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गांव बना मिसाल, कोविड का तोड़ा जाल : घसोला गांव ने दी कोरोना को मात, अब नहीं कोई संक्रमित
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चरखी दादरी।
शहर से तीन किलोमीटर दूर स्थित घसोला गांव ने कोरोना की दूसरी लहर को मात दे दी है। गांव में अब एक भी संक्रमित नहीं है और अब जिला प्रशासन ने यहां मेक्रो कंटेनमेंट जोन वालीं सभी पाबंदियां हटा दी हैं। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने इसका श्रेय ग्रामीणों की समझदारी और ग्राम पंचायत के सहयोग को दिया है। वहीं, डीसी राजेश जोगपाल ने भी ग्रामीणों की सहयोग को काबिले तारीफ बताया है। उनका कहना है कि अन्य गांवों को भी इसी तरह सहयोग करते हुए कोरोना को मात देनी चाहिए।
घसोला की आबादी करीब चार हजार है और गांव में एक हजार घर हैं। करीब डेढ़ माह पहले कोरोना की लहर का प्रकोप गांव में फैलने लगा था। एक के बाद एक कर तीन संक्रमितों की मौत होने से ग्रामीण सकते में आ गए। वहीं, इसके बाद लगातार सामने आए कोरोना पॉजिटिव केस ने ग्रामीणों के साथ जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी बढ़ा दी। एक समय में गांव में 14 सक्रिय केस हो गए और इस पर संज्ञान लेकर डीसी राजेश जोगपाल ने गांव को मेक्रोे कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया।
प्रशासन के इस फैसले में ग्रामीणों ने पूरा सहयोग किया और बेवजह वो घरों से बाहर नहीं निकलें। वहीं, ग्राम पंचायत ने भी ग्रामीणों को जागरूक करते हुए घरों से बाहर न निकलने की अपील की। इस अपील का भी सकारात्मक असर नजर आया और अब गांव में एक भी कोरोना संक्रमित केस नहीं है। सोमवार को ही जिला प्रशासन ने घसोला गांव में लगाई सभी पाबंदियों को हटाया है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने भी घसोला गांव में अब एक भी कोरोना पॉजिटिव केस न होने की पुष्टि भी की है। जिला कोरोना नोडल अधिकारी डॉ. गौरव भारद्वाज ने बताया कि पिछले 14 दिनों से घसोला में एक भी संक्रमित नहीं मिला है। 35 ग्रामीणों ने कोरोना को मात भी दी है।
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- मेल-मिलाप और ताश खेलने छोड़े, काम हुआ तो भी की दूर से बात
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते ग्रामीण खौफजदा थे। माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने के बाद ग्रामीणों ने बेवजह घर से बाहर निकलना बंद कर दिया। परिचितों से न केवल मेल-मिलाप कम किया, बल्कि साथ बैठकर ताश खेलना और हुक्का गुड़गुड़ाना भी छोड़ दिया। ग्रामीणों ने बताया कि अगर पड़ोसी से भी जरूरी काम हुआ तो दूर खड़े होकर बात की। यही कारण रहा की कोरोना की बढ़ रही कोरोना की चेन टूट गई और गांव कोरोना मुक्त हो गया।
ग्रामीण बोले: कोरोना को तो हरा दिया, जांच के लिए गांव में आए स्वास्थ्य विभाग की टीम
- गांव में लगातार कोरोना के केस आने शुरू हुए तो ग्रामीणों में खौफ पैदा हो गया था। प्रशासन ने यहां मेक्रो कंटेनमेंट जोन बना दिया और ग्रामीणरों ने भी बाहर निकलना बंद कर दिया। अब गांव में कोई केस नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को हमारे स्वास्थ्य जांच के लिए टीम भेजनी चाहिए।
गीता देवी
- गांव में कई कोरोना पॉजिटिव केस सामने आ गए थे। लेकिन अब सभी ठीक हो चुके है। ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का पूरा सहयोग किया। हमारी अपील है कि जिला प्रशासन ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच करवाने के लिए टीम अवश्य भेजे, ताकि स्वास्थ्य को लेकर ग्रामीण चिंतित न रहे।
सरबती देवी
- दूसरी लहर में एकाएक कोरोना के केस बढ़ गए थे, लेकिन शुक्र पिछले कई दिनों से गांव में कोई कोरोना पॉजिटिव केस सामने नहीं आया है। ग्रामीणों ने पूरी एहतियात और सजगता बरतकर कोरोना को हराया है। अब तक स्वास्थ्य जांच के लिए टीम गांव में नहीं पहुंची और इसकी कमी ग्रामीणों को बेहद खल रही है।
केला देवी
- गांव में दो-तीन कोरोना संक्रमितों की मौत होने से स्थिति गंभीर बन गई थी। एक बार तो गांव में संक्रमण फैलने का अंदेशा हो गया था, लेकिन ग्रामीणों ने स्थिति भांपते हुए घरों से बाहर निकलना और आपसी मेल-मिलाप छोड़ दिया। यही कारण रहा कि कोरोना संक्रमण की चैन टूट गई और अब सभी पाबंदियां हट गई हैं।
