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झूठी शिकायत करने वाले शिकायतकर्ता को कोर्ट ने लगाया 50 हजार रूपए जुर्माना
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:14 AM IST
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झूठी शिकायत करने वाले पर कोर्ट ने लगाया 50 हजार का जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद । झूठी शिकायत के एक मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ढांड निवासी गोपीराम को 50 हजार रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया है। इससे पहले निचली अदालत ने भी दो लोगों के खिलाफ गोपी राम द्वारा झूठी शिकायत करने पर 50 हजार का जुर्माना सुनाया था जिसके खिलाफ गोपीराम ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील की थी। लेकिन शनिवार को आए फैसले में गोपीराम की अपील उसके काम नहीं आई। अब उसे ढांड़ के ही दो भाइयों सुरेंद्र और दुनीचंद के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज करवाई थी जो झूठी निकली। गौरतलब है कि ढांड निवासी गोपी राम ने 12 मार्च 2011 को गांव के ही दो भाईयों सुरेन्द्र सिंह और दुनीचंद निचली अदालत में एक शिकायत दर्ज करवाई थी जिसके चलते दोनों भाइयों को सात दिन तक जेल में भी रहना पड़ा था। लेकिन बाद में सुनवाई के बाद निचली कोर्ट ने दोनों भाइयों के खिलाफ मामले को झूठा मानते हुए खारिज कर दिया था। मामला खारिज होने के बाद ढांड निवासी सुरेंद्र और दुनीचंद ने शिकायतकर्ता के खिलाफ सिविल कोर्ट में याचिका डाल दी और उनकी मानहानि के लिए दो लाख रुपये का हर्जाना मांगा। 28 नवंबर 2015 को सिविल कोर्ट ने गोपी राम को आदेश दिया था कि वो दोनों भाइयों को हर्जाने के तौर पर 50 हजार रुपये देगा, लेकिन गोपीराम ने हर्जाना देने की बजाए कोर्ट के फैसले को जिला एवं सत्र न्यायालय में चुनौती दे दी जिसमें सुनवाई के बाद आखिरकार जिला एवं सत्र न्यायाधीश एके वर्मा की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए गोपी राम को निर्देश दिए हैं कि झूठी शिकायत करने पर उसे 50 हजार रुपये हर्जाना तो भरना ही पड़ेगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद । झूठी शिकायत के एक मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ढांड निवासी गोपीराम को 50 हजार रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया है। इससे पहले निचली अदालत ने भी दो लोगों के खिलाफ गोपी राम द्वारा झूठी शिकायत करने पर 50 हजार का जुर्माना सुनाया था जिसके खिलाफ गोपीराम ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील की थी। लेकिन शनिवार को आए फैसले में गोपीराम की अपील उसके काम नहीं आई। अब उसे ढांड़ के ही दो भाइयों सुरेंद्र और दुनीचंद के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज करवाई थी जो झूठी निकली। गौरतलब है कि ढांड निवासी गोपी राम ने 12 मार्च 2011 को गांव के ही दो भाईयों सुरेन्द्र सिंह और दुनीचंद निचली अदालत में एक शिकायत दर्ज करवाई थी जिसके चलते दोनों भाइयों को सात दिन तक जेल में भी रहना पड़ा था। लेकिन बाद में सुनवाई के बाद निचली कोर्ट ने दोनों भाइयों के खिलाफ मामले को झूठा मानते हुए खारिज कर दिया था। मामला खारिज होने के बाद ढांड निवासी सुरेंद्र और दुनीचंद ने शिकायतकर्ता के खिलाफ सिविल कोर्ट में याचिका डाल दी और उनकी मानहानि के लिए दो लाख रुपये का हर्जाना मांगा। 28 नवंबर 2015 को सिविल कोर्ट ने गोपी राम को आदेश दिया था कि वो दोनों भाइयों को हर्जाने के तौर पर 50 हजार रुपये देगा, लेकिन गोपीराम ने हर्जाना देने की बजाए कोर्ट के फैसले को जिला एवं सत्र न्यायालय में चुनौती दे दी जिसमें सुनवाई के बाद आखिरकार जिला एवं सत्र न्यायाधीश एके वर्मा की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए गोपी राम को निर्देश दिए हैं कि झूठी शिकायत करने पर उसे 50 हजार रुपये हर्जाना तो भरना ही पड़ेगा।