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Coronavirus: 'चिल्ला' की मदद से दिल्ली-NCR के बड़े हॉटस्पॉट का हुआ खुलासा, पढ़ें नूंह की कहानी

Thu, 09 Apr 2020 04:10 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 09 Apr 2020 04:10 PM IST
सार

  • चिल्ला परंपरा थी सबसे मजबूत कड़ी, कई बार आते-जाते थे मरकज
  • यह पता लगाया कि 286 लोग ऐसे जो कोरोना पॉजिटिव लोगों के सीधे संपर्क में आए
  • अब 148 गांवों में प्रवेश करने और बाहर निकलने पर रोक लगी
  •  36 गांवों को पूरी तरह सील करके 112 अन्य गांवों को बफर क्षेत्र मानकर जांच जारी
  • आठ अप्रैल को 11 ऐसे लोग खुद सामने आए, बताया वे मरकज गए थे
  • अब नूंह में 38 कोरोना के मरीज,  62 अस्पताल में भर्ती

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Coronavirus: Tablighi Jamaat traces its origins to the Mewat region, good relationship chilla tradition
tablighi jamaat - फोटो : PTI (File)

विस्तार

हरियाणा में मेवात के नूंह में आठ अप्रैल को 11 लोग खुद सामने आए और उन्होंने बताया कि वे निजामुद्दीन मरकज गए थे। अब नूंह में 38 कोरोना के मरीज हैं। नूंह में स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जिस शिद्दत से इधर बीच काम किया है और जो चुनौतियां अभी भी वहां मुंह बाए खड़ी हैं, उनकी कहानी रोचक है।  
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नूंह जिले के चीफ मेडिकल अफसर डॉ. कुलदीप यादव बताते हैं, “हमें यह तो पता चल गया था कि निजामुद्दीन मरकज से बड़ी संख्या में तबलीगी जमाती मेवात में आए हैं। स्वास्थ्य महकमे को यह जानकारी भी थी कि जमातियों में केवल भारतीय नहीं, बल्कि विदेशी मुल्कों के लोग भी हैं।

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जिला प्रशासन अपने काम में जुट ही रहा था कि मीडिया में नूंह टॉप ट्रेंड करने लगा। दिल्ली-एनसीआर के बहुत करीब होने की वजह से हड़कंप जैसी स्थिति बन गई। खैर, प्रशासन के लोग अपने काम पर लग चुके थे।
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सबसे पहले यह पता लगाया गया कि मरकज में किस तरह के लोग यहां आए हैं। यह बहुत जरूरी था। अगर हमें यह पता नहीं चलता कि वहां से 'चिल्ला' परंपरा वाले आए हैं, तो कोरोना के संक्रमण को पकड़ पाना आसान नहीं होता।

मेवात के सभी इलाकों में यह मालूम किया कि निजामुद्दीन मरकज से लौटने वालों में कितने लोग ऐसे हैं जो 'चिल्ला' परंपरा वाले हैं।

चिल्ला परंपरा थी सबसे मजबूत कड़ी

डॉ. कुलदीप कहते हैं कि हम कोरोना वायरस से जारी इस लड़ाई में अपने जिले के कप्तान डीसी पंकज और दूसरे अधिकारियों के साथ दिन-रात काम कर रहे हैं। कहते हैं, हमारे पास एक अंदाजे की संख्या भी थी कि इतने लोग दिल्ली से आए हैं। हमने पता लगाया कि तब्लीगी जमात में कौन-कौन शामिल होते हैं।

मालूम पड़ा कि वहां की कई तरह की धार्मिक परंपराएं हैं। जैसे 'चिल्ला', इसमें धर्म के प्रचार के लिए जमात के लोग 40 दिन की यात्रा पर निकलते हैं। दूसरे, ऐसे भी लोग होते हैं लो 120 दिन वाले होते हैं। 40 दिन वाले मरकज में दो या तीन-बार जाते हैं।

जैसे शुरू में गए, वापस लौट आए। इसके बाद दोबारा चले गए। जब मरकज के धार्मिक कार्यक्रम का समापन होता है तो फिर ये लोग वहां से मेवात पहुंचते हैं। दो हजार से अधिक लोगों का मार्च में निजामुद्दीन मरकज से मेवात आना-जाना हुआ था।

