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टेंडरों की आस में लटकी है बजट बैठक, आचार संहिता लगी तो दो माह और लटकेगा शहर का विकास
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। नगर परिषद में सब कुछ सही नहीं है। शुरुआत से ही नगर परिषद प्रधान और पार्षदों की पटरी अधिकारियों के साथ नहीं जम रही है और इसका खामियाजा शहर के विकास को चुकाना पड़ रहा है। पिछले तीन साल में नगर परिषद में सिवाय इंटरलॉक टाइलों की एडजस्टमेंट के, विकास के नाम कोई नया काम नहीं हुआ। सभी मेगा प्रोजेक्ट्स अधर में लटके हुए हैं। अब ताजा कसर पिछली बैठक के बाद लगाए गए टेंडरों को रद्द करने के निर्देश ने पूरी कर दी है।
अब तक ये उम्मीद जताई जा रही थी कि इन टेंडरों के वर्क आर्डर जारी होने के बाद नगर परिषद की सालाना बजट बैठक बुला ली जाएगी, लेकिन अब चूंकि वर्क आर्डर ही नहीं हुए और उधर लोकसभा चुनाव मुहाने पर होने के चलते आचार संहिता का ऐलान किसी भी समय हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो बजट बैठक चुनावों के बाद ही जाकर हो सकेगी। इसका मतलब ये रहेगा कि शहर का विकास अगले तीन माह के लिए एक बार फिर से आपसी सिर-फुटव्वल की भेंट चढ़ जाएगा।
आमतौर पर नगर परिषद की बजट फरवरी में आयोजित होती रही है, लेकिन इस बार पूरा फरवरी निकलने के बाद भी नगर परिषद के प्रधान-पार्षद टेंडरों के लिए वर्क आर्डर अलाट होने का इंतजार करते रहे। अब मार्च शुरू हो चुका है। अभी भी नगर परिषद की सालाना बजट बैठक का कोई पता नहीं है। पिछली बैठक की बात की जाए तो पिछली बैठक 3 अक्तूबर 2018 को हुई थी। वो बैठक भी सात माह के लंबे इंतजार के बाद हुई थी। उस बैठक में कई प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किए गए थे, लेकिन पांच माह बीतने के बावजूद एक भी प्रस्ताव आज तक सिरे नहीं चढ़ा।
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इन प्रस्तावों पर पांच माह पहले बनी थी सहमति, अधर में लटके
1. दीवाली के बाद स्ट्रीट लाइटों को एलईडी से बदलना
2. डोर टू डोर कचरा कलेक्शन निजी एजेंसी को देना
3. शिवपुरी में 25 लाख की लागत से पार्क बनवाना
4. नंदीशाला को प्रतिमाह डेढ़ लाख रूपये की ग्रांट देना
5. शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाना
6. बंदर पकड़ने का ठेका दिया जाना था, फिलहाल टेंडर लगाया गया है।
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38 कामों के लगे थे टेंडर, 16 में अलॉट होना था वर्कआर्डर
नगर परिषद से मिली जानकारी के अनुसार अक्तूबर की मीटिंग के बाद विकास कामों के 38 टेंडर लगाए गए थे जिसमें से 16 कामों के टेंडर खोल दिए गए थे। लेकिन बाकी बचे 22 टेंडर अभी तक नहीं खोले जा सके हैं। ऐसे में इस बीच अगर आचार संहिता लगी तो पिछले विकास कार्य होने ही मुश्किल हो जाएंगे। उधर बजट बैठक ना होने से आगे होने वाले विकास कार्यों में भी देरी होनी तय है।
दमकल विभाग के प्रस्तावों को होल्ड पर रखवाया था पार्षदों ने, वो भी अधर में लटके
पिछले साल अक्तूबर में हुई नगर परिषद की बैठक के दौरान दमकल विभाग की ओर से तीन प्रस्ताव एजेंडे में शामिल किए गए थे। इनमें एक गाड़ी का फायर पंप ठीक करने, दमकल केंद्र में एसी कंप्यूटर रूम व फर्नीचर खरीदने एवं दमकल कार्यालय के ऊपर दमकलकर्मियों के लिए रेस्ट रूम बनवाना शामिल था। तत्कालीन नप ईओ अमन ढांडा ने जैसे ही ये प्रस्ताव बैठक में रखे, कई पार्षदों ने इस पर आपत्ति उठा दी थी। जिसके बाद इन प्रस्तावों को होल्ड पर रख दिया गया। अब अंदाजा लगाइये कि उस बैठक में दमकल विभाग के जरूरी प्रस्तावों पर होल्ड लगने के बाद अगली बैठक ही पांच माह बाद तक नहीं हो सकी है। ऐसे में उस विभाग के कामों को कैसे समय पर पूरा किया जा सकेगा।
वर्जन
जल्द ही नगर परिषद की सालाना बजट बैठक का आयोजन करवाएंगे। इसके लिए जरूरी प्रक्रिया बहुत जल्द शुरू कर देंगे। आचार संहिता के चलते विकास कार्यों को रुकने नहीं दिया जाएगा।
