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Fatehabad News: गांव कालवन में विदेश से आ रहे 21 प्रजातियों के पक्षी
Mon, 17 Feb 2025 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 17 Feb 2025 11:23 PM IST
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टोहाना के गांव कालवन स्थित प्रवासी पक्षी केंद्र में आए प्रवासी पक्षी।
टोहाना। गांव कालवन स्थित प्रवासी पक्षी संरक्षण स्थल पर 21 प्रवासी और 12 भारतीय सहित 34 प्रजातियां देखी जा रहीं हैं। विशेषज्ञों की टीम भी इस महर्षि दयानंद सरस्वती प्रवासी पक्षी संरक्षण स्थल का दौरा कर चुकी है।
गांव कालवन की सरपंच कविता देवी, पूर्व सरपंच भरत सिंह और ग्रामीण सुरेश सोनी ने बताया कि गांव में बने इस प्रवासी पक्षी संरक्षण स्थल पर मौसम के अनुसार कई देशों से पक्षी आते हैं। यहां 34 प्रजातियों के 1,806 पक्षी गांव में देखे गए हैं, इनमें चार प्रजातियां लुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं। इन प्रजातियों में कॉमन पोचार्ड और ब्लैक-टेल्ड गोडविट यह दोनों विदेशी पक्षियों कालवन में मिले हैं। कॉमन पोचार्ड को छोटी लालसरी पक्षी भी कहते हैं।
इन प्रजातियों के विलुप्त होने का कारण जलवायु परिवर्तन बताया गया है। पहले इस क्षेत्र में पेड़, पौधे अधिक होते थे लेकिन अब पेड़, पौधे काटे जाने से यह प्रजातियां विलुप्त होती जा रहीं हैं। ऐसे में इनके संरक्षण के लिए लोगों को भी पहल करने की जरूरत है।
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टोहाना, नरवाना, उकलाना, हिसार और जींद आदि क्षेत्रों से लोग दुर्लभ पक्षी देखने के लिए यहां आते हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ नई दिल्ली के डॉ. टीके राय समेत हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड और वन विभाग की टीम भी यहां पहुंचकर निरीक्षण कर चुकी है। ग्रामीणों ने इन अधिकारियों से कहा कि प्रवासी पक्षी संरक्षण स्थल को बढ़ाने के लिए हरियाणा सरकार को इसे विश्व धरोहर बनाना चाहिए।
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गांव कालवन की सरपंच कविता देवी, पूर्व सरपंच भरत सिंह और ग्रामीण सुरेश सोनी ने बताया कि गांव में बने इस प्रवासी पक्षी संरक्षण स्थल पर मौसम के अनुसार कई देशों से पक्षी आते हैं। यहां 34 प्रजातियों के 1,806 पक्षी गांव में देखे गए हैं, इनमें चार प्रजातियां लुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं। इन प्रजातियों में कॉमन पोचार्ड और ब्लैक-टेल्ड गोडविट यह दोनों विदेशी पक्षियों कालवन में मिले हैं। कॉमन पोचार्ड को छोटी लालसरी पक्षी भी कहते हैं।
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इन प्रजातियों के विलुप्त होने का कारण जलवायु परिवर्तन बताया गया है। पहले इस क्षेत्र में पेड़, पौधे अधिक होते थे लेकिन अब पेड़, पौधे काटे जाने से यह प्रजातियां विलुप्त होती जा रहीं हैं। ऐसे में इनके संरक्षण के लिए लोगों को भी पहल करने की जरूरत है।
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टोहाना, नरवाना, उकलाना, हिसार और जींद आदि क्षेत्रों से लोग दुर्लभ पक्षी देखने के लिए यहां आते हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ नई दिल्ली के डॉ. टीके राय समेत हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड और वन विभाग की टीम भी यहां पहुंचकर निरीक्षण कर चुकी है। ग्रामीणों ने इन अधिकारियों से कहा कि प्रवासी पक्षी संरक्षण स्थल को बढ़ाने के लिए हरियाणा सरकार को इसे विश्व धरोहर बनाना चाहिए।