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Charkhi Dadri News: नलकूप के पानी का सैंपल फेल, कोहलावास में बंद करवाई आपूर्ति
Wed, 26 Jun 2024 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 26 Jun 2024 12:30 AM IST
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चरखी दादरी में गांव कोहलावास के जलघर में पानी के सैंपल की जांच करती मोबाइल वैन की टीम।
जगदीप सिंह
चरखी दादरी। बौंदकलां खंड के गांव कोहलावास में घरों में आपूर्ति किए जा रहे पानी का सैंपल जांच में फेल मिला। पानी में टीडीएस की मात्रा 2600 पीपीएम मिली तो फ्लोराइड की मात्रा 8.5 एमएम पाई गई। यह पानी स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। इसके चलते मोबाइल वैन जांच टीम ने गांव में नलकूप के पानी की आपूर्ति बंद करवा दी। अब नहरों में पानी पहुंचने के बाद ही इस गांव में पेयजल की आपूर्ति बहाल हो सकेगी। इधर, जलसंकट से परेशान ग्रामीण खरीदकर पानी पीने को मजबूर हैं।
कोहलावास गांव में करीब 500 घर हैं। गांव की आबादी 2,200 है। कांग्रेस सरकार के दौरान गांव में जलघर का निर्माण करवाया गया था। जलघर में एक ही टैंक है और आबादी के लिहाज से भंडारण क्षमता पर्याप्त नहीं है। नहरी टर्म आने से पहले ही जलघर का टैंक खाली हो जाता है। इस समस्या को देखते हुए पिछले योजना में ग्राम पंचायत ने नहर के समीप ट्यूबवेल बोरिंग करवाया था। टैंक खाली होने पर घरों में ट्यूबवेल के पानी की आपूर्ति कर काम चलाया जाता है।
दो दिन पहले ही यहां जनस्वास्थ्य विभाग की मोबाइल वैन पानी की जांच के लिए पहुंची थी। टीम ने जब ट्यूबवेल के पानी का सैंपल लेकर जांच की तो टीडीएस की मात्रा 2,600 पीपीएम व फ्लोराइड की मात्रा 8.5 एमएम पाई गई। इसके चलते टीम ने इस पानी की गांव में आपूर्ति रुकवा दी। टीम ने निर्देश दिए कि नहरों में पानी आने के बाद जलघर के टैंक को भरकर आपूर्ति की जाए।
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पांच रुपये में पानी का एक मटका खरीद रहे ग्रामीण
कोहलावास गांव में पेयजल संकट का आलम ये है कि ग्रामीण 5 रुपये देकर एक पानी का मटका खरीदते हैं। एक घर में दो से तीन मटके पानी की खपत होती है। ग्रामीण पेयजल के लिए पूर्णतया निजी आपूर्ति पर निर्भर हैं। गांव के मौजिज लोगों का कहना है कि गांव में पानी का टैंकर आता है और लोग उसे पांच रुपये देकर प्रति मटका पानी खरीदते हैं। पिछले लंबे समय से ये व्यवस्था बनी हुई है।
टीडीएस की इतनी मात्रा बेहद खतरनाक
जांच रासायनिक वैज्ञानिक विशेषज्ञ डॉ. सुधीर चौधरी ने बताया 2,600 पीपीएम टीडीएस वाले पानी का सेवन शरीर के लिए बेहद खतरनाक है। इससे पेट संबंधी बीमारियों के अलावा दांत, हड्डियों, लीवर व आंत संबंधी बीमारियों के पनपने का खतरा रहता है। दूषित पानी के सेवन से कैंसर भी संभव है।
- टोल फ्री नंबर पर दर्ज करवा सकते हैं शिकायत
जनस्वास्थ्य विभाग ने जिले में सप्लाई हो रहे पानी की जांच करवाने के लिए टोल फ्री नंबर जारी किया है। पेयजल कनेक्शन उपभोक्ता कभी भी टोल फ्री नंबर 1800-180-5678 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
150 से 300 पीपीएम तक चल सकता है टीडीएस
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के जिला सलाहकार राजू भूंभक ने बताया कि पानी में 150 से 300 पीपीएम का टीडीएस स्तर बेहतर माना जाता है, जबकि फ्लोराइड की मात्रा 1.5 होनी चाहिए। जब इससे अधिक मात्रा होती जाती है तो पानी की गुणवत्ता गिरती चली जाती है। पानी का स्वाद कड़वा या खारा होगा। ऐसा पानी पीना बीमारियों को निमंत्रण देने के समान है।
अधिकारी बोले- प्रत्येक गांव तक पानी के टैंकर भेजना संभव नहीं
नहरों में पानी 27 जून तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद दो दिनों तक पानी जलघरों के टैंक में भरा जाएगा तक जाकर आपूर्ति की जा सकती है। इतने समय तक ग्रामीणों को खुद की स्तर पर ही पानी की व्यवस्था करनी होगी। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि प्रत्येक गांवाें में पानी के टैंकर भेजना विभाग के लिए संभव नहीं है। नहरों में पानी आते ही प्राथमिकता के आधार पर जलघर के टैंक भरवाकर आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
गांव कोहलावास में आपूर्ति किए जा रहे ट्यूबवेल के पानी का सैंपल फेल आया है। नहरी पानी आने तक गांव में ट्यूबवेल के पानी की आपूर्ति बंद करवा दी गई है। लोगों को भी ट्यूबवेल का पानी न पीने की सलाह दी गई है। - राजू भूंभक, जिला सलाहकार, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग
