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Charkhi Dadri News: तीन दशक पहले उद्योग से देशभर में पहचान, अब औद्योगिक क्षेत्र तक नहीं

Mon, 19 Jan 2026 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Mon, 19 Jan 2026 01:55 AM IST
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Three decades ago, the industry gained recognition across the country, but now it doesn't even extend to the industrial sector.
दादरी में स्थित सीसीआई का सीमेंट कारखाना।
चरखी दादरी। करीब तीन दशक पहले तक सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के बड़े सीमेंट कारखाने के कारण दादरी की पहचान देशभर में थी। परंतु इसे शासन, प्रशासन की अनदेखी कहें या ढिलाई, लेकिन कई वर्षों से दादरी जिला औद्योगिक क्षेत्र तक के लिए तरस रहा है।
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हैरानी की बात तो यह भी है कि जिला बनने के नौ वर्ष बाद भी यहां औद्योगिक क्षेत्र की योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। जब भी औद्योगिक क्षेत्र बनाने की मांग उठती है तो सरकार के वजीर लोगों पर ही पासा फेंकते हुए जमीन उपलब्ध करवाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
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दादरी जिले में औद्योगिक क्षेत्र न होने के कारण सबसे अधिक परेशानी उन उद्यमियों को आ रही हैं जो स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़ते हुए उद्योग स्थापित करना चाहते हैं। औद्योगिक क्षेत्र न होने के कारण उद्योग लगाने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दमकल विभाग जैसे कई विभागों से एनओसी मिलने में परेशानी होती है। बैंक भी उद्योग के लिए ऋण देने से पहले सीएलयू, औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति देखते हैं।
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दादरी में औद्योगिक क्षेत्र न होने के कारण बैंक जोखिम लेने से कतराते हैं, जिससे नए स्टार्टअप और मध्यम उद्योगों को पूंजी की कमी का सामना करना पड़ता है। मौजूदा समय में जिले में जो छोटे-मोटे उद्योग चल रहे हैं, वे बिखरे हुए हैं और उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है।
तीन नेशनल हाईवे और रेल की है बेहतर कनेक्टिविटी
किसी भी क्षेत्र में उद्योगों के लिए सबसे जरूरी सड़क व रेल मार्ग की कनेक्टिविटी होती है। दादरी में यह समस्या भी नहीं हैं क्योंकि वर्तमान में यहां से तीन नेशनल हाईवे गुजरते हैं। जिसमें एनएच 152-डी, एनएच 334-बी व एनएच 148-बी शामिल हैं। ये नेशनल हाईवे दादरी को राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, उत्तर प्रदेश इत्यादि राज्यों से जोड़ते हैं। इसके अलावा यहां से रेल की भी बेहतर कनेक्टिविटी है।



वर्ष 1938 में शुरू हुआ था कारखाना, 1996 में बंद हुआ उत्पादन

वर्ष 1938 में डालमिया परिवार व जींद रियासत के शासक महाराजा रणवीर सिंह के प्रयासों से दादरी में सीमेंट कारखाना स्थापित हुआ था। दादरी में उत्तर भारत का सबसे बड़ा सीमेंट प्लांट था। वर्ष 1958 तक 250 टन सीमेंट का उत्पादन होता था। जो बाद में बढ़कर 750 टन प्रतिदिन हो गया था। वर्ष 1980 में सीमेंट कारखाने पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। मार्च 1980 में फैक्ट्री संस्थापक डालमिया परिवार ने फैक्ट्री की तालाबंदी कर दी। फैक्ट्री की तालाबंदी के बाद श्रमिक संगठन इंटक के तत्कालीन यूनिट प्रधान भीमसैन प्रभाकर के नेतृत्व में आंदोलन चलाया गया। लगातार धरना-प्रदर्शन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने हस्तक्षेप किया तथा केंद्र सरकार ने 23 जून 1981 को अधिसूचना जारी कर इस यूनिट को सीमेंट काॅरपोरेशन आफ इंडिया का उपक्रम बना दिया। लेकिन उसके बाद लगातार हो रहे घाटे के चलते वर्ष 1996 में इस कारखाने में उत्पादन कार्य बंद कर दिया गया था।



किसी भी जिले के आर्थिक विकास के लिए वहां उद्योग होने काफी जरूरी है। इस लिहाज से दादरी में भी औद्योगिक क्षेत्र बनना चाहिए। उद्योग लगने से जहां युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वहीं शहर के बाजारों में भी कारोबार बढ़ेगा। सरकार को जल्द से जल्द दादरी में औद्योगिक क्षेत्र बनाना चाहिए।


-रविंद्र गुप्ता, संरक्षक, नगर व्यापार मंडल।

दादरी को जिला बने हुए नौ वर्ष से अधिक समय हो चुका है लेकिन अभी तक यहां औद्योगिक क्षेत्र नहीं है। औद्योगिक क्षेत्र न होने से उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने में परेशानी होती है। मजबूरन कई उद्यमी दूसरे जिलों में जाकर उद्योग स्थापित कर रहे हैं। सरकार को जल्द यहां औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना करनी चाहिए।

-संदीप फोगाट, उपप्रधान, नगर व्यापार मंडल।
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