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मानसून की बारिश ने दिया दगा, जिले के किसानों की बढ़ी चिंता
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चरखी दादरी। खरीफ की फसलें पकाव की अवस्था में हैं और मानसून की बारिश दगा दे गई है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों का मानना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो मौजूदा खरीफ की फसल का पकाव भी नहीं हो सकेगा और अगली रबी की फसलों की बिजाई करना भी मुश्किल हो जाएगा। जिला में अब तक 276 एमएम बारिश हुई है जबकि औसत बारिश 500 एमएम से कम नहीं होनी चाहिए। जिला का कृषि योग्य रकबा 1.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है।
मई व जून माह में 129 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। इस बारिश के बाद किसानों ने खरीफ की अगेती फसलों की बिजाई कर दी थी। उसके बाद जुलाई माह में बारिश का आंकड़ा 100 एमएम को भी नहीं छू पाया। अब सात अगस्त के बाद से जिला में बारिश नहीं हुई है।
इस समय बाजरा, कपास, ग्वार व अन्य फसलें पकाव की अवस्था में हैं। ऐसे में बारिश की सख्त जरूरत बनी हुई है। प्रगतिशील किसान रामौतार शर्मा, बल्लूराम, कल्लेराम का कहना है कि अगर आने वाले कुछ दिनो में बारिश नहीं होती है तो खरीफ की फसलों का ठीक से पकाव नहीं हो पाएगा और अगली रबी की सरसों, जौ व गेहूं की बिजाई भी प्रभावित होगी। किसानों को रबी की फसलों की बिजाई सिंचाई करनी पड़ेगी जिससे प्रति एकड़ लागत खर्च बढ़ जाएगा। डीजल की खपत भी बढ़ेगी।
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बारिश की अब तक की स्थिति
तिथि- बारिश हुई
21-23 मई -32 एमएम
18 जून 53 एमएम
22 जून 23 एमएम
30 जून 21 एमएम
09 जुलाई 12 एमएम
10 जुलाई 16 एमएम
15 जुलाई 08 एमएम
16 जुलाई 11 एमएम
20 जुलाई 37 एमएम
29 जुलाई 27 एमएम
07 अगस्त 36 एमएम
ट्यूबवेल से करनी पड़ रही सिंचाई
सात अगस्त के बाद बारिश नहीं हुई है। आने वाले 10 दिनों में अगर बढ़िया बारिश हो जाती है तो मौजूदा फसल का पकाव भी ठीक प्रकार से हो सकेगा और अगली रबी की फसलों की बिजाई से पहले सिंचाई भी नहीं करनी पड़ेगी इससे प्रति एकड़ लागत खर्च की बचत हो जाएगी। जिले में इस समय बाजरे की फसल पकाव की अवस्था में है। कपास में टिंडे आने लगे हैं और मूंग भी पकाव की ओर है। जिले के रेतीला एरिया में तो किसानों को खरीफ की फसलों की सिंचाई करने की नौबत आ गई है। जिले में 45 प्रतिशत रेतीली भूमि है जहां जमीनी वाटर लेवल भी काफी नीचा है। बिजली या सोलर प्लांट के जरिये ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ती है।
इस समय बारिश की सख्त जरूरत है। पकाव के समय सिंचाई होने पर औसत पैदावार बढ़िया मिलती है। आने वाले 10 दिनों में 50 एमएम तक बारिश हो जाती है तो अगली रबी की फसलों की बिजाई करना भी किसानों के लिए आसान हो जाएगा
डॉ. जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी
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मई व जून माह में 129 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। इस बारिश के बाद किसानों ने खरीफ की अगेती फसलों की बिजाई कर दी थी। उसके बाद जुलाई माह में बारिश का आंकड़ा 100 एमएम को भी नहीं छू पाया। अब सात अगस्त के बाद से जिला में बारिश नहीं हुई है।
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इस समय बाजरा, कपास, ग्वार व अन्य फसलें पकाव की अवस्था में हैं। ऐसे में बारिश की सख्त जरूरत बनी हुई है। प्रगतिशील किसान रामौतार शर्मा, बल्लूराम, कल्लेराम का कहना है कि अगर आने वाले कुछ दिनो में बारिश नहीं होती है तो खरीफ की फसलों का ठीक से पकाव नहीं हो पाएगा और अगली रबी की सरसों, जौ व गेहूं की बिजाई भी प्रभावित होगी। किसानों को रबी की फसलों की बिजाई सिंचाई करनी पड़ेगी जिससे प्रति एकड़ लागत खर्च बढ़ जाएगा। डीजल की खपत भी बढ़ेगी।
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बारिश की अब तक की स्थिति
तिथि- बारिश हुई
21-23 मई -32 एमएम
18 जून 53 एमएम
22 जून 23 एमएम
30 जून 21 एमएम
09 जुलाई 12 एमएम
10 जुलाई 16 एमएम
15 जुलाई 08 एमएम
16 जुलाई 11 एमएम
20 जुलाई 37 एमएम
29 जुलाई 27 एमएम
07 अगस्त 36 एमएम
ट्यूबवेल से करनी पड़ रही सिंचाई
सात अगस्त के बाद बारिश नहीं हुई है। आने वाले 10 दिनों में अगर बढ़िया बारिश हो जाती है तो मौजूदा फसल का पकाव भी ठीक प्रकार से हो सकेगा और अगली रबी की फसलों की बिजाई से पहले सिंचाई भी नहीं करनी पड़ेगी इससे प्रति एकड़ लागत खर्च की बचत हो जाएगी। जिले में इस समय बाजरे की फसल पकाव की अवस्था में है। कपास में टिंडे आने लगे हैं और मूंग भी पकाव की ओर है। जिले के रेतीला एरिया में तो किसानों को खरीफ की फसलों की सिंचाई करने की नौबत आ गई है। जिले में 45 प्रतिशत रेतीली भूमि है जहां जमीनी वाटर लेवल भी काफी नीचा है। बिजली या सोलर प्लांट के जरिये ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ती है।
इस समय बारिश की सख्त जरूरत है। पकाव के समय सिंचाई होने पर औसत पैदावार बढ़िया मिलती है। आने वाले 10 दिनों में 50 एमएम तक बारिश हो जाती है तो अगली रबी की फसलों की बिजाई करना भी किसानों के लिए आसान हो जाएगा
डॉ. जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी