{"_id":"210018d0eb92293799dea0fb75f63d4e","slug":"dulina-case-guilty-received-a-bail","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुलीना प्रकरण : दोषी को मिली जमानत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुलीना प्रकरण : दोषी को मिली जमानत
झज्जर/ब्यूरो
Updated Fri, 20 Sep 2013 10:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीमकोर्ट ने शुक्रवार को पांच लोगों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा भुगत रहे हरियाणा के जिला झज्जर की गउशाला के पूर्व प्रधान ओम प्रकाश कबलाना की जमानत दे दी है। इससे पहले मामले के एक अन्य आरोपी रमेश को भी सुप्रीमकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2003 में तत्कालीन चौटाला सरकार के शासनकाल में झज्जर-गुड़गांव मार्ग पर गांव दुलीना के पास दशहरे वाले दिन उग्र भीड़ ने उस समय पांच लोगों की हत्या कर दी थी, जब वे गाय की खाल उतार रहे थे। इस मामले पर संसद में भी काफी हंगामा हुआ था।
उस समय पांच लोगों की हत्या के मामले में पुलिस ने उग्र भीड़ में से करीब तीन दर्जन लोगों को हत्या को आरोपी मानते हुए गिरफ्तार किया था। माननीय जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एके जैन ने आरोपियों में से केवल सात को ही हत्या को दोषी मानते हुए अन्य सभी को बरी कर दिया था।
विज्ञापन
अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए सभी दोषियों ने हाईकोर्ट में मामले की अरली हियरिंग की दरख्वास्त दी थी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत की सजा को बरकरार रखा था।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार वर्ष 2003 में तत्कालीन चौटाला सरकार के शासनकाल में झज्जर-गुड़गांव मार्ग पर गांव दुलीना के पास दशहरे वाले दिन उग्र भीड़ ने उस समय पांच लोगों की हत्या कर दी थी, जब वे गाय की खाल उतार रहे थे। इस मामले पर संसद में भी काफी हंगामा हुआ था।
विज्ञापन
उस समय पांच लोगों की हत्या के मामले में पुलिस ने उग्र भीड़ में से करीब तीन दर्जन लोगों को हत्या को आरोपी मानते हुए गिरफ्तार किया था। माननीय जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एके जैन ने आरोपियों में से केवल सात को ही हत्या को दोषी मानते हुए अन्य सभी को बरी कर दिया था।
विज्ञापन
अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए सभी दोषियों ने हाईकोर्ट में मामले की अरली हियरिंग की दरख्वास्त दी थी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत की सजा को बरकरार रखा था।