{"_id":"5780f5cf7e99b878a940889f07d1d9fc","slug":"farmers-will-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"जमीन बचाने के लिए हाईकोर्ट जाएंगे किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जमीन बचाने के लिए हाईकोर्ट जाएंगे किसान
रेवाड़ी/ब्यूरो
Updated Mon, 14 Oct 2013 12:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब रेवाड़ी के पांच गांवों के किसानों ने जमीन अधिग्रहण के विरोध में एक नए मंच से मोर्चा खोल दिया है।
रविवार सुबह 10 बजे क्षेत्र के गांव कालका में लाल सिंह की अध्यक्षता में पांच गांवों के किसानों ने पंचायत कर भूमि अधिग्रहण के खिलाफ सात सदस्यीय कोर कमेटी का गठन किया। पंचायत में अधिग्रहण के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने और कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने का निर्णय लिया गया। हुडा द्वारा इन गांवों की 400 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है।
पंचायत में कालका, मांढया, पीवरा, झांझनवास और कौनसीवास के किसानों ने कालका निवासी प्यारेलल पंच, सतीश कुमार, ब्रज मोहन व भगवान सिंह, पीवरा गांव से ओमप्रकाश नंबरदार और झांझनवास से पार्षद गुरदयाल नंबरदार को कोर कमेटी में शामिल किया गया है।
इस वजह से बना नया फ्रंट
बावल के 16 गांवों की 3700 एकड़ जमीन एचएसआईडीसी और रेवाड़ी के पांच गांवों की 400 एकड़ जमीन हुडा द्वारा अधिग्रहित की जा रही है। इसके विरोध में भूमि अधिग्रहण विरोधी संघर्ष समिति के बैनर तले संघर्ष किया जा रहा है। सात अक्टूबर को समिति से वार्ता में उद्योग मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने स्पष्ट कर दिया था कि हुडा द्वारा रेवाड़ी तहसील की भूमि के अधिग्रहण के संबंध में वे कुछ करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा उन्होंने साफ कर दिया था कि अधिग्रहण नए नहीं अपितु पुराने कानून के तहत किया जा रहा है। इसके बाद रेवाड़ी तहसील के पांच गांवों कि समिति में शामिल किसानों ने 11 अक्तूबर की बैठक में भाग नहीं लिया। समिति के कुछ सदस्यों का कहना है कि सरकार ने एक साजिश के तहत संघर्ष समिति को बांट दिया है।
विज्ञापन
किसानों और पुलिस के बीच हुआ था टकराव
16 जुलाई को जिला सचिवालय पर धरने के दौरान और 22 जुलाई को आसलवास में महापंचायत के समय किसानों और पुलिस में खूनी संघर्ष हुआ था। इसमें किसानों पर मामले दर्ज हुए थे। उसके बाद 25 जुलाई को सीएम ने समिति से वार्ता की थी। सरकार ने संघर्ष समिति से वार्ता करने के लिए रणदीप सिंह सुरजेवाला और राव नरेंद्र सिंह की कमेटी गठित की थी।
इन गांवों की जमीन का होना है अधिग्रहण
रेवाड़ी तहसील केगांव कालका, मांढया, पीवरा, झांझनवास और कौनसीवास 400 एकड़ जमीन का हुडा ने अधिग्रहण कर दफा 4 व 6 का नोटिस जारी किया हुआ है। बावल तहसील के 16 गांवों की एचएसआईडीसी ने 3700 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने के लिए दफा 4 व 6 का नोटिस दिया है। बावल, बनीपुर, खेड़ा मुरार, मंगलेश्वर, इब्राहिमपुर, पातुहेड़ा, आसलवास, डयोढई, लोधाना, कसौला, कसौली, गढी और बोलनी गांव इसमें शामिल हैं।
विज्ञापन
रविवार सुबह 10 बजे क्षेत्र के गांव कालका में लाल सिंह की अध्यक्षता में पांच गांवों के किसानों ने पंचायत कर भूमि अधिग्रहण के खिलाफ सात सदस्यीय कोर कमेटी का गठन किया। पंचायत में अधिग्रहण के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने और कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने का निर्णय लिया गया। हुडा द्वारा इन गांवों की 400 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है।
पंचायत में कालका, मांढया, पीवरा, झांझनवास और कौनसीवास के किसानों ने कालका निवासी प्यारेलल पंच, सतीश कुमार, ब्रज मोहन व भगवान सिंह, पीवरा गांव से ओमप्रकाश नंबरदार और झांझनवास से पार्षद गुरदयाल नंबरदार को कोर कमेटी में शामिल किया गया है।
विज्ञापन
इस वजह से बना नया फ्रंट
बावल के 16 गांवों की 3700 एकड़ जमीन एचएसआईडीसी और रेवाड़ी के पांच गांवों की 400 एकड़ जमीन हुडा द्वारा अधिग्रहित की जा रही है। इसके विरोध में भूमि अधिग्रहण विरोधी संघर्ष समिति के बैनर तले संघर्ष किया जा रहा है। सात अक्टूबर को समिति से वार्ता में उद्योग मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने स्पष्ट कर दिया था कि हुडा द्वारा रेवाड़ी तहसील की भूमि के अधिग्रहण के संबंध में वे कुछ करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा उन्होंने साफ कर दिया था कि अधिग्रहण नए नहीं अपितु पुराने कानून के तहत किया जा रहा है। इसके बाद रेवाड़ी तहसील के पांच गांवों कि समिति में शामिल किसानों ने 11 अक्तूबर की बैठक में भाग नहीं लिया। समिति के कुछ सदस्यों का कहना है कि सरकार ने एक साजिश के तहत संघर्ष समिति को बांट दिया है।
विज्ञापन
किसानों और पुलिस के बीच हुआ था टकराव
16 जुलाई को जिला सचिवालय पर धरने के दौरान और 22 जुलाई को आसलवास में महापंचायत के समय किसानों और पुलिस में खूनी संघर्ष हुआ था। इसमें किसानों पर मामले दर्ज हुए थे। उसके बाद 25 जुलाई को सीएम ने समिति से वार्ता की थी। सरकार ने संघर्ष समिति से वार्ता करने के लिए रणदीप सिंह सुरजेवाला और राव नरेंद्र सिंह की कमेटी गठित की थी।
इन गांवों की जमीन का होना है अधिग्रहण
रेवाड़ी तहसील केगांव कालका, मांढया, पीवरा, झांझनवास और कौनसीवास 400 एकड़ जमीन का हुडा ने अधिग्रहण कर दफा 4 व 6 का नोटिस जारी किया हुआ है। बावल तहसील के 16 गांवों की एचएसआईडीसी ने 3700 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने के लिए दफा 4 व 6 का नोटिस दिया है। बावल, बनीपुर, खेड़ा मुरार, मंगलेश्वर, इब्राहिमपुर, पातुहेड़ा, आसलवास, डयोढई, लोधाना, कसौला, कसौली, गढी और बोलनी गांव इसमें शामिल हैं।