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कब्जा कार्रवाई के विरोध में उतरे ग्रामीण, 31 दिन में दूसरी बार खातीवास से बैरंग लौटा प्रशासनिक अमला
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ड्यूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार अजय सैनी सदर एसएचओ और अधिकारियों से बातचीत करते।
- फोटो : CharkhiDadri
नेशनल हाईवे -152 डी के लिए अधिग्रहीत जमीन पर कब्जा लेने गई प्रशासन एवं पुलिस की टीम को किसानों के विरोध के चलते बैरंग लौटना पड़ा। उपायुक्त की मध्यस्थता के बाद भी किसान नहीं माने। जिसके बाद आंदोलनरत किसानों ने अल्टीमेटम दिया कि दो करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजा मिले बगैर जमीन का अधिग्रहण नहीं होने देंगे। यहीं नहीं किसानों ने एनएचएआई ठेकेदार के श्रमिकों व जेसीबी को खेतों से बाहर खदेड़ दिया। इससे पूर्व 17 दिसंबर को भी किसानों के विरोध के चलते प्रशासन की टीम वापस आ गई थी।
उल्लेखनीय है कि प्रस्तावित ग्रीन कॉरिडोर यानी नेशनल हाईवे -152 जिले के 18 गांवों से होकर गुजरना है। इसके लिए खातीवास गांव की करीब 80 एकड़ जमीन अधिग्रहीत होनी है । प्रशासन ने प्रति एकड़ 45 लाख रुपये मुआवजा राशि तय की है जबकि भूमि स्वामी प्रति एकड़ दो करोड़ रुपये कीमत की मांग कर रहे हैं। सोमवार को एक बार फिर खातीवास में कब्जा कार्रवाई के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात तहसीलदार अजय सैनी नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) अधिकारियों के साथ रावलधी-खातीवास रोड पर एकत्र किसानों के पास पहुंचे। यहां किसानों ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने अपनी मांग रखी और दो करोड़ मुआवजा राशि देने के बाद ही जमीन अधिग्रहीत करने की बात कही। ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने मौके से ही डीसी राजेश जोगपाल को फोन पर इसकी जानकारी दी और वापस लौट आए। इस दौरान टीम के साथ भारी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद रहा।
निशानदेही के लिए खेत में घुसे श्रमिकों को खदेड़ा
प्रशासनिक अमले के मौके पर पहुंचते ही एनएचएआई ठेकेदार ने निशानदेही के लिए श्रमिकों को खेतों में भेज दिया। जिससे किसान भड़क उठे और श्रमिकों को खेतों से बाहर आने की चेतावनी दे डाली। ग्रामीणों के रवैये को देखते हुए श्रमिक खेत से बाहर आ गए। वहीं, किसानों ने कब्जा कार्रवाई के लिए पहुंची पांच जेसीबी को भी वापस मुड़वा दिया।
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टकराव टालने के लिए लौटी टीम
कब्जा कार्रवाई के लिए करीब 60 पुलिसकर्मी ही खातीवास गांव पहुंचे। सोमवार को बाढड़ा में हुए ट्रैक्टर मार्च में ड्यूटी लगने के चलते पर्याप्त फोर्स मुहैया नहीं हो पाई। वहीं, दूसरी ओर धरनास्थल पर 200 से अधिक ग्रामीण पहुंच गए। मौके पर फोर्स की कमी और ग्रामीणों की संख्या ज्यादा होने के चलते सदर थाना प्रभारी जगबीर सिंह ने उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया और इसके बाद प्रशासनिक अमला लौट आया।
आधे घंटे की वार्ता में भी नहीं बनी सहमति
मौके पर पहुंचे ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने धरना संयोजक समिति को दोपहर दो बजे डीसी से मिलने का निमंत्रण दिया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल डीसी से मिलने पहुंचा। करीब आधे घंटे तक डीसी के साथ वार्ता हुई लेकिन उसमें भी बात नहीं बन पाई। डीसी ने किसानों को मुआवजा राशि बढ़वाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही जिसके बाद किसान असंतुष्ट होकर लौट आए।
अल्टीमेटम : पूर्व सूचना के बिना न आए अफसर
खातीवास धरना संयोजक समिति प्रधान अनूप खातीवास का कहना है कि प्रशासन की टीम बिना किसी पूर्व नोटिस के ही अचानक कब्जा कार्रवाई के लिए गांव में पहुंच जाता है। इससे हिंसा होने का अंदेशा रहता है। प्रशासन को गांव में आने से करीब एक सप्ताह पहले नोटिस के जरिये सूचना देनी चाहिए। डीसी ने भी मुआवजा राशि बढ़ाने से इंकार कर दिया है और हम अपने हक की लड़ाई जारी रखेंगे।