- दर्शन नागपाल, नगर परिषद अध्यक्ष, फतेहाबाद।
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फतेहाबाद। नगर परिषद में सब कुछ सही नहीं है। शुरुआत से ही नगर परिषद प्रधान और पार्षदों की पटरी अधिकारियों के साथ नहीं जम रही है और इसका खामियाजा शहर के विकास को चुकाना पड़ रहा है। पिछले तीन साल में नगर परिषद में सिवाय इंटरलॉक टाइलों की एडजस्टमेंट के, विकास के नाम कोई नया काम नहीं हुआ। सभी मेगा प्रोजेक्ट्स अधर में लटके हुए हैं। अब ताजा कसर पिछली बैठक के बाद लगाए गए टेंडरों को रद्द करने के निर्देश ने पूरी कर दी है।
अब तक ये उम्मीद जताई जा रही थी कि इन टेंडरों के वर्क आर्डर जारी होने के बाद नगर परिषद की सालाना बजट बैठक बुला ली जाएगी, लेकिन अब चूंकि वर्क आर्डर ही नहीं हुए और उधर लोकसभा चुनाव मुहाने पर होने के चलते आचार संहिता का ऐलान किसी भी समय हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो बजट बैठक चुनावों के बाद ही जाकर हो सकेगी। इसका मतलब ये रहेगा कि शहर का विकास अगले तीन माह के लिए एक बार फिर से आपसी सिर-फुटव्वल की भेंट चढ़ जाएगा।
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आमतौर पर नगर परिषद की बजट फरवरी में आयोजित होती रही है, लेकिन इस बार पूरा फरवरी निकलने के बाद भी नगर परिषद के प्रधान-पार्षद टेंडरों के लिए वर्क आर्डर अलाट होने का इंतजार करते रहे। अब मार्च शुरू हो चुका है। अभी भी नगर परिषद की सालाना बजट बैठक का कोई पता नहीं है। पिछली बैठक की बात की जाए तो पिछली बैठक 3 अक्तूबर 2018 को हुई थी। वो बैठक भी सात माह के लंबे इंतजार के बाद हुई थी। उस बैठक में कई प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किए गए थे, लेकिन पांच माह बीतने के बावजूद एक भी प्रस्ताव आज तक सिरे नहीं चढ़ा।
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इन प्रस्तावों पर पांच माह पहले बनी थी सहमति, अधर में लटके
1. दीवाली के बाद स्ट्रीट लाइटों को एलईडी से बदलना
2. डोर टू डोर कचरा कलेक्शन निजी एजेंसी को देना
3. शिवपुरी में 25 लाख की लागत से पार्क बनवाना
4. नंदीशाला को प्रतिमाह डेढ़ लाख रूपये की ग्रांट देना
5. शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाना
6. बंदर पकड़ने का ठेका दिया जाना था, फिलहाल टेंडर लगाया गया है।
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38 कामों के लगे थे टेंडर, 16 में अलॉट होना था वर्कआर्डर
नगर परिषद से मिली जानकारी के अनुसार अक्तूबर की मीटिंग के बाद विकास कामों के 38 टेंडर लगाए गए थे जिसमें से 16 कामों के टेंडर खोल दिए गए थे। लेकिन बाकी बचे 22 टेंडर अभी तक नहीं खोले जा सके हैं। ऐसे में इस बीच अगर आचार संहिता लगी तो पिछले विकास कार्य होने ही मुश्किल हो जाएंगे। उधर बजट बैठक ना होने से आगे होने वाले विकास कार्यों में भी देरी होनी तय है।
दमकल विभाग के प्रस्तावों को होल्ड पर रखवाया था पार्षदों ने, वो भी अधर में लटके
पिछले साल अक्तूबर में हुई नगर परिषद की बैठक के दौरान दमकल विभाग की ओर से तीन प्रस्ताव एजेंडे में शामिल किए गए थे। इनमें एक गाड़ी का फायर पंप ठीक करने, दमकल केंद्र में एसी कंप्यूटर रूम व फर्नीचर खरीदने एवं दमकल कार्यालय के ऊपर दमकलकर्मियों के लिए रेस्ट रूम बनवाना शामिल था। तत्कालीन नप ईओ अमन ढांडा ने जैसे ही ये प्रस्ताव बैठक में रखे, कई पार्षदों ने इस पर आपत्ति उठा दी थी। जिसके बाद इन प्रस्तावों को होल्ड पर रख दिया गया। अब अंदाजा लगाइये कि उस बैठक में दमकल विभाग के जरूरी प्रस्तावों पर होल्ड लगने के बाद अगली बैठक ही पांच माह बाद तक नहीं हो सकी है। ऐसे में उस विभाग के कामों को कैसे समय पर पूरा किया जा सकेगा।
वर्जन
जल्द ही नगर परिषद की सालाना बजट बैठक का आयोजन करवाएंगे। इसके लिए जरूरी प्रक्रिया बहुत जल्द शुरू कर देंगे। आचार संहिता के चलते विकास कार्यों को रुकने नहीं दिया जाएगा।
- दर्शन नागपाल, नगर परिषद अध्यक्ष, फतेहाबाद।