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दस साल में 25 लाख पौधे रोपने का दावा, 60 फीसदी ही सुरक्षित बचे
Updated Sun, 04 Jun 2017 08:23 PM IST
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अमित रूखाया
फतेहाबाद।
जिले में पिछले दस सालों में वन विभाग 25 लाख पौधे लगाने का दावा करता है। लेकिन हैरानी इस बात की है कि पिछले दस सालों में जिले के वनक्षेत्र में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। वहीं बात करें पौधरोपण के लिए मिलने वाले ग्रांट की तो पिछले दस साल में प्रदेश सरकार जिला वन विभाग को तकरीबन 20 करोड़ से अधिक की राशि बतौर ग्रांट दे चुकी है। बावजूद इसके वन विभाग अपने लगाए गए 25 लाख पौधों में से 40 फीसदी पौधों को बचा तक नहीं पाया है। ये खुद वन विभाग के औपचारिक आंकड़े हैं, जिसकी पुष्टि जिले के निर्वतान जिला वन अधिकारी नरेश रंगा ने की है।
प्रति वर्ष लगभग दो करोड़ की ग्रांट, सरकारी भूमि पर ही ढाई लाख पौधों का दावा
वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो प्रदेश सरकार की ओर से प्रतिवर्ष लगभग दो करोड़ की ग्रांट फतेहाबाद जिले के वन विभाग को मिलती है। पिछले पांच सालों से तो लगातार ये ग्रांट विभाग के खाते में आती रही है और इसी के सहारे वन विभाग ने पिछले कई सालों में सरकारी भूमि पर लगभग ढाई लाख पौधे प्रतिवर्ष रोपे हैं। इसमें खुद वन विभाग के रोपे गए पौधे और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के दौरान किया गया पौधरोपण भी शामिल है।
दस साल में लगा दिए 25 लाख पौधे, सुरक्षित महज 60 फीसदी
अगर सरकारी आंकड़ों को ही आधार बनाया जाए तो फतेहाबाद जिले में पिछले दस सालों में तकरीबन 20 करोड़ की ग्रांट मिल चुकी है। खुद विभाग के आंकलन के मुताबिक प्रति साल ढाई लाख पौधों की औसत से जिले में लगभग 25 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। अगर ये स्थिति वास्तव में भी होती तो जिले के वन क्षेत्र की स्थिति कुछ और ही होती लेकिन हालात इससे कहीं बदतर हैं। खुद वन विभाग ये बात औपचारिक रूप से मानता है कि फतेहाबाद जिले में पौधों का सर्वावइल रेट 60 फीसदी के करीब है। इसका अभिप्राय ये हुआ कि 40 फीसदी पौधे नष्ट हो रहे हैं।
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15 जून से लेकर जुलाई-अगस्त तक होता है पौधारोपण का समय, लगाते हैं सर्दियों में
मौसम के लिहाज से 15 जून से लेकर जुलाई-अगस्त तक का समय पौधारोपण के लिए बेहतरीन माना जाता है। इसके पीछे वजह ये होती है कि 15 जून तक प्रदेश में प्री-मानसून आ चुका होता है और एक जुलाई से प्रदेश में मानसून का औपचारिक आगमन हो जाता है। 15 जून से पहले तेज गर्मी और अगस्त के बाद ठंड और पाले के चलते पौधे सरवाइव नहीं कर पाते और स्वत: नष्ट हो जाते हैं। लेकिन असल सच्चाई ये है कि ग्रांट में देरी और अन्य कारणों के चलते प्रतिवर्ष रोपे जाने वाले ढाई लाख पौधों में से लगभग एक लाख के करीब पौधों की रोपाई गलत समय पर होती है जिसके कारण जिले में पौधों का सर्वाइवल लगातार कम हो रहा है। फतेहाबाद जिले में अक्सर देखा गया है कि औपचारिक कार्यक्रमों को छोड़कर नियमित पौधारोपण लगभग अगस्त के अंत या सितंबर में जाकर पौधे रोपे जाते हैं और अक्तूबर से ठंड शुरु हो जाती है और पौधे विकसित नहीं हो पाते।
