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Fatehabad News: जिले में पिछली बार की तुलना में 78% कम जले फसल अवशेष

Wed, 04 Dec 2024 11:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Wed, 04 Dec 2024 11:24 AM IST
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78% less crop residue burnt in the district compared to last time
भूना खंड के गांव में पराली प्रंबधन के लिए रखी गांठें।
फतेहाबाद। पराली प्रबंधन को लेकर प्रदेश सरकार की सख्ती और प्रशासन की जागरूकता के सकारात्मक नतीजे आए हैं। जिले में पिछले वर्ष धान के पूरे सीजन में 579 स्थानों पर फसल अवशेष जलाए गए थे। वहीं, इस बार जिले में मात्र 130 स्थानों पर फसल अवशेष जलाने के मामले आए हैं।
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जिले में पिछले साल की तुलना में इस बार 78 फीसदी कम फसल अवशेष जलाए गए।

इसका सबसे बड़ा कारण प्रदेश सरकार की सख्ती रही है। किसानों पर एफआईआर दर्ज करने और दो सीजन तक फसल एमएसपी पर नहीं बेचने के निर्देश जारी होते ही किसानों में खौफ बन गया।
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वहीं, 21,414 किसानों ने 1,97,988 एकड़ में पराली प्रबंधन के लिए पंजीकरण करवाया है। साथ ही जिले के 33 गांव रेड जोन से येलो जोन में आ गए हैं। इस तरह अब जिले का कोई भी गांव रेड जोन में नहीं है।
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इस कारण किसानों ने पराली जलाने के बजाय इसके प्रबंधन पर अधिक ध्यान दिया। विभाग ने पराली जलाने वाले किसानों पर 2,10,000 रुपये का जुर्माना किया है। 69 किसानों की रेड एंट्री दर्ज की है और 53 किसानों पर एफआईआर दर्ज करवाई है।
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पिछले साल 11,344 किसानों ने किया था पराली प्रबंधन
पिछले साल की अपेक्षा इस बार पराली प्रबंधन के लिए पंजीकरण करवाने वाले किसान 10 हजार से भी ज्यादा रहे हैं। इस बार पराली प्रबंधन के लिए 21,414 किसानों ने पंजीकरण करवाया है जबकि पिछले साल 11,344 किसान थे। काफी संख्या में किसानों ने सुपर सीडर से गेहूं की बिजाई करवा कर फसल अवशेषों का खेत में ही प्रबंधन कर दिया है। बड़ी संख्या में किसानों ने पराली की गांठें बनवाई है।
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पहले 76 गांव थे येलो जोन में, अब हुए 109
जिले में प्रशासन की ओर से पिछले दो-तीन वर्षों से 33 गांवों को रेड जोन में शामिल किया हुआ था। साथ ही 76 गांवों को येलो जोन में डाला हुआ था। मगर इस बार फसल अवशेष जलाने के मामले बेहद कम होने के कारण 33 गांवों को अब रेड जोन से हटाकर येलो जोन में शामिल कर दिया है। इस तरह अब 109 गांव येलो जोन में हो गए हैं। हालांकि, येलो जोन में से कोई भी गांव ग्रीन जोन में नहीं पहुंच सका है।

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जिले में इस बार किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक किया गया है। इससे फसल अवशेष जलने के मामलों में कमी दर्ज हुई है। इस बार कृषि एवं कल्याण विभाग की ओर से रेड जोन में शामिल गांवों पर कड़ी निगरानी रखी गई। जिसका परिणाम है कि जिले का कोई भी गांव अब रेड जोन में शामिल नहीं है।
डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, फतेहाबाद
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