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बीएसएनएल के 22 स्टाफ ने समय से पहले एकसाथ लिया वीआरएस
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बीएसएलएल से एक साथ वीआरएस लेने वाले 22 अधिकारी व कर्मचारी कार्यक्रम में मौजूद
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। भारत संचार निगम लिमिटेड कार्यालय में तैनात 22 अधिकारी और कर्मचारियों ने एक साथ समय से पूर्व रिटायरमेंट ले ली। इन्होंने एक साथ वीआरएस के लिए आवेदन किया था, इसे बीएसएनएल मुख्यालय ने मंजूर कर लिया। इसके बाद वीरवार को सेवानिवृत्ति कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें सभी 22 अधिकारियों व कर्मचारियों को विदाई दी गई।
वीरवार को जो सेवानिवृत्त हुए हैं उनमें एक डीईटी, तीन एसडीओ, एक जेटीओ, पांच जेई तथा 12 टीटी शामिल हैं। वीआरएस लेने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को नियम के अनुसार अभी सेवानिवृत्त होने में तीन से चार साल पड़े थे। बीएसएनएल में मंदी के चलते बंद होने या निजीकरण की आशंका से वीआरएस ले ली। हालांकि निजीकरण को कोई अधिकारी खुलकर सामूहिक वीआरएस का कारण नहीं बता रहे, लेकिन दबी जुबान में अधिकारी व कर्मचारी ये भी कह रहे हैं कि पिछले दो माह से सैलरी भी नहीं मिली है। बीएसएनएल के उच्च अधिकारियों की माने तो अब आउटसोर्सिंग से काम चलाया जाएगा।
ये हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्त
डीईटी आरके धींगड़ा, एसडीओ आरके तनेजा, एससी पिलानी, जितेंद्र, जेटीओ रामलाल, जेई सुभाष चंद्र, अशोक कुमार, यूएन दूबे, सौदागर सिंह, आफिस सुपरिंटेंडेंट जिले सिंह, टीटी एसएस नारंग, अवतार सिंह, धर्मपाल, कल्याण सिंह, राजेंद्र सिंह, देवनाथ, रविंद्र सिंह, हरवानी सिंह, चंद्रकांता, विजय सिंह, जगदीश, घड़सीराम
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जानिए अब क्या है स्थिति
भारत संचार निगम के फतेहाबाद कार्यालय में 32 अधिकारी व कर्मचारी तैनात थे, इसमें से 22 वीआरएस ले गए। अब 10 अधिकारियों और कर्मचारियों के जिम्मे बीएसएनएल का काम रहेगा।
वर्जन
सरकार की तरफ से वीआरएस को लेकर पैकेज दिया गया, इसी का फायदा लेकर ये 22 अधिकारी और कर्मचारी गए हैं। ये जरूर है कि दो माह से फंड की कमी के कारण सैलरी नहीं मिली है। व्यवस्था को संभालने के लिए आउटसोर्सिंग के लिए टेंडर हो गया है। बंद को लेकर पहले अफवाहें थी अब तो ऐसा भी नहीं है। बीएसएनएल अब दोबारा ग्रोथ कर रहा है।
- जेपी सिंह, महाप्रबंधक, बीएसएनएल
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वीरवार को जो सेवानिवृत्त हुए हैं उनमें एक डीईटी, तीन एसडीओ, एक जेटीओ, पांच जेई तथा 12 टीटी शामिल हैं। वीआरएस लेने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को नियम के अनुसार अभी सेवानिवृत्त होने में तीन से चार साल पड़े थे। बीएसएनएल में मंदी के चलते बंद होने या निजीकरण की आशंका से वीआरएस ले ली। हालांकि निजीकरण को कोई अधिकारी खुलकर सामूहिक वीआरएस का कारण नहीं बता रहे, लेकिन दबी जुबान में अधिकारी व कर्मचारी ये भी कह रहे हैं कि पिछले दो माह से सैलरी भी नहीं मिली है। बीएसएनएल के उच्च अधिकारियों की माने तो अब आउटसोर्सिंग से काम चलाया जाएगा।
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ये हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्त
डीईटी आरके धींगड़ा, एसडीओ आरके तनेजा, एससी पिलानी, जितेंद्र, जेटीओ रामलाल, जेई सुभाष चंद्र, अशोक कुमार, यूएन दूबे, सौदागर सिंह, आफिस सुपरिंटेंडेंट जिले सिंह, टीटी एसएस नारंग, अवतार सिंह, धर्मपाल, कल्याण सिंह, राजेंद्र सिंह, देवनाथ, रविंद्र सिंह, हरवानी सिंह, चंद्रकांता, विजय सिंह, जगदीश, घड़सीराम
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जानिए अब क्या है स्थिति
भारत संचार निगम के फतेहाबाद कार्यालय में 32 अधिकारी व कर्मचारी तैनात थे, इसमें से 22 वीआरएस ले गए। अब 10 अधिकारियों और कर्मचारियों के जिम्मे बीएसएनएल का काम रहेगा।
वर्जन
सरकार की तरफ से वीआरएस को लेकर पैकेज दिया गया, इसी का फायदा लेकर ये 22 अधिकारी और कर्मचारी गए हैं। ये जरूर है कि दो माह से फंड की कमी के कारण सैलरी नहीं मिली है। व्यवस्था को संभालने के लिए आउटसोर्सिंग के लिए टेंडर हो गया है। बंद को लेकर पहले अफवाहें थी अब तो ऐसा भी नहीं है। बीएसएनएल अब दोबारा ग्रोथ कर रहा है।
- जेपी सिंह, महाप्रबंधक, बीएसएनएल