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बर्फबारी से नदियां जमने से कम हुआ जलस्तर, नहरों में नहीं पहुंच रहा पानी
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चरखी दादरी। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बर्फबारी की वजह से नदियों में जमाव होने पर पानी का प्रवाह नहीं बन पा रहा है। एक माह बीतने को है जब जिला की नहरों में 22 दिसंबर के बाद से पानी नहीं छोड़ा गया है। विभाग अधिकारियों का तर्क है कि कड़ाके की ठंड में पहाड़ों पर बर्फबारी हो रही है। पहाड़ों से ही पानी पिघलकर नदियों व नहरों में पहुंचता है। नहरों से जलघर भरे जाते हैं। पिछली टर्न में आधी मात्रा में भरे जलघरों में अब पानी खत्म हो गया है। शहर के जलघरों में सीमित मात्रा में ही पानी बचा है जबकि नहरों में पानी छोड़े जाने को लेकर अभी कोई निश्चित तिथि तय नहीं हो सकी है। यही स्थिति गांवों के जलघरों की बनी हुई है। इस समय विभाग ट्यूबवेल का पानी सप्लाई करने को विवश है।
गत छह दिसंबर को जिले की मेन लोहारू कैनाल और बधवाना डिस्टीब्यूटरी में पानी छोड़ा गया था जो 22 दिसंबर को बंद हुआ था। लोहारू कैनाल से नगर के मेन चंपापुरी जलघर में पानी डाला जाता है। बधवाना नहर से रामनगर के जलघर में पानी डाला जाता है। चंपापुरी मेन जलघर में चार वाटर स्टोरेज टैंक बने हैं जबकि दूसरे रामनगर जलघर में दो वाटर टैंक बने हुए हैं। जलघर के वाटर टैंकों में पंप एवं मोटर के जरिये पानी डाला जाता है।
पिछली टर्न में मात्र 500 क्यूसेक पानी मिला था जबकि जरूरत 900 क्यूसेक की थी। इस वजह से जलघरों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं डाला जा सका था। आधी मात्रा में ही जलघर भरे गए थे। पानी काफी कम मात्रा में मिलने की वजह से टेल फीड नहीं हो सकी थी।
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- ट्यूबवेल की आपूर्ति से विभाग चला रहा काम
इस समय शहर के मेन चंपापुरी जलघर के चार वाटर टैंकों में सीमित मात्रा में ही पानी बचा है। अब विभाग ट्यूबवेल का पानी मिलाकर सप्लाई कर रहा है। इसी प्रकार शहर के दूसरे कपूरी जलघर में दो वाटर टैंक हैं। दोनों में मुश्किल से 20 प्रतिशत पानी बचा है, जिससे चार या पांच दिन सप्लाई की जा सकती है।
- हथनीकुंड बैराज बांध और यमुना में पानी की कमी से बनी दिक्कत -
सिंचाई विभाग अधिकारियों का कहना है कि हथनीकुंड बैराज बांध और यमुना मेें ही पानी कम होने पर नहरों में पानी की दिक्कत बन रही है। अधिकारियों का कहना है कि बर्फबारी की वजह से नदियों का जलस्तर कम हो गया है। अब तो आने वाले समय में तापमान बढने पर पहाड़ों पर बर्फ पिघलने पर ही पानी की मात्रा बढ़ सकती है। यमुना में इस समय करीब 2500 क्यूसेक पानी है जबकि आम मौसम में पांच से छह हजार कयूसिक पानी होता है।
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वर्जन::
यमुना व पश्चिमी यमुना में जलस्तर काफी कम बना हुआ है। इस वजह से पानी मिलने में देरी हो रही है। विभाग ने पानी की डिमांड कर रखी है।
कपिल हुड्डा, जनस्वास्थ्य विभाग, जेई।
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गत छह दिसंबर को जिले की मेन लोहारू कैनाल और बधवाना डिस्टीब्यूटरी में पानी छोड़ा गया था जो 22 दिसंबर को बंद हुआ था। लोहारू कैनाल से नगर के मेन चंपापुरी जलघर में पानी डाला जाता है। बधवाना नहर से रामनगर के जलघर में पानी डाला जाता है। चंपापुरी मेन जलघर में चार वाटर स्टोरेज टैंक बने हैं जबकि दूसरे रामनगर जलघर में दो वाटर टैंक बने हुए हैं। जलघर के वाटर टैंकों में पंप एवं मोटर के जरिये पानी डाला जाता है।
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पिछली टर्न में मात्र 500 क्यूसेक पानी मिला था जबकि जरूरत 900 क्यूसेक की थी। इस वजह से जलघरों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं डाला जा सका था। आधी मात्रा में ही जलघर भरे गए थे। पानी काफी कम मात्रा में मिलने की वजह से टेल फीड नहीं हो सकी थी।
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- ट्यूबवेल की आपूर्ति से विभाग चला रहा काम
इस समय शहर के मेन चंपापुरी जलघर के चार वाटर टैंकों में सीमित मात्रा में ही पानी बचा है। अब विभाग ट्यूबवेल का पानी मिलाकर सप्लाई कर रहा है। इसी प्रकार शहर के दूसरे कपूरी जलघर में दो वाटर टैंक हैं। दोनों में मुश्किल से 20 प्रतिशत पानी बचा है, जिससे चार या पांच दिन सप्लाई की जा सकती है।
- हथनीकुंड बैराज बांध और यमुना में पानी की कमी से बनी दिक्कत -
सिंचाई विभाग अधिकारियों का कहना है कि हथनीकुंड बैराज बांध और यमुना मेें ही पानी कम होने पर नहरों में पानी की दिक्कत बन रही है। अधिकारियों का कहना है कि बर्फबारी की वजह से नदियों का जलस्तर कम हो गया है। अब तो आने वाले समय में तापमान बढने पर पहाड़ों पर बर्फ पिघलने पर ही पानी की मात्रा बढ़ सकती है। यमुना में इस समय करीब 2500 क्यूसेक पानी है जबकि आम मौसम में पांच से छह हजार कयूसिक पानी होता है।
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वर्जन::
यमुना व पश्चिमी यमुना में जलस्तर काफी कम बना हुआ है। इस वजह से पानी मिलने में देरी हो रही है। विभाग ने पानी की डिमांड कर रखी है।
कपिल हुड्डा, जनस्वास्थ्य विभाग, जेई।
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