ताराचंद
- कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का असर हमारे गांव में नजर आया। छोटे गांव में कई कोरोना केस सक्रिय होने से स्थिति गंभीर बन गई थी। ग्राम पंचायत और प्रशासनों की अपील पर ग्रामीणों ने अमल करते हुए पूरी सतर्कता बरती। अब हमारा गांव कोरोना मुक्त है और प्रशासन ने पाबंदियां हटा दी हैं।
रामफल
- मेरा मानना है कि ग्रामीणों की सूझबूझ से कोरोना को हराने में गांव कामयाब रहा है। स्वास्थ्य जांच के लिए मेडिकल टीम को हमारे गांव में आना चाहिए, ताकि किसी ग्रामीण को स्वास्थ्य संबंधी कोई तकलीफ है तो वो टीम से परामर्श ले सके और ग्रामीणों को लॉकडाउन में घर से बाहर निकलकर दादरी सिविल अस्पताल न जाना पड़े।
जोगेंद्र
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वर्जन::
ग्रामीणों ने समझदारी दिखाते हुए न केवल कोरोना गाइडलाइन की पालना किया, बल्कि संक्रमितों ने होम आइसोलेशन पीरियड में किसी परिचित से संपर्क नहीं किया। यही कारण रहा कि हमारा गांव कोरोना को मात देने में कामयाब रहा। अब भी हम सजगता बरतना जारी रखेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि स्वास्थ्य जांच के लिए मेडिकल टीम गांव में पहुंचे।
सुरेश कुमार, निवर्तमान सरपंच
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वर्जन::
घसोला गांव में अब एक भी संक्रमित नहीं है और इसलिए हमने माइक्रो कंटेनमेंट जोन की पाबंदियां हटा दी हैं। इसका श्रेय ग्रामीणों के सहयोग और स्वास्थ्य विभाग की मेहनत को जाता है। अन्य गांवों को भी जिला प्रशासन का सहयोग कर कोरोना के खात्मे में सहयोग करना चाहिए।
राजेश जोगपाल, डीसी, चरखी दादरी
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फोटो 01
गीता देवी।
फोटो 02
सरबती देवी।
फोटो 03
केला देवी।
फोटो 04
ताराचंद।
फोटो 05
रामफल।
फोटो 06
जोगेंद्र।
फोटो 07
पटरी पर लौटा जीवन....पाबंदियां हटने के बाद ट्रैक्टर में सवार होकर खेतों की ओर जाते ग्रामीण।
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शहर से तीन किलोमीटर दूर स्थित घसोला गांव ने कोरोना की दूसरी लहर को मात दे दी है। गांव में अब एक भी संक्रमित नहीं है और अब जिला प्रशासन ने यहां मेक्रो कंटेनमेंट जोन वालीं सभी पाबंदियां हटा दी हैं। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने इसका श्रेय ग्रामीणों की समझदारी और ग्राम पंचायत के सहयोग को दिया है। वहीं, डीसी राजेश जोगपाल ने भी ग्रामीणों की सहयोग को काबिले तारीफ बताया है। उनका कहना है कि अन्य गांवों को भी इसी तरह सहयोग करते हुए कोरोना को मात देनी चाहिए।
घसोला की आबादी करीब चार हजार है और गांव में एक हजार घर हैं। करीब डेढ़ माह पहले कोरोना की लहर का प्रकोप गांव में फैलने लगा था। एक के बाद एक कर तीन संक्रमितों की मौत होने से ग्रामीण सकते में आ गए। वहीं, इसके बाद लगातार सामने आए कोरोना पॉजिटिव केस ने ग्रामीणों के साथ जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी बढ़ा दी। एक समय में गांव में 14 सक्रिय केस हो गए और इस पर संज्ञान लेकर डीसी राजेश जोगपाल ने गांव को मेक्रोे कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया।
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प्रशासन के इस फैसले में ग्रामीणों ने पूरा सहयोग किया और बेवजह वो घरों से बाहर नहीं निकलें। वहीं, ग्राम पंचायत ने भी ग्रामीणों को जागरूक करते हुए घरों से बाहर न निकलने की अपील की। इस अपील का भी सकारात्मक असर नजर आया और अब गांव में एक भी कोरोना संक्रमित केस नहीं है। सोमवार को ही जिला प्रशासन ने घसोला गांव में लगाई सभी पाबंदियों को हटाया है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने भी घसोला गांव में अब एक भी कोरोना पॉजिटिव केस न होने की पुष्टि भी की है। जिला कोरोना नोडल अधिकारी डॉ. गौरव भारद्वाज ने बताया कि पिछले 14 दिनों से घसोला में एक भी संक्रमित नहीं मिला है। 35 ग्रामीणों ने कोरोना को मात भी दी है।
