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स्वतंत्रता सैनानी नसीब सिंह को राज्य मंत्री कर्णदेव कंबोज ने किया सम्मानित
Updated Wed, 24 Jan 2018 12:33 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भूना।
स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ने वाले आजाद हिंद फौज के 22 सैनिकों को सरकार ने विशेष रूप से प्रशंसा पत्र एवं उपहार देकर सम्मानित किया है। प्रदेश सरकार के लिए इन योद्धाओं का आशीर्वाद प्राप्त कर उन्हें नमन किया गया है। यह बात खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री कर्ण देव कंबोज ने मंगलवार को पुराना डाकघर वाली गली में आजाद हिंद फौज के सिपाही सरदार नसीब सिंह को सम्मानित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही।
कंबोज ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि ऐसे महान स्वतंत्रता संग्राम में जंग लड़कर अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले सैनिक के दर्शन करके आशीर्वाद लिया है। उन्होंने कहा कि इन्हीं की बदौलत ही हम आज आजादी की खुली सांसे ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने ऐसा पहला कार्य किया है जो स्वतंत्रता सेनानियों व उनके आश्रितों को घर पर जाकर सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस की बटालियन में शामिल सरदार नसीब सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाकर देश को आजादी दिलवाई थी। इस दौरान नसीब सिंह ने कई यातनाओं से भी गुजरना पड़ा।
ये है नसीब सिंह का परिचय
पुराने डाकघर वाली गली में 98 वर्षीय सरदार नसीब सिंह स्वतंत्रता सेनानी के दो बेटे हैं। जिनमें बड़ा बेटा जसबीर सिंह व छोटा बलबीर सिंह है। दोनों ही बेटों के दो-दो संताने हैं। बुढ़ापा होने के बावजूद स्वतंत्रता सेनानी नसीब सिंह बोलने व लिखने में दुरुस्त हैं। नसीब सिंह चार भाषाओं का ज्ञान रखते हैं। जो लिखते है और पढ़ते भी है। सरकार द्वारा प्रशंसा पत्र के बाद नसीब सिंह ने स्वयं इंगलिश में हस्ताक्षर किए। पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ किसान संघर्ष मोर्चा तैयार किया था। जिसके दौरान वह भाषण दे रहे थे तो अंग्रेजी हुकूमत में उन्हें डेढ़ साल के लिए जेल में बंद कर दिया। लेकिन जब वह बाहर आए तो उन्हें गांव छोक्कर में नजरबंद कर दिया गया। बताया कि देश को आजाद करने में जो सपना नेता सुभाष चंद्र जी बोस ने देखा था वह आज भी अधूरा है। इस अवसर पर जिला कष्ट निवारण समिति सदस्य गुलशन हंस, जिला परिषद फतेहाबाद के चेयरमैन दर्शन सिंह नागपाल, एसडीएम सतबीर सिंह जांगू, नायब तहसीलदार ईश्वर सिंह, सरदार पलविन्द्र सिंह छोक्कर, सरदार जसबीर सिंह, डीपीआरओ सुरेंद्र कुमार, एपीआरओ आत्मा राम, एसएचओ आत्मा राम बिश्रोई भी मौजूद थे।
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भूना।
स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ने वाले आजाद हिंद फौज के 22 सैनिकों को सरकार ने विशेष रूप से प्रशंसा पत्र एवं उपहार देकर सम्मानित किया है। प्रदेश सरकार के लिए इन योद्धाओं का आशीर्वाद प्राप्त कर उन्हें नमन किया गया है। यह बात खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री कर्ण देव कंबोज ने मंगलवार को पुराना डाकघर वाली गली में आजाद हिंद फौज के सिपाही सरदार नसीब सिंह को सम्मानित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही।
कंबोज ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि ऐसे महान स्वतंत्रता संग्राम में जंग लड़कर अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले सैनिक के दर्शन करके आशीर्वाद लिया है। उन्होंने कहा कि इन्हीं की बदौलत ही हम आज आजादी की खुली सांसे ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने ऐसा पहला कार्य किया है जो स्वतंत्रता सेनानियों व उनके आश्रितों को घर पर जाकर सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस की बटालियन में शामिल सरदार नसीब सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाकर देश को आजादी दिलवाई थी। इस दौरान नसीब सिंह ने कई यातनाओं से भी गुजरना पड़ा।
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ये है नसीब सिंह का परिचय
पुराने डाकघर वाली गली में 98 वर्षीय सरदार नसीब सिंह स्वतंत्रता सेनानी के दो बेटे हैं। जिनमें बड़ा बेटा जसबीर सिंह व छोटा बलबीर सिंह है। दोनों ही बेटों के दो-दो संताने हैं। बुढ़ापा होने के बावजूद स्वतंत्रता सेनानी नसीब सिंह बोलने व लिखने में दुरुस्त हैं। नसीब सिंह चार भाषाओं का ज्ञान रखते हैं। जो लिखते है और पढ़ते भी है। सरकार द्वारा प्रशंसा पत्र के बाद नसीब सिंह ने स्वयं इंगलिश में हस्ताक्षर किए। पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ किसान संघर्ष मोर्चा तैयार किया था। जिसके दौरान वह भाषण दे रहे थे तो अंग्रेजी हुकूमत में उन्हें डेढ़ साल के लिए जेल में बंद कर दिया। लेकिन जब वह बाहर आए तो उन्हें गांव छोक्कर में नजरबंद कर दिया गया। बताया कि देश को आजाद करने में जो सपना नेता सुभाष चंद्र जी बोस ने देखा था वह आज भी अधूरा है। इस अवसर पर जिला कष्ट निवारण समिति सदस्य गुलशन हंस, जिला परिषद फतेहाबाद के चेयरमैन दर्शन सिंह नागपाल, एसडीएम सतबीर सिंह जांगू, नायब तहसीलदार ईश्वर सिंह, सरदार पलविन्द्र सिंह छोक्कर, सरदार जसबीर सिंह, डीपीआरओ सुरेंद्र कुमार, एपीआरओ आत्मा राम, एसएचओ आत्मा राम बिश्रोई भी मौजूद थे।
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