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Charkhi Dadri News: क्रशर जोन को संगठित औद्योगिक क्षेत्र घोषित करने की उठ रही मांग, एनसीआर से भी बाहर हो जिला

Wed, 21 Jan 2026 11:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Wed, 21 Jan 2026 11:08 PM IST
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There is a growing demand to declare the crusher zone as an organized industrial area, and the district should also be outside the NCR
दादरी जिले में स्थित जोन में संचालित क्रशर।
चरखी दादरी। दादरी जिले में स्थित क्रशर जोन को संगठित औद्योगिक क्षेत्र का दर्जा दिए जाने की मांग पिछले काफी समय से उठ रही है लेकिन अभी तक सरकार की ओर से इस तरफ सकारात्मक रुख नहीं अपनाया गया है। संगठित औद्योगिक क्षेत्र का दर्जा न मिलने के कारण क्रशर व माइनिंग जोन में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इसके चलते यहां काम करने वाले लोगों, वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जोन में कच्चे रास्ते, एनसीआर में होने के कारण बार-बार ग्रैप की पाबंदियां लागू होने से यहां कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। स्टोन क्रशर ऑनर वेलफेयर एसोसिएशन की तरफ से कुछ माह पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर इस क्षेत्र को संगठित औद्योगिक क्षेत्र का दर्जा देने की मांग भी की गई थी। क्रशर संचालकों का कहना है कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव और एनसीआर की पाबंदियों के कारण यह उद्योग अब दम तोड़ता नजर आ रहा है।
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जिले में रोजगार का बड़ा साधन है जोन
बता दें कि जिले के गांव खेड़ी बत्तर, कलियाणा, कलाली, असावरी, रामलवास, झोझू, गुड़ाना, पिचौपा, अटेला, बिरही, पांडवान और मानकावास में क्रशर जोन संचालित हैं। जिले में 343 क्रशर के पास एनओसी हैं, लेकिन मौजूदा समय में करीब 273 क्रशर संचालित हैं। इन क्रशरों व माइनिंग जोन से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर करीब 25 हजार लोगों का कारोबार व रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। क्रशर व माइनिंग जोन, जिले में रोजगार के बड़े साधन हैं।
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सड़कें कच्ची होने से बढ़ रही परेशानियां
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि जोन के अंदर की सड़कें पक्की हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व लोक निर्माण विभाग एक-दूसरे का नाम लेकर पल्ला झाड़ लेते हैं। सड़कें कच्ची से कारण भारी वाहनों के आवागमन से दिनभर धूल उड़ती रहती है, जिससे यहां काम करने वाले श्रमिकों के अलावा अन्य लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि संगठित औद्योगिक क्षेत्र का दर्जा न मिलने के कारण यहां सीवरेज सिस्टम, पक्की सड़कें जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। हर वर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व देने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।
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एनसीआर से बाहर होना चाहिए दादरी जिला
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि दादरी जिला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के दायरे में आता है। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू होने वाले ग्रैप की पाबंदियों के कारण वर्ष में कई दिनों तक क्रशर यूनिट्स को बंद रखना पड़ता है। पदाधिकारियों का कहना है कि जब भी दिल्ली में प्रदूषण बढ़ता है तो यहां क्रशर व माइनिंग यूनिट्स को बंद करवा दिया जाता है। काम बंद होने के कारण बैंक की किस्तें चुकाने तथा श्रमिकों को रोजी-रोटी के लिए मुश्किल हो जाती है। क्रशर संचालकों की मांग है कि दादरी जिले को एनसीआर के दायरे से बाहर किया जाए।
क्या कहते हैं एसोसिएशन प्रधान व क्रशर संचालक
पिछले काफी समय से क्रशर जोन को संगठित औद्योगिक क्षेत्र का दर्जा देने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही कच्ची सड़कों को पक्का करने की मांग भी लगातार उठाई जा रही है। कच्ची सड़कों के कारण धूल उड़ती रहती है और खामियाजा क्रशर संचालकों को भुगतना पड़ता है। सरकार को जल्द से जल्द जोन को औद्योगिक क्षेत्र का दर्जा देते हुए यहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवानी चाहिए। - अधिवक्ता नवीन सांगवान, प्रधान, स्टोन क्रशर ऑनर वेलफेयर एसोसिएशन।


एनसीआर में होने से जिले स्थित क्रशरों पर बार-बार पाबंदियां लगा दी जाती हैं। ग्रैप की पाबंदियां लागू होने के दौरान क्रशर व माइनिंग बंद होने से हजारों श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी के लाले पड़ जाते हैं। वहीं क्रशर संचालकों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकार से मांग है कि दादरी को एनसीआर से बाहर किया जाए और क्रशर जोन को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए।- दिनेश, क्रशर संचालक।
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