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राजा दशरथ की मृत्यु से अयोध्या में प्रजा हुई दुखी
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:51 AM IST
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राजा दशरथ की मृत्यु से अयोध्या में प्रजा हुई दुखी
अमर उजाला ब्यूरो।
भूना।
रामाकृष्णा कला मंच भूना की रामलीला में छठी रात को भरत मिलाप प्रसंग का मंचन किया गया। इसका शुभारंभ समाज सेवी अरुण सेठी और कश्मीरी रेवड़ी ने किया। राम, सीता और लक्ष्मण के वनवास जाने के दौरान नदी पार करते समय उनका सामना मल्लाहों से होता है। जब मलाहों को श्री रामचंद्र के आगमन की सूचना मिलती है वे उनकी पूजा कर नाव से नदी पार कराते हैं। दूसरी ओर अयोध्या नगरी में श्रीराम के वियोग में राजा दशरथ पुत्र वियोग में दम तोड़ देते हैं। राजा दशरथ की मृत्यु के बाद अयोध्या नगरी में मातम छा जाता है।
राजा दशरथ की मृत्यु की सूचना अपने नाना के घर रह रहे भरत और शत्रुघ्न को दी जाती है। जब भरत और शत्रुघ्न अयोध्या नगरी पहुंचते हैं तो उन्हें श्री राम के वनवास जाने का पता चलता है तो वे अपनी माता कैकेयी को बुरा भला सुनाते हैं। पुत्र की बात सुनकर माता कैकेयी को अपनी गलती का अहसास होता है। सभी जंगल जाते हैं। वहां राम-सीता और लक्ष्मण से कैकेयी अपनी गलती की माफी मांगती हैं और राजा दशरथ के निधन का समाचार सुनाती है। यह सुनकर श्रीराम चंद्र व्याकुल हो उठते हैं।
अध्योध्यावासी रामचंद्र से पुन: अयोध्या चलने के लिए आग्रह करते हैं। लेकिन, वे पिता के वचनों को निभाने के लिए पूरे 14 वर्ष तक वनों में ही रहने की बात कहते हैं। इसके बाद भरत अपने भाई राम की खड़ाऊ लेकर अयोध्या लौट आते हैं।
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आज के मंचन में दशरथ की भूमिका नरेंद्र रेवड़ी ने, कैकेयी की भूमिका सतीश बतरा ने, कौशल्या की भूमिका राजेंद्र कंबोज ने, सुमित्रा की भूमिका पुनीत सेठी, राम की भूमिका सुमित परवाना ने, सीता की भूमिका नवीन नारंग ने, भरत की भूमिका घन्नी खुराना, शत्रुघ्न की भूमिका उमंग खुराना, लक्ष्मण की भूमिका अमित एहलावादी ने निभाई। इस अवसर पर क्लब के प्रधान हरविंद्र महता, डायरेक्टर सुरेंद्र हंस और सुनील खुराना, मुकेश गिरधर, दिनेश गिरधर, अजय महता, संजय महता, अमित रेवड़ी, अमित जग्गा, हैप्पी खुराना, डॉ. श्याम लाल कंबोज, सुधीर धवन, प्रवीन कंबोज, नन्हा बतरा, गुलशन खुराना, पुलकित खुराना आदि मौजूद थे।
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अमर उजाला ब्यूरो।
भूना।
रामाकृष्णा कला मंच भूना की रामलीला में छठी रात को भरत मिलाप प्रसंग का मंचन किया गया। इसका शुभारंभ समाज सेवी अरुण सेठी और कश्मीरी रेवड़ी ने किया। राम, सीता और लक्ष्मण के वनवास जाने के दौरान नदी पार करते समय उनका सामना मल्लाहों से होता है। जब मलाहों को श्री रामचंद्र के आगमन की सूचना मिलती है वे उनकी पूजा कर नाव से नदी पार कराते हैं। दूसरी ओर अयोध्या नगरी में श्रीराम के वियोग में राजा दशरथ पुत्र वियोग में दम तोड़ देते हैं। राजा दशरथ की मृत्यु के बाद अयोध्या नगरी में मातम छा जाता है।
राजा दशरथ की मृत्यु की सूचना अपने नाना के घर रह रहे भरत और शत्रुघ्न को दी जाती है। जब भरत और शत्रुघ्न अयोध्या नगरी पहुंचते हैं तो उन्हें श्री राम के वनवास जाने का पता चलता है तो वे अपनी माता कैकेयी को बुरा भला सुनाते हैं। पुत्र की बात सुनकर माता कैकेयी को अपनी गलती का अहसास होता है। सभी जंगल जाते हैं। वहां राम-सीता और लक्ष्मण से कैकेयी अपनी गलती की माफी मांगती हैं और राजा दशरथ के निधन का समाचार सुनाती है। यह सुनकर श्रीराम चंद्र व्याकुल हो उठते हैं।
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अध्योध्यावासी रामचंद्र से पुन: अयोध्या चलने के लिए आग्रह करते हैं। लेकिन, वे पिता के वचनों को निभाने के लिए पूरे 14 वर्ष तक वनों में ही रहने की बात कहते हैं। इसके बाद भरत अपने भाई राम की खड़ाऊ लेकर अयोध्या लौट आते हैं।
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आज के मंचन में दशरथ की भूमिका नरेंद्र रेवड़ी ने, कैकेयी की भूमिका सतीश बतरा ने, कौशल्या की भूमिका राजेंद्र कंबोज ने, सुमित्रा की भूमिका पुनीत सेठी, राम की भूमिका सुमित परवाना ने, सीता की भूमिका नवीन नारंग ने, भरत की भूमिका घन्नी खुराना, शत्रुघ्न की भूमिका उमंग खुराना, लक्ष्मण की भूमिका अमित एहलावादी ने निभाई। इस अवसर पर क्लब के प्रधान हरविंद्र महता, डायरेक्टर सुरेंद्र हंस और सुनील खुराना, मुकेश गिरधर, दिनेश गिरधर, अजय महता, संजय महता, अमित रेवड़ी, अमित जग्गा, हैप्पी खुराना, डॉ. श्याम लाल कंबोज, सुधीर धवन, प्रवीन कंबोज, नन्हा बतरा, गुलशन खुराना, पुलकित खुराना आदि मौजूद थे।