{"_id":"632610c6fd321b1aa05684cb","slug":"waiting-for-budget-for-two-years-for-construction-of-library-building-in-government-schools-charkhidadri-news-hsr6421833148","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजकीय स्कूलों में लाइब्रेरी भवन निर्माण के लिए दो साल से बजट का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजकीय स्कूलों में लाइब्रेरी भवन निर्माण के लिए दो साल से बजट का इंतजार
विज्ञापन
चरखी दादरी। जिले के राजकीय हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में लाइब्रेरी भवन निर्माण के लिए दो साल से बजट का इंतजार है। विभाग की ओर से डिमांड भेजी जा चुकी है जबकि सर्वे का काम भी पूरा हो चुका है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के तहत सभी स्कूलों में लाइब्रेरी खोले जाने का प्रावधान है, लेकिन जिले के राजकीय स्कूलों में इस अधिनियम के तहत करीब 11 हजार विद्यार्थियों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही। जिले में करीब 120 राजकीय हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं।
सरकार की ओर से 2009 में शिक्षा अधिकार अधिनियम बनाया गया था। इसे एक अप्रैल 2010 से लागू किया गया। इस प्रावधान के तहत सभी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार का प्रावधान किया गया है। इसके तहत सभी स्कूलों में 35:1 के अनुपात में शिक्षकों का होना जरूरी है। इसी प्रकार स्कूल में लाइब्रेरी, खेल मैदान, सभी विषयों की लैब व पर्याप्त भवन का होना जरूरी है ताकि बच्चों को शिक्षण करने व शिक्षकों को शिक्षण करवाने में किसी प्रकार की कोई परेशानी न आए।
सरकार वैसे भी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए समय- समय पर नई नीति तैयार कर रही है। नई शिक्षा नीति-2020 तैयार हो चुकी है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप अब नया पाठ्यक्रम तैयार हो रहा है। इसके लिए सुझाव आदि लिए जा चुके हैं। पाठ्यक्रम को व्यावसायिक कौशल की दृष्टि से तैयार किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने छात्रों व शिक्षकों के पूरे डाटा को ऑनलाइन कर रखा है।
विज्ञापन
इस समय स्कूलों में लाइब्रेरी भवन नहीं हैं। हर साल पाठयक्रम की जो पुस्तकें सरकार की ओर से भेजी जाती हैं उनको एक कमरे में रखा जाता है और एक शिक्षक को इनकी संभाल के लिए जिम्मेदारी सौंप दी जाती है लेकिन इन पुस्तकों में संदर्भ पुस्तकें, महापुरुषों की जीवनी, अध्यात्मिक ज्ञान, सामाजिक ज्ञान विकास, मनोविज्ञान व व्यक्तित्व विकास की पुस्तकें नहीं मिलती हैं छात्र केवल स्कूली पाठयक्रम तक ही सीमित रह जाते हैं।
सभी ब्लॉक में 365 राजकीय स्कूल
जिले के तीनों ब्लॉकों में करीब 365 राजकीय स्कूल हैं जिनमें हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या करीब 120 है। फिलहाल स्कूलों में छात्रों व शिक्षकों को लाइब्रेरी की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसके साथ लाइब्रेरियन के पद सृजित करने की भी जरूरत है। पिछले दो साल से भवन निर्माण के लिए बजट नहीं मिल पा रहा है। बजट से ही लाइब्रेरी हॉल का निर्माण संभव है।
जिला मुख्यालय पर भी नहीं बनी डिजिटल लाइब्रेरी
राजकीय स्कूलों के साथ जिला मुख्यालय पर भी लाइब्रेरी की कमी खल रही है। पिछले करीब तीन साल से डिजिटल लाइब्रेरी बनाने की योजना कागजों तक ही सीमित है। इस समय जिला लाइब्रेरी पंचायत विभाग कार्यालय के एक कमरे में चल रही है। यहां सुविधाओं का काफी अभाव है जबकि तकनीकी सुविधा भी नहीं मिल पा रही।
लाइब्रेरी भवन निर्माण के लिए बजट का इंतजार है। इस संबंध में हमने डिमांड भेज रखी है। बजट मिलते ही भवन निर्माण का काम शुरू करवा दिया जाएगा।
जयवीर सिंह, एसडीओ, शिक्षा विभाग तकनीकी शाखा
विज्ञापन
सरकार की ओर से 2009 में शिक्षा अधिकार अधिनियम बनाया गया था। इसे एक अप्रैल 2010 से लागू किया गया। इस प्रावधान के तहत सभी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार का प्रावधान किया गया है। इसके तहत सभी स्कूलों में 35:1 के अनुपात में शिक्षकों का होना जरूरी है। इसी प्रकार स्कूल में लाइब्रेरी, खेल मैदान, सभी विषयों की लैब व पर्याप्त भवन का होना जरूरी है ताकि बच्चों को शिक्षण करने व शिक्षकों को शिक्षण करवाने में किसी प्रकार की कोई परेशानी न आए।
विज्ञापन
सरकार वैसे भी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए समय- समय पर नई नीति तैयार कर रही है। नई शिक्षा नीति-2020 तैयार हो चुकी है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप अब नया पाठ्यक्रम तैयार हो रहा है। इसके लिए सुझाव आदि लिए जा चुके हैं। पाठ्यक्रम को व्यावसायिक कौशल की दृष्टि से तैयार किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने छात्रों व शिक्षकों के पूरे डाटा को ऑनलाइन कर रखा है।
विज्ञापन
इस समय स्कूलों में लाइब्रेरी भवन नहीं हैं। हर साल पाठयक्रम की जो पुस्तकें सरकार की ओर से भेजी जाती हैं उनको एक कमरे में रखा जाता है और एक शिक्षक को इनकी संभाल के लिए जिम्मेदारी सौंप दी जाती है लेकिन इन पुस्तकों में संदर्भ पुस्तकें, महापुरुषों की जीवनी, अध्यात्मिक ज्ञान, सामाजिक ज्ञान विकास, मनोविज्ञान व व्यक्तित्व विकास की पुस्तकें नहीं मिलती हैं छात्र केवल स्कूली पाठयक्रम तक ही सीमित रह जाते हैं।
सभी ब्लॉक में 365 राजकीय स्कूल
जिले के तीनों ब्लॉकों में करीब 365 राजकीय स्कूल हैं जिनमें हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या करीब 120 है। फिलहाल स्कूलों में छात्रों व शिक्षकों को लाइब्रेरी की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसके साथ लाइब्रेरियन के पद सृजित करने की भी जरूरत है। पिछले दो साल से भवन निर्माण के लिए बजट नहीं मिल पा रहा है। बजट से ही लाइब्रेरी हॉल का निर्माण संभव है।
जिला मुख्यालय पर भी नहीं बनी डिजिटल लाइब्रेरी
राजकीय स्कूलों के साथ जिला मुख्यालय पर भी लाइब्रेरी की कमी खल रही है। पिछले करीब तीन साल से डिजिटल लाइब्रेरी बनाने की योजना कागजों तक ही सीमित है। इस समय जिला लाइब्रेरी पंचायत विभाग कार्यालय के एक कमरे में चल रही है। यहां सुविधाओं का काफी अभाव है जबकि तकनीकी सुविधा भी नहीं मिल पा रही।
लाइब्रेरी भवन निर्माण के लिए बजट का इंतजार है। इस संबंध में हमने डिमांड भेज रखी है। बजट मिलते ही भवन निर्माण का काम शुरू करवा दिया जाएगा।
जयवीर सिंह, एसडीओ, शिक्षा विभाग तकनीकी शाखा