{"_id":"5a11c10b4f1c1b68678bcc9b","slug":"141511112971-fatehabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले के डेरा सत्संगघरों में नामचर्चा करने पहुंचे सैंकड़ों डेरा प्रेमी, अफसर बोले, नहीं ली गई परमिशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले के डेरा सत्संगघरों में नामचर्चा करने पहुंचे सैंकड़ों डेरा प्रेमी, अफसर बोले, नहीं ली गई परमिशन
Updated Sun, 19 Nov 2017 11:06 PM IST
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बिना प्रशासनिक अनुमति के डेरा प्रेमियों ने की नामचर्चा, प्रशासन करेगा स्थानीय कमेटी को तलब
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद । डेरा प्रमुख को दोषी करार देने और सजा दिए जाने के बाद फैले तनाव के चलते बंद किए गए डेरा सच्चा सौदा के सत्संग घरों में नामचर्चा आयोजित की गई। हैरानी की बात यह है कि जिले के तीनों ब्लॉकों में डेरा की स्थानीय कमेटियों ने प्रशासन से अनुमति तक नहीं ली, जबकि कुछ दिन पहले उपायुक्त हरदीप सिंह डेरा कमेटी को फतेहाबाद के सत्संगघर में नामचर्चा करने की अनुमति देने से इंकार कर चुके हैं। टोहाना और रतिया के एसडीएम ने भी डेरा कमेटी द्वारा नामचर्चा करने की अनुमति मांगने की बात से इंकार किया है। डीसी हरदीप सिंह ने भी टोहाना-जाखल और रतिया में नामचर्चा की अनुमति देने से इंकार किया है। हालांकि रतिया एसडीएम देवीलाल सिहाग ने इतना जरूर कहा कि उन्हें एसएचओ रतिया द्वारा यह मैसेज किया गया था कि रतिया संगतघर में डेराप्रेमी शांतिपूर्ण सत्संग कर रहे हैं। टोहाना एसडीएम सरजीत नैन ने सोमवार को डेरा की लोकल कमेटी को तलब करने की बात कही है। उधर रविवार शाम फतेहाबाद के संगतघर में हुई नामचर्चा में मंगलवार को दोबारा सत्संग करने की बात भी कही गई है। जिलेभर में एक साथ सत्संग शुरू होने से खुफिया विभाग भी हरकत में आ गया है, और इस मामले की पूरी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेजी जा रही है।
टोहाना-जाखल हैं संवेदनशील
डेरा सच्चा सौदा के पूर्व विवादों के चलते टोहाना और जाखल संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में यहां के सत्संगघर में बिना अनुमति नामचर्चा शुरू होना अपने आप में प्रशासन की सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जाखल में डेरा-सिक्ख विवाद के दौरान कई बार झड़पें भी हुई थी। जबकि डेरामुखी को सजा सुनाये जाने के बाद टोहाना शहर में ही नगर परिषद कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला हुआ था जिसका मुख्य आरोपी अभी तक फरार है और दूसरे आरोपी की बीते दिन ही जमानत याचिका खारिज हुई है। अब जब मामला मीडिया में उछला है तो एसडीएम सरजीत नैन ने सफाई दी है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी। सोमवार को वो डेरा की स्थानीय कमेटी के पदाधिकारियों को तलब कर उनसे इस बारे में जवाब मांगेंगे।
फतेहाबाद में डीसी पहले अनुमति देने से कर चुके थे इंकार
टोहाना-जाखल की तरह फतेहाबाद के संगतघर में भी नामचर्चा होने से प्रशासन पर अंगुलियां उठनी तय हैं क्योंकि फतेहाबाद सिरसा का सबसे साथ लगता जिला है। हालांकि पूरे विवाद के दौरान फतेहाबाद सबसे शांतिपूर्ण बना रहा और यहां पर कोई विवाद नहीं हुआ लेकिन इसके बावजूद सिरसा के साथ लगते जिला होने के चलते डीसी हरदीप सिंह ने बीते दिनों ही डेरा पदाधिकारियों को सत्संगघर में नामचर्चा की अनुमति देने से साफ इंकार कर दिया था।
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टोहाना-जाखल में डेरा संगतघरों में नामचर्चा के बारे में मुझे जानकारी नहीं थी। मुझसे कोई अनुमति नहीं ली गई है। सोमवार को डेरा कमेटी के सदस्यों को बुलाकर उनसे इस मामले में जवाब तलबी करूंगा।