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चरखी दादरी। बौंदकलां खंड के गांव कोहलावास में घरों में आपूर्ति किए जा रहे पानी का सैंपल जांच में फेल मिला। पानी में टीडीएस की मात्रा 2600 पीपीएम मिली तो फ्लोराइड की मात्रा 8.5 एमएम पाई गई। यह पानी स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। इसके चलते मोबाइल वैन जांच टीम ने गांव में नलकूप के पानी की आपूर्ति बंद करवा दी। अब नहरों में पानी पहुंचने के बाद ही इस गांव में पेयजल की आपूर्ति बहाल हो सकेगी। इधर, जलसंकट से परेशान ग्रामीण खरीदकर पानी पीने को मजबूर हैं।
कोहलावास गांव में करीब 500 घर हैं। गांव की आबादी 2,200 है। कांग्रेस सरकार के दौरान गांव में जलघर का निर्माण करवाया गया था। जलघर में एक ही टैंक है और आबादी के लिहाज से भंडारण क्षमता पर्याप्त नहीं है। नहरी टर्म आने से पहले ही जलघर का टैंक खाली हो जाता है। इस समस्या को देखते हुए पिछले योजना में ग्राम पंचायत ने नहर के समीप ट्यूबवेल बोरिंग करवाया था। टैंक खाली होने पर घरों में ट्यूबवेल के पानी की आपूर्ति कर काम चलाया जाता है।
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दो दिन पहले ही यहां जनस्वास्थ्य विभाग की मोबाइल वैन पानी की जांच के लिए पहुंची थी। टीम ने जब ट्यूबवेल के पानी का सैंपल लेकर जांच की तो टीडीएस की मात्रा 2,600 पीपीएम व फ्लोराइड की मात्रा 8.5 एमएम पाई गई। इसके चलते टीम ने इस पानी की गांव में आपूर्ति रुकवा दी। टीम ने निर्देश दिए कि नहरों में पानी आने के बाद जलघर के टैंक को भरकर आपूर्ति की जाए।
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पांच रुपये में पानी का एक मटका खरीद रहे ग्रामीण
कोहलावास गांव में पेयजल संकट का आलम ये है कि ग्रामीण 5 रुपये देकर एक पानी का मटका खरीदते हैं। एक घर में दो से तीन मटके पानी की खपत होती है। ग्रामीण पेयजल के लिए पूर्णतया निजी आपूर्ति पर निर्भर हैं। गांव के मौजिज लोगों का कहना है कि गांव में पानी का टैंकर आता है और लोग उसे पांच रुपये देकर प्रति मटका पानी खरीदते हैं। पिछले लंबे समय से ये व्यवस्था बनी हुई है।
टीडीएस की इतनी मात्रा बेहद खतरनाक
जांच रासायनिक वैज्ञानिक विशेषज्ञ डॉ. सुधीर चौधरी ने बताया 2,600 पीपीएम टीडीएस वाले पानी का सेवन शरीर के लिए बेहद खतरनाक है। इससे पेट संबंधी बीमारियों के अलावा दांत, हड्डियों, लीवर व आंत संबंधी बीमारियों के पनपने का खतरा रहता है। दूषित पानी के सेवन से कैंसर भी संभव है।
- टोल फ्री नंबर पर दर्ज करवा सकते हैं शिकायत
जनस्वास्थ्य विभाग ने जिले में सप्लाई हो रहे पानी की जांच करवाने के लिए टोल फ्री नंबर जारी किया है। पेयजल कनेक्शन उपभोक्ता कभी भी टोल फ्री नंबर 1800-180-5678 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
150 से 300 पीपीएम तक चल सकता है टीडीएस
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के जिला सलाहकार राजू भूंभक ने बताया कि पानी में 150 से 300 पीपीएम का टीडीएस स्तर बेहतर माना जाता है, जबकि फ्लोराइड की मात्रा 1.5 होनी चाहिए। जब इससे अधिक मात्रा होती जाती है तो पानी की गुणवत्ता गिरती चली जाती है। पानी का स्वाद कड़वा या खारा होगा। ऐसा पानी पीना बीमारियों को निमंत्रण देने के समान है।
अधिकारी बोले- प्रत्येक गांव तक पानी के टैंकर भेजना संभव नहीं
नहरों में पानी 27 जून तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद दो दिनों तक पानी जलघरों के टैंक में भरा जाएगा तक जाकर आपूर्ति की जा सकती है। इतने समय तक ग्रामीणों को खुद की स्तर पर ही पानी की व्यवस्था करनी होगी। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि प्रत्येक गांवाें में पानी के टैंकर भेजना विभाग के लिए संभव नहीं है। नहरों में पानी आते ही प्राथमिकता के आधार पर जलघर के टैंक भरवाकर आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
गांव कोहलावास में आपूर्ति किए जा रहे ट्यूबवेल के पानी का सैंपल फेल आया है। नहरी पानी आने तक गांव में ट्यूबवेल के पानी की आपूर्ति बंद करवा दी गई है। लोगों को भी ट्यूबवेल का पानी न पीने की सलाह दी गई है। - राजू भूंभक, जिला सलाहकार, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग