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सेवा भाव से 15 किसानों ने शुरू किया था हाईवे किनारे लंगर, फिर बन गया फतेहाबाद में सबसे बड़ा पक्का मोर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Dec 2021 11:27 PM IST
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15 farmers had started langar along the highway with a service rate, with time it became the biggest pucca front in Fatehabad
फतेहाबाद। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब के आंदोलनरत किसानों ने 26 नवंबर 2020 को जब दिल्ली कूच किया तो अवरोध के बीच फतेहाबाद के रास्ते सफर तय करने वाले किसानों के लिए यहां के तीन किसानों की सेवा भाव की सोच से शुरू हुई लंगर सेवा वक्त बीतने के साथ जिले का सबसे बड़ा पक्का मोर्चा बन गया। नेशनल हाईवे-9 पर माजरा मोड़ पुल के नजदीक तीन किसानों सुरेंद्र शेखों, संदीप काजला और सुरेंद्र भूथन की लंगर चलाने की सोच को उनके 12 साथियों ने सफल बनाया। फिर धीरे-धीरे जैसे आंदोलन लंबा चला तो लंगर सेवा भी लंबी चलती गई। फतेहाबाद के 15 किसानों के इस प्रयास से धीरे-धीरे आसपास के किसान भी जुड़ने लगे। दिल्ली बॉर्डर पर जोर पकड़ते आंदोलन में फतेहाबाद के साथ लगते इलाकों के अलावा राजस्थान और पंजाब से किसानों का आना-जाना रहा तो यह लंगर सेवा किसानों लिए बड़ा सहारा बनी। इस लंगर सेवा को कुछ आर्थिक संकट भी बीच में झेलना पड़ा, लेकिन फिर समाजसेवी संगठनों और किसानी से प्रेम रखने वालों ने लंगर सेवा को मजबूती दी। अब स्थिति ऐसी है कि दिल्ली से लौट रहे किसानों का लंगर सेवा से जुड़े किसान फूल बरसाकर और उनके लिए देसी घी की जलेबियां बनाकर स्वागत कर रहे हैं। लंगर में रोटी और चाय-पानी की सेवा अभी भी संचालित है, जो दिल्ली से आखिरी जत्थे के लौटने तक जारी रहेगी।
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किसानों की भूख-प्यास की चिंता कर शुरू की थी सेवा
किसान नेता संदीप काजला बताते हैं कि एक साल पहले जब किसानों का दिल्ली कूच हुआ तो हमें लगा कि किसान बीच रास्ते पुलिस की लाठियों का सामना करते हुए, जाम में फंसकर भूखे-प्यासे होंगे। इसलिए मैं और मेरे साथी सुरेंद्र भूथन व सोनी शेखों ने किसानों के लिए ऐसी हालात में लंगर सेवा शुरू करने की सोची। इसके बाद हमारे अन्य 12 किसान साथियों ने भी इसमें सहयोग किया। 15 किसानों के साझे प्रयास से 14 दिसंबर 2020 को हाईवे किनारे लंगर सेवा शुरू की और उसके बाद लंगर सेवा पक्के मोर्चे के रूप में बदल गई। ये आंदोलन केवल एक किसानों का आंदोलन नहीं था, पूरे देश की जनता की जागरूकता का आंदोलन था।
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सेवा भाव देख किसान संगठनों ने भी प्रोत्साहित किया
संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े नेताओं का आंदोलन के दौरान जब लंगर स्थल से गुजरना हुआ तो लंगर सेवा के जरिये किसानी के प्रति लगाव और सेवा भाव देखकर उन्होंने ने लंगर चलाने वाले युवा व सहयोगी किसानों को प्रोत्साहित किया। इसका असर ये हुआ कि लंगर सेवा से जुड़े किसान न केवल लंगर सेवा चलाते बल्कि समय-समय पर हुई किसानों की रैली, सभा में भी पूरा सहयोग करते।
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करीब 95 लाख खर्च, कई सामाजिक कार्यकर्ताओं व संगठनों ने किया सहयोग
एक वर्ष होने तक लंगर सेवा में करीब 95 लाख का बजट खर्च होने का अनुमान है। किसान नेता संदीप बताते हैं कि एवरेज के हिसाब से प्रतिदिन का अनुमानित बजट करीब 25 हजार रुपये खर्च होता रहा। इस हिसाब से करीब 380 दिनों में 95 लाख रुपये का बजट खर्च होने का अनुमान है। शुरू में सब किसान साथियों ने बजट वहन किया, लेकिन आंदोलन लंबा चला तो बाद में कई सामाजिक कार्यकर्ता और संगठनों ने बजट मेंटेन रखने में काफी सहयोग किया।

आखिरी जत्थे और आखिरी ट्रैक्टर के लौटने तक जारी रहेगी लंगर सेवा
लंगर स्थल पर मौजूद किसान नेता जगबीर तूर ने कहा कि हमारी लंगर सेवा तब तक जारी रहेगी, जब तक दिल्ली आंदोलन में शामिल आखिरी जत्था और आखिरी ट्रैक्टर वापस नहीं लौटकर आ जाता। किसानों का स्वागत और लंगर सेवा इसी तरह जारी रहेगी।
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