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ऊर्जा क्षेत्र बचाने को लेकर बिजली कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
Updated Wed, 25 Oct 2017 11:50 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
ऊर्जा क्षेत्र को निजीकरण की नीतियों से बचाने, बिजली सेवाओं में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी, पार्ट टाइम, कैजुअल व अनुबंध कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करवाने व समान काम के लिए समान वेतन देने आदि मांगों को लेकर आज इलैक्ट्रीसिटी इम्पलाइज फैडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर ऑल हरियाणा पॉवर कार्पोरेशन वर्कर यूनियन यूनिट फतेहाबाद द्वारा सभी सब यूनिटों पर गेट मीटिंगों का आयोजन कर प्रदर्शन किए गए। इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव (बिजली) हरियाणा सरकार के नाम सभी एसडीओ को ज्ञापन सौंपे गए।
33केवी फतेहाबाद के प्रांगण में हुई गेट मीटिंग की अध्यक्षता सिटी सब यूनिट के प्रधान सुरेश कुमार व संचालन यूनिट वरिष्ठ उपप्रधान पवन कड़वा ने किया। 132 केवी फतेहाबाद के प्रांगण में आयोजित गेट मीटिंग की अध्यक्षता टीएल सब यूनिट प्रधान संदीप सैनी व संचालन सब यूनिट सचिव नरेन्द्र नेगी ने किया। गेट मीटिंगों को संबोधित करते हुए ईईएफआई के केन्द्रीय कमेटी सदस्य व एएचपीसी वर्कर यूनियन के राज्य सचिव अजय वशिष्ठ, केन्द्रीय कमेटी सदस्य विष्णु बिश्नोई, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान एवं सर्कल सचिव भूप सिंह भड़ोलांवाली, यूनिट सचिव प्रदीप यादव ने कहा कि देश में 1991 के बाद नवउदारीकरण, आऊटसोर्सिंग, निजीकरण की नीतियां लागू होने के कारण 1999 से 2004 तक देश पर राज करने वाली केन्द्र की एनडीए सरकार ने बिजली कानून-2003 बनाया तथा राज्यों के बिजली बोर्डों को तोड़कर निगम बनाए गए। जब बोर्डों का घाटा 25 हजार करोड़ था व लगभग स्थाई रोजगार था लेकिन अब निगमों का घाटा बढ़कर 7 लाख करोड़ को भी पार कर गया है व ऊर्जा क्षेत्र में अस्थाई रोजगार हो गया है।
घाटे की समीक्षा करने की बजाय अब केन्द्र की एनडीए सरकार बिजली संशोधन कानून-2015 लेकर आ रही है जिससे किसानों व गरीब जनता को मिलने वाले क्रोस सबसिडी व सबसिडी बंद हो जाएगी तथा प्रसारण व वितरण के लाइसेंस प्राइवेट खिलाड़ियों को दे दिए जाएंगे। सरकार की इन नीतियों से पूंजीपतियों का मुनाफा बढ़ रहा है तथा मजदूर-कर्मचारी का वेतन घट रहा है। बेरोजगारी, महंगाई बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जब तक ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को पक्के कर्मचारियों के बराबर वेतन, भत्ते व मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलती तथा ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण, आऊटसोर्सिंग की नीतियों पर सरकार ब्रेक नहीं लगाती, तब तक आंदोलन जारी रहेंगे। उन्होंने सभी कर्मचारियों को देश की 10 ट्रेड यूनियनों व संगठनों द्वारा दिल्ली में 9 से 11 नवम्बर को आयोजित महापड़ाव में भी भाग लेने का आह्वान किया। गेट मीटिंग को नरेन्द्र भट्टी, कुलदीप सागर, रमेश, सतपाल, भागवंती, कान्ता, दलबीर, बुधराम, मुकेश, भैराराम, संजय, अजय, सतबीर आदि ने भी संबोधित किया।
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फतेहाबाद।
ऊर्जा क्षेत्र को निजीकरण की नीतियों से बचाने, बिजली सेवाओं में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी, पार्ट टाइम, कैजुअल व अनुबंध कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करवाने व समान काम के लिए समान वेतन देने आदि मांगों को लेकर आज इलैक्ट्रीसिटी इम्पलाइज फैडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर ऑल हरियाणा पॉवर कार्पोरेशन वर्कर यूनियन यूनिट फतेहाबाद द्वारा सभी सब यूनिटों पर गेट मीटिंगों का आयोजन कर प्रदर्शन किए गए। इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव (बिजली) हरियाणा सरकार के नाम सभी एसडीओ को ज्ञापन सौंपे गए।
33केवी फतेहाबाद के प्रांगण में हुई गेट मीटिंग की अध्यक्षता सिटी सब यूनिट के प्रधान सुरेश कुमार व संचालन यूनिट वरिष्ठ उपप्रधान पवन कड़वा ने किया। 132 केवी फतेहाबाद के प्रांगण में आयोजित गेट मीटिंग की अध्यक्षता टीएल सब यूनिट प्रधान संदीप सैनी व संचालन सब यूनिट सचिव नरेन्द्र नेगी ने किया। गेट मीटिंगों को संबोधित करते हुए ईईएफआई के केन्द्रीय कमेटी सदस्य व एएचपीसी वर्कर यूनियन के राज्य सचिव अजय वशिष्ठ, केन्द्रीय कमेटी सदस्य विष्णु बिश्नोई, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान एवं सर्कल सचिव भूप सिंह भड़ोलांवाली, यूनिट सचिव प्रदीप यादव ने कहा कि देश में 1991 के बाद नवउदारीकरण, आऊटसोर्सिंग, निजीकरण की नीतियां लागू होने के कारण 1999 से 2004 तक देश पर राज करने वाली केन्द्र की एनडीए सरकार ने बिजली कानून-2003 बनाया तथा राज्यों के बिजली बोर्डों को तोड़कर निगम बनाए गए। जब बोर्डों का घाटा 25 हजार करोड़ था व लगभग स्थाई रोजगार था लेकिन अब निगमों का घाटा बढ़कर 7 लाख करोड़ को भी पार कर गया है व ऊर्जा क्षेत्र में अस्थाई रोजगार हो गया है।
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घाटे की समीक्षा करने की बजाय अब केन्द्र की एनडीए सरकार बिजली संशोधन कानून-2015 लेकर आ रही है जिससे किसानों व गरीब जनता को मिलने वाले क्रोस सबसिडी व सबसिडी बंद हो जाएगी तथा प्रसारण व वितरण के लाइसेंस प्राइवेट खिलाड़ियों को दे दिए जाएंगे। सरकार की इन नीतियों से पूंजीपतियों का मुनाफा बढ़ रहा है तथा मजदूर-कर्मचारी का वेतन घट रहा है। बेरोजगारी, महंगाई बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जब तक ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को पक्के कर्मचारियों के बराबर वेतन, भत्ते व मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलती तथा ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण, आऊटसोर्सिंग की नीतियों पर सरकार ब्रेक नहीं लगाती, तब तक आंदोलन जारी रहेंगे। उन्होंने सभी कर्मचारियों को देश की 10 ट्रेड यूनियनों व संगठनों द्वारा दिल्ली में 9 से 11 नवम्बर को आयोजित महापड़ाव में भी भाग लेने का आह्वान किया। गेट मीटिंग को नरेन्द्र भट्टी, कुलदीप सागर, रमेश, सतपाल, भागवंती, कान्ता, दलबीर, बुधराम, मुकेश, भैराराम, संजय, अजय, सतबीर आदि ने भी संबोधित किया।
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