{"_id":"6317866ac8fbc7444e59cb87","slug":"worrying-african-swine-fever-now-knocks-after-lumpy-four-pigs-found-infected-charkhidadri-news-hsr6411945139","type":"story","status":"publish","title_hn":"चिंताजनक: लंपी के बाद अब अफ्रेकिन स्वाइन फीवर की दस्तक, चार सूअर मिले संक्रमित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चिंताजनक: लंपी के बाद अब अफ्रेकिन स्वाइन फीवर की दस्तक, चार सूअर मिले संक्रमित
विज्ञापन
चरखी दादरी। जिले में लंपी वायरस के बाद अफ्रीकन स्वाइन फीवर ने भी दस्तक दे दी है। इसके साथ ही पशुपालन विभाग के साथ पशु पालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हाल ही में विभाग ने 16 सूअरों के सैंपल जांच के लिए भेजे थे और इनमें से चार की रिपोर्ट पॉजिटिव आई हैं। दूसरी ओर लंपी संक्रमित अब तक 347 केस मिल चुके हैं और इनमें से छह गायों की मौत हो चुकी है।
अफ्रीकन स्वाइन फीवर के चार केस मिलते ही पशुपालन विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग ने बाहर से सूअर लाने व ले जाने पर पर रोक लगा दी है। ये केस शहर के रंगीला हनुमान मंदिर के आसपास मिले हैं। चार सूअरों की पॉजिटिव रिपोर्ट मिलते ही विभाग के नोडल अफसर एवं एसडीओ डॉ. तुलसीराम ने टीम के साथ इस क्षेत्र का दौरा किया और इन संक्रमित सूअरों को अलग बाड़े में रुकवा दिया ताकि संक्रमण और न फैलने पाए। इस क्षेत्र में दवा का छिड़काव करवा दिया गया है। जिले में सूअरों की कुल संख्या 1737 है और इनके पालकों को आवश्यक हिदायतें जारी की गई हैं।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉ. तुलसीराम ने बताया कि उपायुक्त प्रीति के निर्देशानुसार जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर पर निगरानी के लिए डॉक्टरों की टीमें गठित कर दी गई हैं। ये टीमें प्रतिदिन शहर का दौरा करेंगी। उन्होंने बताया कि स्वाइन फीवर के सैंपल जांच के लिए लुवास के जरिये भोपाल भेजे गए थे। उन्होंने बताया कि यह बीमारी मनुष्य व दूसरे पशुओं में नहीं फैलती है। बीमारी से बचाव के लिए सूअर पालक अपने पशुओं को शहर में खुला न छोड़ें। बीमार होने पर सूअर को अलग स्थान पर रखें।
विज्ञापन
मौत होने पर जमीन में दबाएं शव
डॉ. तुलसीराम ने कहा कि जो सूअर बीमारी से मर जाते हैं उन्हें जमीन में दबा दिया जाए। उन्होंने कहा भी सूअर पालक अभी कुछ दिन बाहर से सूअर खरीदकर न लाएं। उन्होंने कहा कि नागरिक बीमारी से घबराए नहीं और अपने आस-पास बीमार सूअर दिखने पर इसकी सूचना पशुपालन विभाग को जरूर दें।
स्वाइन फीवर से बचाव की नहीं वैक्सीन
डॉ. तुलसीराम ने कहा कि अभी तक इस बीमारी की कोई दवा या वैक्सीन बाजार में नहीं है, इसलिए बीमारी से बचाव के लिए सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। इस रोग में सूअर को तेज बुखार आता है। शरीर पर नीले रंग के निशान हो जाते हैं। सूअर सुस्त एवं शिथिल हो जाता है। रोग होने पर सूअर की 24 से 48 घंटे में मौत हो सकती है।
विज्ञापन
अफ्रीकन स्वाइन फीवर के चार केस मिलते ही पशुपालन विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग ने बाहर से सूअर लाने व ले जाने पर पर रोक लगा दी है। ये केस शहर के रंगीला हनुमान मंदिर के आसपास मिले हैं। चार सूअरों की पॉजिटिव रिपोर्ट मिलते ही विभाग के नोडल अफसर एवं एसडीओ डॉ. तुलसीराम ने टीम के साथ इस क्षेत्र का दौरा किया और इन संक्रमित सूअरों को अलग बाड़े में रुकवा दिया ताकि संक्रमण और न फैलने पाए। इस क्षेत्र में दवा का छिड़काव करवा दिया गया है। जिले में सूअरों की कुल संख्या 1737 है और इनके पालकों को आवश्यक हिदायतें जारी की गई हैं।
विज्ञापन
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉ. तुलसीराम ने बताया कि उपायुक्त प्रीति के निर्देशानुसार जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर पर निगरानी के लिए डॉक्टरों की टीमें गठित कर दी गई हैं। ये टीमें प्रतिदिन शहर का दौरा करेंगी। उन्होंने बताया कि स्वाइन फीवर के सैंपल जांच के लिए लुवास के जरिये भोपाल भेजे गए थे। उन्होंने बताया कि यह बीमारी मनुष्य व दूसरे पशुओं में नहीं फैलती है। बीमारी से बचाव के लिए सूअर पालक अपने पशुओं को शहर में खुला न छोड़ें। बीमार होने पर सूअर को अलग स्थान पर रखें।
विज्ञापन
मौत होने पर जमीन में दबाएं शव
डॉ. तुलसीराम ने कहा कि जो सूअर बीमारी से मर जाते हैं उन्हें जमीन में दबा दिया जाए। उन्होंने कहा भी सूअर पालक अभी कुछ दिन बाहर से सूअर खरीदकर न लाएं। उन्होंने कहा कि नागरिक बीमारी से घबराए नहीं और अपने आस-पास बीमार सूअर दिखने पर इसकी सूचना पशुपालन विभाग को जरूर दें।
स्वाइन फीवर से बचाव की नहीं वैक्सीन
डॉ. तुलसीराम ने कहा कि अभी तक इस बीमारी की कोई दवा या वैक्सीन बाजार में नहीं है, इसलिए बीमारी से बचाव के लिए सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। इस रोग में सूअर को तेज बुखार आता है। शरीर पर नीले रंग के निशान हो जाते हैं। सूअर सुस्त एवं शिथिल हो जाता है। रोग होने पर सूअर की 24 से 48 घंटे में मौत हो सकती है।