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हत्या के दोषी को उम्रकैद
सोनीपत/ब्यूरो
Updated Wed, 25 Dec 2013 09:52 PM IST
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हरियाणा के सोनीपत जिला एवं सत्र न्यायाधीश इंद्रजीत मेहता की अदालत ने हत्या के दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 77 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
जुर्माने की राशि में से 70 हजार रुपये पीड़ित परिवार को दिए जाएंगे। जुर्माना अदा न करने की सूरत में एक साल अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार गांव गुमड़ निवासी महाबीर ने 30 जुलाई, 2010 को पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा था कि घटना की रात रात करीब साढ़े नौ बजे गांव राजलुगढ़ी निवासी विकास उर्फ विक्की और मुकेश निवासी खलीला कार में उसके घर पहुंचे।
दोनों किसी बात को लेकर उसके बेटे जगमिंद्र के साथ रंजिश रखते थे। उन्होंने घर में आते ही जगमिंद्र पर गोली चला दी, लेकिन वह बच गया।
उसने वहां पड़ी कुल्हाड़ी उठाकर हमलावरों पर फेंका, जिससे उनकी पिस्तौल वहीं गिर गई। इसी बीच जगमिंद्र ने अपने बचाव के लिए पिस्तौल उठा ली थी।
धक्का-मुक्की में गोली चलने से विकास की मौत हो गई थी। विकास के चाचा सतबीर ने बताया कि जगमिंद्र और विक्की का आपस में पैसों का लेन-देन था।
पुलिस ने जगमिंद्र को चार अगस्त, 2010 को काबू किया था। अदालत से जमानत के बाद वह भूमिगत हो गया था।
31 जनवरी, 2011 को अदालत ने उसे उद्घोषित अपराधी घोषित कर दिया था। तीन जुलाई, 2011 को पुलिस ने आरोपी जगमिंद्र को पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
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इसके बाद उसे हत्या के मामले में प्रोडक्शन वारंट पर लिया गया। मामले की सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश इंद्रजीत मेहता की अदालत ने जगमिंद्र को हत्या का दोषी करार दिया।
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जुर्माने की राशि में से 70 हजार रुपये पीड़ित परिवार को दिए जाएंगे। जुर्माना अदा न करने की सूरत में एक साल अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार गांव गुमड़ निवासी महाबीर ने 30 जुलाई, 2010 को पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा था कि घटना की रात रात करीब साढ़े नौ बजे गांव राजलुगढ़ी निवासी विकास उर्फ विक्की और मुकेश निवासी खलीला कार में उसके घर पहुंचे।
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दोनों किसी बात को लेकर उसके बेटे जगमिंद्र के साथ रंजिश रखते थे। उन्होंने घर में आते ही जगमिंद्र पर गोली चला दी, लेकिन वह बच गया।
उसने वहां पड़ी कुल्हाड़ी उठाकर हमलावरों पर फेंका, जिससे उनकी पिस्तौल वहीं गिर गई। इसी बीच जगमिंद्र ने अपने बचाव के लिए पिस्तौल उठा ली थी।
धक्का-मुक्की में गोली चलने से विकास की मौत हो गई थी। विकास के चाचा सतबीर ने बताया कि जगमिंद्र और विक्की का आपस में पैसों का लेन-देन था।
पुलिस ने जगमिंद्र को चार अगस्त, 2010 को काबू किया था। अदालत से जमानत के बाद वह भूमिगत हो गया था।
31 जनवरी, 2011 को अदालत ने उसे उद्घोषित अपराधी घोषित कर दिया था। तीन जुलाई, 2011 को पुलिस ने आरोपी जगमिंद्र को पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
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इसके बाद उसे हत्या के मामले में प्रोडक्शन वारंट पर लिया गया। मामले की सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश इंद्रजीत मेहता की अदालत ने जगमिंद्र को हत्या का दोषी करार दिया।