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Fatehabad News: पराली जलाने पर किसान के खिलाफ केस दर्ज
Thu, 23 Oct 2025 11:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 23 Oct 2025 11:25 PM IST
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फतेहाबाद। जिले में दिवाली के बाद अब किसानों ने धान के फसल अवशेषों में आग लगाने के मामले बढ़ने लगे हैं। बुधवार को हरसेक की ओर से जिले के टोहाना खंड के गांव सिंबलवाला और हिम्मतपुरा में आग लगाने की जानकारी मिली। इसके बाद कृषि एवं कल्याण विभाग के अधिकारियों ने मौके पहुंचकर जायजा लिया।
गांव सिंबलवाला में फसलों के अवशेषों को आग नहीं लगाई गई थी और हिम्मतपुरा में पराली वाले किसान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके साथ तक अब जिले में 4 किसानों की एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं।
पराली जलाने से जिले की हवा प्रदूषित हो चुकी है। वीरवार को जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 223 दर्ज किया गया। हालांकि थोड़ी राहत रही क्योंकि बुधवार को यह आंकड़ा 305 पहुंच गया था
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जिले में इन दिनों धान की कटाई का काम जोरों पर हैं। ऐसे में किसानों ने धान के फसल अवशेष के निपटान करने के लिए धान के फसल अवशेषों में आग लगानी शुरू कर दी है। दिवाली से पहले जिले में मात्र दो स्थानों पर फसल अवशेष जलाए गए थे लेकिन दिवाली की रात में 5 स्थानों पर आग लगाई गई। इसके बाद से लगातार आग लगाने के मामले आने लगे हैं। इ हालांकि पिछले साल की तुलना में इस बार पराली जलाने के मामलों में काफी गिरावट आई है। पिछले साल 20 अक्टूबर तक 50 स्थानों पर आग लगाई गई थी। जबकि इस बार मात्र पांच ही मामले मिले हैं।
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गांव सिंबलवाला में फसलों के अवशेषों को आग नहीं लगाई गई थी और हिम्मतपुरा में पराली वाले किसान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके साथ तक अब जिले में 4 किसानों की एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं।
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पराली जलाने से जिले की हवा प्रदूषित हो चुकी है। वीरवार को जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 223 दर्ज किया गया। हालांकि थोड़ी राहत रही क्योंकि बुधवार को यह आंकड़ा 305 पहुंच गया था
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जिले में इन दिनों धान की कटाई का काम जोरों पर हैं। ऐसे में किसानों ने धान के फसल अवशेष के निपटान करने के लिए धान के फसल अवशेषों में आग लगानी शुरू कर दी है। दिवाली से पहले जिले में मात्र दो स्थानों पर फसल अवशेष जलाए गए थे लेकिन दिवाली की रात में 5 स्थानों पर आग लगाई गई। इसके बाद से लगातार आग लगाने के मामले आने लगे हैं। इ हालांकि पिछले साल की तुलना में इस बार पराली जलाने के मामलों में काफी गिरावट आई है। पिछले साल 20 अक्टूबर तक 50 स्थानों पर आग लगाई गई थी। जबकि इस बार मात्र पांच ही मामले मिले हैं।