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जरूरतमंदों के जीवन में खुशियों का रंग भर रही ‘खुशियों की दीवार’
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खुशियों की दीवार मुहिम के तहतम जरूरतमंद लोगों को सामान वितरित करते ।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। जरूरतमंद लोगों के जीवन में खुशियों की दीवार पिछले छह सालों से खुशियों के रंग भर रही है। यहां से कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति किसी भी समय कोई भी सामान प्राप्त कर सकता है। रंगकर्मी संजय रामफल और उनकी टीम ज्यादा है तो रख जाओ, जरूरत है तो ले जाओ की थीम पर यह कार्य कर रही है। जनसरोकार से जुड़ी उनकी इस मुहिम के आज हर घर में चर्चे है। पिछले छह सालों में यहां से डेढ़ लाख से अधिक लोग मदद प्राप्त कर चुके हैं । इस नेक कार्य में जिला प्रशासन के अलावा शहर की विभिन्न संस्थाएं और लोग भी इन समाजसेवियों की मदद कर रहे हैं।
रंगकर्मी संजय रामफल का कहना है कि सितंबर 2015 में उन्होंने खुशियों की दीवार की शुरुआत की गई थी। शुरुआत में उन्होंने अकेले ही यह सेवा शुरू की, लेकिन इसके बाद कारवां बढ़ता चला गया। उन्होंने बताया कि जरूरत है तो ले जाओ और ज्यादा है तो ले जाओ की थीम पर उनका संगठन काम कर रहा है। लघु सचिवालय के मेन गेट के समीप ही खुशियों की दीवार मुहिम चलाई जा रही है और यहां प्रशासन ने इस कार्य के लिए जगह मुहैया करवाई हुई है। इस जगह पर कोई भी व्यक्ति आकर ऐसा सामान दान दे सकता है जो घर में अतिरिक्त है। इस सामान को यहां से जरूरतमंद लोग निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं।
संजय रामफल ने बताया कि कपड़े, जूते-चप्पल, किताबें, खिलौने, कंबल, चद्दर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, पुस्तकें, किताबें आदि सामान लोग अब स्वेच्छा से यहां पहुंचकर दान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि खुशियों की दीवार पर प्रतिदिन 30 से अधिक लोग दान देने पहुंचते हैं। सर्दियों के समय यहां से प्रतिदिन करीब 150 जरूरतमंद लोग साधन संपन्न लोगों द्वारा दान किया गया सामान लेते हैं जबकि गर्मियों में संख्या 60 से 70 तक रहती है।
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संगठन सदस्य बोले : संस्थाओं और लोगों का मिलते रहे सहयोग, जारी रखेंगे मुहिम
जरूरतमंदों की मदद के लिए 2015 में यह मुहिम शुरू की थी। प्रशासन के साथ लोगों का पूरा सहयोग मिला और खुशियों की दीवार पर अब तक कभी सामान की कमी नहीं पड़ी है। यहां से कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति सामान ले सकता है जबकि अतिरिक्त सामान यहां दान भी दे सकते हैं। अब तक डेढ़ लाख से अधिक लोग यहां से सामान प्राप्त कर चुके हैं। - संजय रामफल, रंगकर्मी एवं समाजसेवी
खुशियों की दीवार मुहिम शुरू होने के कुछ समय बाद ही मैं इससे जुड़ गया था। यह बहुत नेक कार्य है। जरूरतमंदों की मदद कर मन को बेहद अच्छा लगता है। इस काम में लोग, समाजसेवी संस्थाएं और प्रशासन पूरा सहयोग कर रहा है। - पुनीत मित्तल, समाजसेवी
