलते अरुण परिवार और समाज से दूर होता चला गया।
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अरुण की शादी होने और पिता बनने के बाद भी हालात नहीं बदले। घर में गरीबी, कलह और निराशा ने डेरा डाल लिया और रिश्ते टूटने लगे। यह देख गांव भरपूर के सरपंच प्रतिनिधि दिनेश कुमार भारती आगे आए। उन्होंने अरुण को नशेड़ी नहीं, बल्कि अपने गांव का भटका हुआ बेटा माना।
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उन्होंने अरुण के भाई प्रहलाद से बात की और उपचार शुरू करवाया। नशा मुक्ति टीम प्रभारी सुंदर लाल ने अरुण की लगातार काउंसिलिंग की। उसे समझाया गया, संभाला गया और बार-बार यह एहसास दिलाया गया कि वह अकेला नहीं है। करीब तीन महीने तक अरुण को नशा मुक्ति केंद्र में रखा गया। अरुण के इलाज का खर्च सरपंच प्रतिनिधि दिनेश कुमार भारती ने खुद उठाया। उनकी यह मुहिम रंग लाई और अरुण नशे के दलदल से बाहर आ चुका है।
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प्रेरणा ले और पंचायतें आगे आईं

जिले के 9 गांवों की पंचायतों फूलां, बुर्जा, चिम्मो, चंदो, मुंशीवाला, लधुवास, अलीपुर बरोटा और कुनाल ने आगे आकर अपने-अपने गांवों के नशे से ग्रस्त दो-दो युवाओं को गोद लेने का संकल्प लिया। सरपंच अपने स्तर पर उनके इलाज, भोजन और देखभाल की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। यह दिखाता है कि जब समाज जागता है, तो बदलाव सिर्फ संभव नहीं, बल्कि स्थायी होता है।

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युवाओं को नशे के दलदल से बाहर निकालने के लिए सभी की जिम्मेदारी है। अगर हम प्रयास करेंगे तो जिला नशा मुक्त हो जाएगा। पुलिस टीमें भी अपने स्तर पर प्रयास कर रही हैं।


-सिद्धांत जैन, पुलिस अधीक्षक

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गलत संगत में फंसकर युवा नशे के दलदल में फंस रहे हैं। इन्हें बाहर निकालना हमारी जिम्मेदारी है। अगर सभी मिलकर थोड़ा-थोड़ा प्रयास करेंगे तो कामयाबी जरूर मिलेगी।

-दिनेश भारती, सरपंच प्रतिनिधि, गांव भरपूर

सिद्वांत जैन, पुलिस अधीक्षक

सिद्वांत जैन, पुलिस अधीक्षक

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