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Fatehabad News: 50 साल पुराने बने पानी के टैंक, सेम का पानी हो रहा मिक्स, सफाई की व्यवस्था नहीं
Sun, 24 May 2026 10:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 24 May 2026 10:50 PM IST
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गांव ढांड में बना जलघर, जिसकी चहारदीवारी नहीं है। संवाद
फतेहाबाद। जलघरों में पानी के स्टॉक के लिए बनाए गए टैंक मानकों पर खरे नहीं उतर रहे है। भट्टू खंड के गांवों में स्थिति ज्यादा खराब है। इसके अलावा गांव बड़ोपल के साथ लगते गांवों में बने टैंकों की स्थिति भी अच्छी नहीं है। वजह ये है कि इन टैंकों की गहराई ज्यादा होने के कारण सेम का पानी मिक्स हो रहा है।
हालात ये है कि टीडीएस की मात्रा बढ़ रही है। कई टैंक ऐसे है जो कि 50 साल पहले बने थे और उनकी सुध भी नहीं ली गई है। कई गांवों में बने टैंकों की चहारदीवारी भी नहीं है और हादसों का अंदेशा रहता है। जिले के 259 गांवों में से 145 गांवों में नहरी पानी सप्लाई हो रहा है और 114 गांव ऐसे है जहां पर ट्यूबवेल का पानी सप्लाई हो रहा है।
भट्टूकलां क्षेत्र के गांव ठुईयां में स्थिति ज्यादा खराब है। सरपंच सुरेश कुमार का कहना है कि टैंक वर्ष 1977 में बना था। टैंक में काई तक जमा हो चुकी है कारण सफाई नहीं हो रही है। टैंक में सेम का पानी आ जाता है। कर्मचारी कम है इसके चलते वे ध्यान नहीं रख पाते हैं। सेमग्रस्त पानी मिक्स होकर आने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। फिलहाल नया टैंक बना रहा है। इसके बाद ही कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
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नहीं होती है सफाई, दीवार भी नहीं
गांव ढांड के जलघर के टैंक में चहारदीवारी भी नहीं बनी है। इसके चलते ग्रामीणों को हादसों की आशंका रहती है। सरपंच चंद्रमोहन का कहना है कि टैंकों की अच्छे से सफाई भी नहीं हो पा रही है। कई फिल्टर भी खराब हो चुके हैं।
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जलघर के टैंकों की नहीं बढ़ी क्षमता
गांव भिरड़ाना में वर्ष 1985 में जलघर बना था। ग्रामीणों का कहना है कि उस दौरान आबादी चार से पांच हजार थी। जबकि अब चार गुना तक बढ़ चुकी है। क्षमता न बढ़ने से पानी का गांव में संकट रहता है। कई पाइपें भी लीक है, इस वजह ये भी टैंक भर नहीं पाते हैं। हालात ये है कि टैंकर मंगवाकर काम चला रहे हैं।
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क्षेत्र के कई गांवों के जलघरों में मरम्मत कार्य होने है। सेमग्रस्त एरिया के गांवों टैंकों का भी सुधार होना है। वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं और कई जगहों पर काम भी शुरू हो गया है। अगले साल तक सभी दिक्कतें खत्म हो जाएंगी।
- सतपाल रोज, एसडीओ
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हालात ये है कि टीडीएस की मात्रा बढ़ रही है। कई टैंक ऐसे है जो कि 50 साल पहले बने थे और उनकी सुध भी नहीं ली गई है। कई गांवों में बने टैंकों की चहारदीवारी भी नहीं है और हादसों का अंदेशा रहता है। जिले के 259 गांवों में से 145 गांवों में नहरी पानी सप्लाई हो रहा है और 114 गांव ऐसे है जहां पर ट्यूबवेल का पानी सप्लाई हो रहा है।
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भट्टूकलां क्षेत्र के गांव ठुईयां में स्थिति ज्यादा खराब है। सरपंच सुरेश कुमार का कहना है कि टैंक वर्ष 1977 में बना था। टैंक में काई तक जमा हो चुकी है कारण सफाई नहीं हो रही है। टैंक में सेम का पानी आ जाता है। कर्मचारी कम है इसके चलते वे ध्यान नहीं रख पाते हैं। सेमग्रस्त पानी मिक्स होकर आने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। फिलहाल नया टैंक बना रहा है। इसके बाद ही कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
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नहीं होती है सफाई, दीवार भी नहीं
गांव ढांड के जलघर के टैंक में चहारदीवारी भी नहीं बनी है। इसके चलते ग्रामीणों को हादसों की आशंका रहती है। सरपंच चंद्रमोहन का कहना है कि टैंकों की अच्छे से सफाई भी नहीं हो पा रही है। कई फिल्टर भी खराब हो चुके हैं।
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जलघर के टैंकों की नहीं बढ़ी क्षमता
गांव भिरड़ाना में वर्ष 1985 में जलघर बना था। ग्रामीणों का कहना है कि उस दौरान आबादी चार से पांच हजार थी। जबकि अब चार गुना तक बढ़ चुकी है। क्षमता न बढ़ने से पानी का गांव में संकट रहता है। कई पाइपें भी लीक है, इस वजह ये भी टैंक भर नहीं पाते हैं। हालात ये है कि टैंकर मंगवाकर काम चला रहे हैं।
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क्षेत्र के कई गांवों के जलघरों में मरम्मत कार्य होने है। सेमग्रस्त एरिया के गांवों टैंकों का भी सुधार होना है। वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं और कई जगहों पर काम भी शुरू हो गया है। अगले साल तक सभी दिक्कतें खत्म हो जाएंगी।
- सतपाल रोज, एसडीओ

गांव ढांड में बना जलघर, जिसकी चहारदीवारी नहीं है। संवाद