दूसरी तरफ, 120 दिन वाले वे होते हैं जो एक बार जाते हैं और उसके बाद अपने अपने इलाकों में धार्मिक प्रचार के लिए निकल पड़ते हैं। चिल्ला परंपरा वालों का पता लगाना हमारे लिए बहुत अहम था। हमने मेवात के लोगों से पता लगाया कि कहां पर कितने ऐसे लोग हैं जो चिल्ला वाले हैं।

बहुतों से लोगों का पता चल गया। इसके बाद हमारी राह कुछ आसान हो गई। वजह, संक्रमण होने का खतरा इन्हीं लोगों से ज्यादा था, क्योंकि ये कई बार मरकज में गए और आए हैं।

 चेन बनती गई, टेस्ट होते रहे, अब हर घर का सर्वे, यानी संपूर्ण जांच...

नूंह के डीसी पंकज बताते हैं, हमारे लिए यह उतना आसान नहीं था, लेकिन हम आगे बढ़ते रहे। इलाके के मुअज्जिज लोगों से अपील की गई कि वे जमातियों के बारे में सूचना दें। साथ ही यह पता लगा कि 84 विदेशी लोग भी मेवात आए हैं।

फिर यह पता लगा लिया गया  कि 286 लोग ऐसे रहे हैं जो कोरोना पॉजिटिव लोगों के सीधे संपर्क में आए थे। फिर 1267 लोगों को सर्विलांस में रखा गया।

अभी तक 130 लोगों का सर्विलांस पीरियड पूरा हो गया है और 1137 लोग सर्विलांस के तहत हैं, 378 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, 318 लोगों की सैंपल रिपोर्ट निगेटिव आई है और 38 लोगों का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव मिला है।

पंकज कहते हैं कि जब देखा कि यह चेन बहुत लंबी हो रही है, तो हमने हर घर के सर्वे शुरू किया, जिसके अब दो-तीन दिन में पूरा होने की उम्मीद है। गुरुवार को एक बार फिर मुअज्जिज लोगों की बैठक बुलाई है। जनप्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे।

उनसे अपील की जाएगी कि जल्द से जल्द ऐसे लोगों को जांच के लिए तैयार करें जो मरकज से लौटे हैं या वे उनके संपर्क में रहे हैं। अब 148 गांवों में प्रवेश करने और बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई है और 36 गांवों को पूरी तरह सील करके 112 अन्य गांवों को बफर क्षेत्र मानकर जांच की जा रही है। घर-घर जाकर स्कैनिंग शुरू कर दी गई है।

अब सभी लोगों की जांच की जाएगी

सीएमओ कहते हैं, हमारी टीम सुबह सात बजे काम में लग जाती है। कहीं पर कोई शक होने की उम्मीद नहीं छोड़ेंगे। सरकार तो पहले ही अपील कर रही है कि जिसे खुद में या किसी अन्य में कोरोना के लक्षण प्रतीत होते हैं तो वे सामने आएं।



सरकार उनकी जांच और इलाज कराएगी। कोई जानबूझकर छिपता है तो कार्रवाई होगी। इसका नतीजा यह हुआ कि आठ अप्रैल को 11 ऐसे लोग खुद सामने आ गए। उन्होंने बताया कि वे मरकज में गए थे।

अब नूंह में 38 कोरोना के मरीज हैं, 22 नतीजे आने बाकी हैं और 62 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। पॉजिटिव रिपोर्ट वालों में श्रीलंका के 6, दक्षिण अफ्रीका 1, इंडोनेशिया 1, थाईलैंड 1 केरल 5, जम्मू-कश्मीर 3, बिहार 5, यूपी 5, मध्यप्रदेश 2, महाराष्ट्र 2, तमिलनाडु 2, आंध्रप्रदेश 2 और नूंह के तीन लोग शामिल हैं।

गांव में जांच कर रही टीम के साथ पुलिसकर्मी भी लगाए गए हैं, ताकि कहीं कोई टीम के सदस्यों के साथ अभद्रता न कर सके।
 

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