पिछले पांच सालों में इस तरह रोपे गए पौधे (ये आंकड़े सरकारी जमीन पर रोपे गए पौधो के हैं)
साल कुल पौधे
2012 242050
2013 253780
2014 251039
2015 252065
2016 270710
कुल 1269644
ये हैं पौधों के नष्ट होने के मुख्य कारण
1. गलत मौसम में पौधों का रोपा जाना
2. बेमौसमी पौधों को रोपने का प्रयास
3. फसल के फाने जलाने के समय सड़क किनारे पौधों का नष्ट होना
4. आवारा पशुओं की चपेट में आने से
5. ट्री-गार्ड या अन्य सुरक्षा ना होने से सहारा ना मिलने से
वन विभाग प्रतिवर्ष सरकारी जमीन पर लगभग ढाई लाख के करीब पौधे लगा लेता है। पिछले दस सालों में इस अनुमान से लगभग 25 लाख पौधे लगा दिए गए हैं। फतेहाबाद में पौधों का सर्वाइवल रेट कम है। लेकिन फसलों के फाने जलने, आवारा पशुओं की समस्या के कारण भी पौधे काफी मात्रा में नष्ट होते हैं। सबसे अधिक नुकसान सड़क किनारे लगाए गए पौधों का होता है।
नरेश रंगा, निवर्तमान वन अधिकारी, फतेहाबाद।
पर्यावरण दिवस विशेष....
दस साल में 25 लाख पौधे रोपने का दावा, 60 फीसदी ही सुरक्षित
फतेहाबाद जिले में पौधे लगाने के नाम पर सरकार ने फूंक दी 20 करोड़ की ग्रांट
गलत समय पर रोपण, फसलों के फाने की आग और आवारा पशु हैं पौधों के नष्ट होने की वजह
04एफटीबीपी28 : रतिया रोड़ पर खेतों में लगी आग से जलते सड़क किनारे पौधे । (फाइल फोटो)
फतेहाबाद।
जिले में पिछले दस सालों में वन विभाग 25 लाख पौधे लगाने का दावा करता है। लेकिन हैरानी इस बात की है कि पिछले दस सालों में जिले के वनक्षेत्र में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। वहीं बात करें पौधरोपण के लिए मिलने वाले ग्रांट की तो पिछले दस साल में प्रदेश सरकार जिला वन विभाग को तकरीबन 20 करोड़ से अधिक की राशि बतौर ग्रांट दे चुकी है। बावजूद इसके वन विभाग अपने लगाए गए 25 लाख पौधों में से 40 फीसदी पौधों को बचा तक नहीं पाया है। ये खुद वन विभाग के औपचारिक आंकड़े हैं, जिसकी पुष्टि जिले के निर्वतान जिला वन अधिकारी नरेश रंगा ने की है।
प्रति वर्ष लगभग दो करोड़ की ग्रांट, सरकारी भूमि पर ही ढाई लाख पौधों का दावा
वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो प्रदेश सरकार की ओर से प्रतिवर्ष लगभग दो करोड़ की ग्रांट फतेहाबाद जिले के वन विभाग को मिलती है। पिछले पांच सालों से तो लगातार ये ग्रांट विभाग के खाते में आती रही है और इसी के सहारे वन विभाग ने पिछले कई सालों में सरकारी भूमि पर लगभग ढाई लाख पौधे प्रतिवर्ष रोपे हैं। इसमें खुद वन विभाग के रोपे गए पौधे और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के दौरान किया गया पौधरोपण भी शामिल है।
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दस साल में लगा दिए 25 लाख पौधे, सुरक्षित महज 60 फीसदी
