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जिला अस्पताल में ढाई साल से बंद है अल्ट्रासाउंड सेवा, महिलाओं को भेजा जा रहा निजी केंद्रों पर

Sun, 03 Jan 2021 11:50 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jan 2021 11:50 PM IST
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Ultrasound service in district hospital has been closed for two and a half years, women are being sent to private centers
जिला अस्पताल में पिछले ढाई माह से अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद है। मशीन और विशेषज्ञ की कमी के चलते स्वास्थ्य विभाग केवल गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड की ही व्यवस्था कर पाया है, जबकि पुरुष मरीजों को रोहतक पीजीआई या भिवानी सिविल अस्पताल रेफर किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं के लिए विभाग ने शहर के निजी केंद्रों से समझौता किया हुआ है। निजी केंद्रों पर निशुल्क अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए पहले गर्भवती महिला को जिला अस्पताल से पर्ची बनवाकर लानी पड़ती है और अगले दिन अस्पताल में जाकर रिपोर्ट लेनी पड़ रही है। एक दिन में छह किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करना गर्भवती महिलाओं के लिए आसान नहीं है।
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जिला सिविल अस्पताल पर करीब साढ़े पांच लाख की आबादी निर्भर है। अल्ट्रासाउंड सेवा का प्रावधान पीएचसी और सीएचसी की बजाय केवल सिविल अस्पताल में ही है। पिछले ढाई साल से सिविल अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष को ताला जड़ हुआ है। लंबे समय से जिले में अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट का पद भी खाली है। इस समय अल्ट्रासाउंड मशीन भी खराब है। ऐसे में सिविल अस्पताल में आने वाले सभी मरीज विभाग को रेफर ही करने पड़ रहे हैं। दूसरी ओर अल्ट्रासाउंड सुविधा सिविल अस्पताल में न होने से गर्भवती महिलाओं को भी अस्पताल और निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस संबंध में हेड ऑफिस मांग भेजी जा चुकी है। नई अल्ट्रासाउंड मशीन मिलने और अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट की तैनाती होते ही सिविल अस्पताल में यह सेवा शुरू कर दी जाएगी।
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प्रतिदिन 50 से 60 अल्ट्रासाउंड के आते हैं केस
सिविल अस्पताल में प्रतिदिन 50 से 60 मरीज अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचते हैं। इनमें 80 फीसदी गर्भवती महिलाएं और 10 फीसदी पुरुष मरीज हैं। पुरुष मरीज रोहतक पीजीआई या भिवानी अस्पताल की भागदौड़ करने की बजाय 450 से 500 रुपये देकर निजी केंद्रों पर ही अल्ट्रासाउंड करवा लेते हैं। एक निजी अल्ट्रासाउंड की दैनिक ओपीडी 80 से 100 तक पहुंच जाती है।
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गर्भवती महिलाओं हो रही शारीरिक परेशानी
अगर किसी गर्भवती महिला को निजी केंद्र पर निशुल्क अल्ट्रासाउंड सेवा का लाभ लेना है तो उसे पर्ची बनवाने के लिए पहले सिविल अस्पताल आना पड़ेगा। फिर यहां से तीन किलोमीटर दूर स्थित निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जाना पड़ेगा और अगले दिन रिपोर्ट लेने के लिए फिर से सिविल अस्पताल आना पड़ता है। ऐसे में महिलाओं को एक अल्ट्रासाउंड के लिए दो से तीन चक्कर लगाने पड़ जाते हैं।
चार माह पहले विभाग मशीन को घोषित कर चुका कंडम
करीब चार माह पहले तत्कालीन एसएमओ और अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट अजय शेर की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम ने सिविल अस्पताल में बंद कमरे में रखी अल्ट्रासाउंड मशीन का जायजा लिया था। इस कमेटी ने पुरानी मशीन को कंडम घोषित कर दिया था। जिस कंपनी से मशीन खरीदी गई थी, उसके अधिकारी भी मशीन को ठीक करने के संबंध में कोई सकारात्मक जवाब नहीं दे पाए थे।

गर्भवती महिलाओं के लिए हमने शहर के निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों के साथ टाइअप कर वैकल्पिक व्यवस्था की हुई है, जबकि पुरुष मरीजों को भिवानी जीएच या रोहतक पीजीआई भेज रहे हैं। अल्ट्रासाउंड मशीन और विशेषज्ञ की मांग हेड ऑफिस भेज चुके हैं। जल्द से जल्द सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू करवाने का हमारा प्रयास रहेगा।
डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ
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