सरजीत नैन, एसडीएम, टोहाना ।
रतिया के संगतघर में नामचर्चा के लिए अनुमति नहीं ली गई। मुझे एसएचओ के माध्यम से सूचना मिली थी कि यहां नामचर्चा शांतिपूर्ण हो रही है। शांतिपूर्ण सत्संग हो रहा था तो हमने कोई एक्शन नहीं लिया।
देवीलाल सिहाग, रतिया एसडीएम
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद । डेरा प्रमुख को दोषी करार देने और सजा दिए जाने के बाद फैले तनाव के चलते बंद किए गए डेरा सच्चा सौदा के सत्संग घरों में नामचर्चा आयोजित की गई। हैरानी की बात यह है कि जिले के तीनों ब्लॉकों में डेरा की स्थानीय कमेटियों ने प्रशासन से अनुमति तक नहीं ली, जबकि कुछ दिन पहले उपायुक्त हरदीप सिंह डेरा कमेटी को फतेहाबाद के सत्संगघर में नामचर्चा करने की अनुमति देने से इंकार कर चुके हैं। टोहाना और रतिया के एसडीएम ने भी डेरा कमेटी द्वारा नामचर्चा करने की अनुमति मांगने की बात से इंकार किया है। डीसी हरदीप सिंह ने भी टोहाना-जाखल और रतिया में नामचर्चा की अनुमति देने से इंकार किया है। हालांकि रतिया एसडीएम देवीलाल सिहाग ने इतना जरूर कहा कि उन्हें एसएचओ रतिया द्वारा यह मैसेज किया गया था कि रतिया संगतघर में डेराप्रेमी शांतिपूर्ण सत्संग कर रहे हैं। टोहाना एसडीएम सरजीत नैन ने सोमवार को डेरा की लोकल कमेटी को तलब करने की बात कही है। उधर रविवार शाम फतेहाबाद के संगतघर में हुई नामचर्चा में मंगलवार को दोबारा सत्संग करने की बात भी कही गई है। जिलेभर में एक साथ सत्संग शुरू होने से खुफिया विभाग भी हरकत में आ गया है, और इस मामले की पूरी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेजी जा रही है।
टोहाना-जाखल हैं संवेदनशील
डेरा सच्चा सौदा के पूर्व विवादों के चलते टोहाना और जाखल संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में यहां के सत्संगघर में बिना अनुमति नामचर्चा शुरू होना अपने आप में प्रशासन की सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जाखल में डेरा-सिक्ख विवाद के दौरान कई बार झड़पें भी हुई थी। जबकि डेरामुखी को सजा सुनाये जाने के बाद टोहाना शहर में ही नगर परिषद कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला हुआ था जिसका मुख्य आरोपी अभी तक फरार है और दूसरे आरोपी की बीते दिन ही जमानत याचिका खारिज हुई है। अब जब मामला मीडिया में उछला है तो एसडीएम सरजीत नैन ने सफाई दी है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी। सोमवार को वो डेरा की स्थानीय कमेटी के पदाधिकारियों को तलब कर उनसे इस बारे में जवाब मांगेंगे।
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फतेहाबाद में डीसी पहले अनुमति देने से कर चुके थे इंकार
टोहाना-जाखल की तरह फतेहाबाद के संगतघर में भी नामचर्चा होने से प्रशासन पर अंगुलियां उठनी तय हैं क्योंकि फतेहाबाद सिरसा का सबसे साथ लगता जिला है। हालांकि पूरे विवाद के दौरान फतेहाबाद सबसे शांतिपूर्ण बना रहा और यहां पर कोई विवाद नहीं हुआ लेकिन इसके बावजूद सिरसा के साथ लगते जिला होने के चलते डीसी हरदीप सिंह ने बीते दिनों ही डेरा पदाधिकारियों को सत्संगघर में नामचर्चा की अनुमति देने से साफ इंकार कर दिया था।
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टोहाना-जाखल में डेरा संगतघरों में नामचर्चा के बारे में मुझे जानकारी नहीं थी। मुझसे कोई अनुमति नहीं ली गई है। सोमवार को डेरा कमेटी के सदस्यों को बुलाकर उनसे इस मामले में जवाब तलबी करूंगा।
सरजीत नैन, एसडीएम, टोहाना ।
रतिया के संगतघर में नामचर्चा के लिए अनुमति नहीं ली गई। मुझे एसएचओ के माध्यम से सूचना मिली थी कि यहां नामचर्चा शांतिपूर्ण हो रही है। शांतिपूर्ण सत्संग हो रहा था तो हमने कोई एक्शन नहीं लिया।
देवीलाल सिहाग, रतिया एसडीएम