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पर्यावरण के मामले में प्रदेश की हालात सबसे खराब : मेनका गांधी

Wed, 02 Oct 2013 09:51 PM IST
फतेहाबाद/ब्यूरो
फतेहाबाद/ब्यूरो Updated Wed, 02 Oct 2013 09:51 PM IST
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Environment case worst scenario of the state : Maneka Gandhi
पीपुल्स फार एनीमल्स की अध्यक्षा एवं सांसद मेनका गांधी ने हरियाणा के जिला फतेहाबाद के गांव बड़ोपल में कहा कि पर्यावरण के मामले में हरियाणा प्रदेश की हालत सबसे खराब है। हरियाणा में मात्र एक प्रतिशत पेड़ रह गए हैं, यह खतरनाक है। 
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राज्य में चिड़िया समेत अनेक दुर्लभ जीव पूरी तरह से लुप्त हो गए हैं। वे बुधवार को गांव बड़ोपल में अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा के धरने को संबोधित कर रही थीं।
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यह धरना गोरखपुर परमाणु संयंत्र की 185 एकड़ में प्रस्तावित आवासीय कालोनी के विरोध में दिया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता आदमपुर की विधायिका रेणुका बिश्नोई ने की।
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उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति की जरूरत के लिए साल में सात पेड़ काटने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि पेड़ होंगे तो ही जानवर बच पाएंगे।

वन्य जीव एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विलक्षण कार्य कर रही सांसद मेनका गांधी ने कहा कि पर्यावरण व जीव रक्षा एक जंग है, इसे हमें जीतना ही होगा तभी देश बच पाएगा।

उन्होंने कहा कि आज पूरे देश में मात्र 16 गिद्ध रह गए हैं। गिद्ध के लुप्त होने से भी पर्यावरण नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि हर जीव और पशु जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बिश्नोई समाज ने पर्यावरण व जीव रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं और अब बिश्नोई समाज को हरियाणा को हरा-भरा करने की दिशा में आंदोलन चलाना चाहिए, ताकि हरियाणा में जीवों को बचाया जा सके।

उन्होंने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पानी की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने गांवों में तालाब बनवाए। आज पूरे गुजरात में 91 हजार तालाब हैं।

इस तरह के कार्य हरियाणा में भी शुरू किए जा सकते हैं। उन्होंने हरियाणा सरकार को भी घेरते हुए कहा कि सरकार गो और ऊंट तस्करी को बढ़ावा दे रही है।

विधायक रेनुका बिश्नोई ने कहा कि पिछले 88 दिनों से जीवों को बचाने के लिए सभा के सदस्य संघर्ष कर रहे हैं, परंतु यह गूंगी बहरी सरकार जीव प्रेमियों की बात को सुन नहीं रही।

प्लांट के लिए यह जमीन अभी अधिग्रहण की गई है, पर ये जीव तो यहां सदियों से रह रहे हैं। यह जमीन इनका घर है।

इनका घर उजाड़कर यहां कालोनी बसाना वैसा ही है जैसे किसी का घर उजाड़कर अपना घर बसाना। हम इस हक में बिल्कुल भी नहीं है।

उन्होंने कहा कि इस जमीन पर अभयारण (सेंक्च्युरी) बनाई जाए, यह सरकार की जिम्मेवारी है। इस दौरान स्वामी कृपाचार्य, पूर्व संसदीय सचिव दूड़ाराम, रमेश राहड़, प्रवीण बिश्नोई, द्वारका प्रसाद, साहबराम बिश्नोई, सुभाष देहडू, कृष्ण काकड़, विनोद कड़वासरा, मोलूराम आदि उपस्थित थे।



... जमीन अधिग्रहण पर खड़ा कर सकता है संकट
एनपीसीआईएल ने गांव बडोपल की 188 एकड़ में आवासीय कालोनी बनानी है, लेकिन यहां पर पिछले दिनाें काफी हिरण एनपीसीआईएल की बाढ़ में फंसकर मारे जा चुके है।

इस जमीन पर हजारों की संख्या में वन्य जीव हैं। अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा का कहना है कि अगर इस जमीन को एक्वायर किया गया तो हजारों जीवों के सामने संकट उत्पन्न हो जाएगा।


इसीलिए सभा ने जमीन एक्वायर करने के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका डाली थी, जिस पर हाईकोर्ट ने फिलहाल स्टे जारी कर दिया है। सभा की मांग है कि इस जमीन को वन्य जीव अभियारण घोषित किया जाए।

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