खातीवास में मुआवजा राशि पहले ही तय की जा चुकी है। धरना संयोजक समिति का प्रतिनिधिमंडल मुझसे मिला था और मैंने उन्हें कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही।
-राजेश जोगपाल, डीसी, चरखी दादरी
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उल्लेखनीय है कि प्रस्तावित ग्रीन कॉरिडोर यानी नेशनल हाईवे -152 जिले के 18 गांवों से होकर गुजरना है। इसके लिए खातीवास गांव की करीब 80 एकड़ जमीन अधिग्रहीत होनी है । प्रशासन ने प्रति एकड़ 45 लाख रुपये मुआवजा राशि तय की है जबकि भूमि स्वामी प्रति एकड़ दो करोड़ रुपये कीमत की मांग कर रहे हैं। सोमवार को एक बार फिर खातीवास में कब्जा कार्रवाई के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात तहसीलदार अजय सैनी नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) अधिकारियों के साथ रावलधी-खातीवास रोड पर एकत्र किसानों के पास पहुंचे। यहां किसानों ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने अपनी मांग रखी और दो करोड़ मुआवजा राशि देने के बाद ही जमीन अधिग्रहीत करने की बात कही। ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने मौके से ही डीसी राजेश जोगपाल को फोन पर इसकी जानकारी दी और वापस लौट आए। इस दौरान टीम के साथ भारी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद रहा।
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निशानदेही के लिए खेत में घुसे श्रमिकों को खदेड़ा
प्रशासनिक अमले के मौके पर पहुंचते ही एनएचएआई ठेकेदार ने निशानदेही के लिए श्रमिकों को खेतों में भेज दिया। जिससे किसान भड़क उठे और श्रमिकों को खेतों से बाहर आने की चेतावनी दे डाली। ग्रामीणों के रवैये को देखते हुए श्रमिक खेत से बाहर आ गए। वहीं, किसानों ने कब्जा कार्रवाई के लिए पहुंची पांच जेसीबी को भी वापस मुड़वा दिया।
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टकराव टालने के लिए लौटी टीम
कब्जा कार्रवाई के लिए करीब 60 पुलिसकर्मी ही खातीवास गांव पहुंचे। सोमवार को बाढड़ा में हुए ट्रैक्टर मार्च में ड्यूटी लगने के चलते पर्याप्त फोर्स मुहैया नहीं हो पाई। वहीं, दूसरी ओर धरनास्थल पर 200 से अधिक ग्रामीण पहुंच गए। मौके पर फोर्स की कमी और ग्रामीणों की संख्या ज्यादा होने के चलते सदर थाना प्रभारी जगबीर सिंह ने उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया और इसके बाद प्रशासनिक अमला लौट आया।
आधे घंटे की वार्ता में भी नहीं बनी सहमति
मौके पर पहुंचे ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने धरना संयोजक समिति को दोपहर दो बजे डीसी से मिलने का निमंत्रण दिया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल डीसी से मिलने पहुंचा। करीब आधे घंटे तक डीसी के साथ वार्ता हुई लेकिन उसमें भी बात नहीं बन पाई। डीसी ने किसानों को मुआवजा राशि बढ़वाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही जिसके बाद किसान असंतुष्ट होकर लौट आए।
अल्टीमेटम : पूर्व सूचना के बिना न आए अफसर
खातीवास धरना संयोजक समिति प्रधान अनूप खातीवास का कहना है कि प्रशासन की टीम बिना किसी पूर्व नोटिस के ही अचानक कब्जा कार्रवाई के लिए गांव में पहुंच जाता है। इससे हिंसा होने का अंदेशा रहता है। प्रशासन को गांव में आने से करीब एक सप्ताह पहले नोटिस के जरिये सूचना देनी चाहिए। डीसी ने भी मुआवजा राशि बढ़ाने से इंकार कर दिया है और हम अपने हक की लड़ाई जारी रखेंगे।
खातीवास में मुआवजा राशि पहले ही तय की जा चुकी है। धरना संयोजक समिति का प्रतिनिधिमंडल मुझसे मिला था और मैंने उन्हें कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही।
-राजेश जोगपाल, डीसी, चरखी दादरी

धरनास्थल पर मौजूद खातीवास के ग्रामीण।- फोटो : CharkhiDadri