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ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते ग्रामीण खौफजदा थे। माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने के बाद ग्रामीणों ने बेवजह घर से बाहर निकलना बंद कर दिया। परिचितों से न केवल मेल-मिलाप कम किया, बल्कि साथ बैठकर ताश खेलना और हुक्का गुड़गुड़ाना भी छोड़ दिया। ग्रामीणों ने बताया कि अगर पड़ोसी से भी जरूरी काम हुआ तो दूर खड़े होकर बात की। यही कारण रहा की कोरोना की बढ़ रही कोरोना की चेन टूट गई और गांव कोरोना मुक्त हो गया।
ग्रामीण बोले: कोरोना को तो हरा दिया, जांच के लिए गांव में आए स्वास्थ्य विभाग की टीम
- गांव में लगातार कोरोना के केस आने शुरू हुए तो ग्रामीणों में खौफ पैदा हो गया था। प्रशासन ने यहां मेक्रो कंटेनमेंट जोन बना दिया और ग्रामीणरों ने भी बाहर निकलना बंद कर दिया। अब गांव में कोई केस नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को हमारे स्वास्थ्य जांच के लिए टीम भेजनी चाहिए।
गीता देवी
- गांव में कई कोरोना पॉजिटिव केस सामने आ गए थे। लेकिन अब सभी ठीक हो चुके है। ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का पूरा सहयोग किया। हमारी अपील है कि जिला प्रशासन ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच करवाने के लिए टीम अवश्य भेजे, ताकि स्वास्थ्य को लेकर ग्रामीण चिंतित न रहे।
सरबती देवी
- दूसरी लहर में एकाएक कोरोना के केस बढ़ गए थे, लेकिन शुक्र पिछले कई दिनों से गांव में कोई कोरोना पॉजिटिव केस सामने नहीं आया है। ग्रामीणों ने पूरी एहतियात और सजगता बरतकर कोरोना को हराया है। अब तक स्वास्थ्य जांच के लिए टीम गांव में नहीं पहुंची और इसकी कमी ग्रामीणों को बेहद खल रही है।
केला देवी
- गांव में दो-तीन कोरोना संक्रमितों की मौत होने से स्थिति गंभीर बन गई थी। एक बार तो गांव में संक्रमण फैलने का अंदेशा हो गया था, लेकिन ग्रामीणों ने स्थिति भांपते हुए घरों से बाहर निकलना और आपसी मेल-मिलाप छोड़ दिया। यही कारण रहा कि कोरोना संक्रमण की चैन टूट गई और अब सभी पाबंदियां हट गई हैं।
ताराचंद
- कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का असर हमारे गांव में नजर आया। छोटे गांव में कई कोरोना केस सक्रिय होने से स्थिति गंभीर बन गई थी। ग्राम पंचायत और प्रशासनों की अपील पर ग्रामीणों ने अमल करते हुए पूरी सतर्कता बरती। अब हमारा गांव कोरोना मुक्त है और प्रशासन ने पाबंदियां हटा दी हैं।
रामफल
- मेरा मानना है कि ग्रामीणों की सूझबूझ से कोरोना को हराने में गांव कामयाब रहा है। स्वास्थ्य जांच के लिए मेडिकल टीम को हमारे गांव में आना चाहिए, ताकि किसी ग्रामीण को स्वास्थ्य संबंधी कोई तकलीफ है तो वो टीम से परामर्श ले सके और ग्रामीणों को लॉकडाउन में घर से बाहर निकलकर दादरी सिविल अस्पताल न जाना पड़े।
जोगेंद्र
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वर्जन::
ग्रामीणों ने समझदारी दिखाते हुए न केवल कोरोना गाइडलाइन की पालना किया, बल्कि संक्रमितों ने होम आइसोलेशन पीरियड में किसी परिचित से संपर्क नहीं किया। यही कारण रहा कि हमारा गांव कोरोना को मात देने में कामयाब रहा। अब भी हम सजगता बरतना जारी रखेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि स्वास्थ्य जांच के लिए मेडिकल टीम गांव में पहुंचे।
सुरेश कुमार, निवर्तमान सरपंच
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वर्जन::
घसोला गांव में अब एक भी संक्रमित नहीं है और इसलिए हमने माइक्रो कंटेनमेंट जोन की पाबंदियां हटा दी हैं। इसका श्रेय ग्रामीणों के सहयोग और स्वास्थ्य विभाग की मेहनत को जाता है। अन्य गांवों को भी जिला प्रशासन का सहयोग कर कोरोना के खात्मे में सहयोग करना चाहिए।
राजेश जोगपाल, डीसी, चरखी दादरी
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गीता देवी।
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सरबती देवी।
फोटो 03
केला देवी।
फोटो 04
ताराचंद।
फोटो 05
रामफल।
फोटो 06
जोगेंद्र।
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पटरी पर लौटा जीवन....पाबंदियां हटने के बाद ट्रैक्टर में सवार होकर खेतों की ओर जाते ग्रामीण।