अगर सरकारी आंकड़ों को ही आधार बनाया जाए तो फतेहाबाद जिले में पिछले दस सालों में तकरीबन 20 करोड़ की ग्रांट मिल चुकी है। खुद विभाग के आंकलन के मुताबिक प्रति साल ढाई लाख पौधों की औसत से जिले में लगभग 25 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। अगर ये स्थिति वास्तव में भी होती तो जिले के वन क्षेत्र की स्थिति कुछ और ही होती लेकिन हालात इससे कहीं बदतर हैं। खुद वन विभाग ये बात औपचारिक रूप से मानता है कि फतेहाबाद जिले में पौधों का सर्वावइल रेट 60 फीसदी के करीब है। इसका अभिप्राय ये हुआ कि 40 फीसदी पौधे नष्ट हो रहे हैं।
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15 जून से लेकर जुलाई-अगस्त तक होता है पौधारोपण का समय, लगाते हैं सर्दियों में
मौसम के लिहाज से 15 जून से लेकर जुलाई-अगस्त तक का समय पौधारोपण के लिए बेहतरीन माना जाता है। इसके पीछे वजह ये होती है कि 15 जून तक प्रदेश में प्री-मानसून आ चुका होता है और एक जुलाई से प्रदेश में मानसून का औपचारिक आगमन हो जाता है। 15 जून से पहले तेज गर्मी और अगस्त के बाद ठंड और पाले के चलते पौधे सरवाइव नहीं कर पाते और स्वत: नष्ट हो जाते हैं। लेकिन असल सच्चाई ये है कि ग्रांट में देरी और अन्य कारणों के चलते प्रतिवर्ष रोपे जाने वाले ढाई लाख पौधों में से लगभग एक लाख के करीब पौधों की रोपाई गलत समय पर होती है जिसके कारण जिले में पौधों का सर्वाइवल लगातार कम हो रहा है। फतेहाबाद जिले में अक्सर देखा गया है कि औपचारिक कार्यक्रमों को छोड़कर नियमित पौधारोपण लगभग अगस्त के अंत या सितंबर में जाकर पौधे रोपे जाते हैं और अक्तूबर से ठंड शुरु हो जाती है और पौधे विकसित नहीं हो पाते।
पिछले पांच सालों में इस तरह रोपे गए पौधे (ये आंकड़े सरकारी जमीन पर रोपे गए पौधो के हैं)
साल कुल पौधे
2012 242050
2013 253780
2014 251039
2015 252065
2016 270710
कुल 1269644
ये हैं पौधों के नष्ट होने के मुख्य कारण
1. गलत मौसम में पौधों का रोपा जाना
2. बेमौसमी पौधों को रोपने का प्रयास
3. फसल के फाने जलाने के समय सड़क किनारे पौधों का नष्ट होना
4. आवारा पशुओं की चपेट में आने से
5. ट्री-गार्ड या अन्य सुरक्षा ना होने से सहारा ना मिलने से
वन विभाग प्रतिवर्ष सरकारी जमीन पर लगभग ढाई लाख के करीब पौधे लगा लेता है। पिछले दस सालों में इस अनुमान से लगभग 25 लाख पौधे लगा दिए गए हैं। फतेहाबाद में पौधों का सर्वाइवल रेट कम है। लेकिन फसलों के फाने जलने, आवारा पशुओं की समस्या के कारण भी पौधे काफी मात्रा में नष्ट होते हैं। सबसे अधिक नुकसान सड़क किनारे लगाए गए पौधों का होता है।
नरेश रंगा, निवर्तमान वन अधिकारी, फतेहाबाद।
पर्यावरण दिवस विशेष....
दस साल में 25 लाख पौधे रोपने का दावा, 60 फीसदी ही सुरक्षित
फतेहाबाद जिले में पौधे लगाने के नाम पर सरकार ने फूंक दी 20 करोड़ की ग्रांट
गलत समय पर रोपण, फसलों के फाने की आग और आवारा पशु हैं पौधों के नष्ट होने की वजह
04एफटीबीपी28 : रतिया रोड़ पर खेतों में लगी आग से जलते सड़क किनारे पौधे । (फाइल फोटो)