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जिनके अंतर का देवता जीत गया उनका जीवन सुखी व संतुष्ट : ज्ञानानंद महाराज
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चरखी दादरी। शहर स्थित कीकरवासनी क्षेत्र में बड़ा हनुमान मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने भगवान के 24 अवतारों की कथा सुनाई। उन्होंने समुद्र मंथन की रोचक एवं सारगर्भित कथा सुनाते हुए कहा कि यह संसार भगवान का एक सुंदर बगीचा है।
उन्होंने कहा कि मानव हृदय ही संसार सागर है। मानव मन में अच्छे व बुरे विचारों का चिंतन- मंथन चलता रहता है। महाराज ने बताया कि जिसके अंदर का दानव जीत गया उसका जीवन दुखी, परेशान और कष्ट कठिनाइयों से भरा होगा और जिसके अंदर के देवता जीत गया उसका जीवन सुखी, संतुष्ट और भगवत प्रेम से भरा हुआ होगा। इसलिए हमेशा अच्छे विचारों के साथ मानव जीवन को सुखमय एवं आनंद मय बनाना चाहिए ।
यहां 84 लाख योनियों के रूप में भिन्न- भिन्न प्रकार के जीव रूपी फूल खिले हुए हैं। जब कोई अपने गलत कर्मों से इस संसार रूपी भगवान के बगीचे को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता है, तब भगवान इस धरा धाम पर अवतार लेकर सज्जनों का उद्धार और दुर्जनों का संहार किया करते हैं। कथा में पुजारी केशव राज पंत ने गणपति आदि देवताओं का पूजन किया। इस अवसर पर मंदिर कार्यकारिणी एवं ट्रस्ट के प्रधान जीतराम गुप्ता, ट्रस्टी सुरेश वशिष्ठ, राकेश अरोड़ा,मनोज जांगिड़, शिवचरण लाला, जयप्रकाश, अजय, प्रहलाद शर्मा, पुजारी केशव पंत, रमेश वशिष्ठ, सुंदरलाल आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि मानव हृदय ही संसार सागर है। मानव मन में अच्छे व बुरे विचारों का चिंतन- मंथन चलता रहता है। महाराज ने बताया कि जिसके अंदर का दानव जीत गया उसका जीवन दुखी, परेशान और कष्ट कठिनाइयों से भरा होगा और जिसके अंदर के देवता जीत गया उसका जीवन सुखी, संतुष्ट और भगवत प्रेम से भरा हुआ होगा। इसलिए हमेशा अच्छे विचारों के साथ मानव जीवन को सुखमय एवं आनंद मय बनाना चाहिए ।
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यहां 84 लाख योनियों के रूप में भिन्न- भिन्न प्रकार के जीव रूपी फूल खिले हुए हैं। जब कोई अपने गलत कर्मों से इस संसार रूपी भगवान के बगीचे को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता है, तब भगवान इस धरा धाम पर अवतार लेकर सज्जनों का उद्धार और दुर्जनों का संहार किया करते हैं। कथा में पुजारी केशव राज पंत ने गणपति आदि देवताओं का पूजन किया। इस अवसर पर मंदिर कार्यकारिणी एवं ट्रस्ट के प्रधान जीतराम गुप्ता, ट्रस्टी सुरेश वशिष्ठ, राकेश अरोड़ा,मनोज जांगिड़, शिवचरण लाला, जयप्रकाश, अजय, प्रहलाद शर्मा, पुजारी केशव पंत, रमेश वशिष्ठ, सुंदरलाल आदि मौजूद रहे।
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