खुशियों की दीवार मुहिम से मैं काफी समय से जुड़ा हुआ हूं। हम समय-समय पर स्लम बस्तियों में जाकर गरीब तबके के लोगों के बीच जरूरत के सामान का नियमित वितरण करते हैं। लोगों के सहयोग से यह कार्य लगातार जारी है। प्रतिदिन जितने लोग यहां से सामान ले जाते हैं, उतना ही साधन संपन्न लोग दान भी कर जाते हैं। -अमित गुप्ता, समाजसेवी
खुशियों की दीवार गरीब तबके के लोगों को राहत देने का काम कर रही है। कड़कड़ाती ठंड में प्रतिदिन सौ से अधिक लोग यहां आकर गर्म वस्त्र प्राप्त करते हैं। अब तक एक लाख से अधिक किताबें यहां लोग यहां दान कर चुके हैं जिन्हें जरूरतमंदों युवाओं तक पहुंचाया जा चुका है। घरेलू सामान तक लोग यहां से प्राप्त कर रहे हैं। - अभिषेक जैन, शिक्षक एवं समाजसेवी
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रंगकर्मी संजय रामफल का कहना है कि सितंबर 2015 में उन्होंने खुशियों की दीवार की शुरुआत की गई थी। शुरुआत में उन्होंने अकेले ही यह सेवा शुरू की, लेकिन इसके बाद कारवां बढ़ता चला गया। उन्होंने बताया कि जरूरत है तो ले जाओ और ज्यादा है तो ले जाओ की थीम पर उनका संगठन काम कर रहा है। लघु सचिवालय के मेन गेट के समीप ही खुशियों की दीवार मुहिम चलाई जा रही है और यहां प्रशासन ने इस कार्य के लिए जगह मुहैया करवाई हुई है। इस जगह पर कोई भी व्यक्ति आकर ऐसा सामान दान दे सकता है जो घर में अतिरिक्त है। इस सामान को यहां से जरूरतमंद लोग निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं।
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संजय रामफल ने बताया कि कपड़े, जूते-चप्पल, किताबें, खिलौने, कंबल, चद्दर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, पुस्तकें, किताबें आदि सामान लोग अब स्वेच्छा से यहां पहुंचकर दान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि खुशियों की दीवार पर प्रतिदिन 30 से अधिक लोग दान देने पहुंचते हैं। सर्दियों के समय यहां से प्रतिदिन करीब 150 जरूरतमंद लोग साधन संपन्न लोगों द्वारा दान किया गया सामान लेते हैं जबकि गर्मियों में संख्या 60 से 70 तक रहती है।
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संगठन सदस्य बोले : संस्थाओं और लोगों का मिलते रहे सहयोग, जारी रखेंगे मुहिम
जरूरतमंदों की मदद के लिए 2015 में यह मुहिम शुरू की थी। प्रशासन के साथ लोगों का पूरा सहयोग मिला और खुशियों की दीवार पर अब तक कभी सामान की कमी नहीं पड़ी है। यहां से कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति सामान ले सकता है जबकि अतिरिक्त सामान यहां दान भी दे सकते हैं। अब तक डेढ़ लाख से अधिक लोग यहां से सामान प्राप्त कर चुके हैं। - संजय रामफल, रंगकर्मी एवं समाजसेवी
खुशियों की दीवार मुहिम शुरू होने के कुछ समय बाद ही मैं इससे जुड़ गया था। यह बहुत नेक कार्य है। जरूरतमंदों की मदद कर मन को बेहद अच्छा लगता है। इस काम में लोग, समाजसेवी संस्थाएं और प्रशासन पूरा सहयोग कर रहा है। - पुनीत मित्तल, समाजसेवी
खुशियों की दीवार मुहिम से मैं काफी समय से जुड़ा हुआ हूं। हम समय-समय पर स्लम बस्तियों में जाकर गरीब तबके के लोगों के बीच जरूरत के सामान का नियमित वितरण करते हैं। लोगों के सहयोग से यह कार्य लगातार जारी है। प्रतिदिन जितने लोग यहां से सामान ले जाते हैं, उतना ही साधन संपन्न लोग दान भी कर जाते हैं। -अमित गुप्ता, समाजसेवी
खुशियों की दीवार गरीब तबके के लोगों को राहत देने का काम कर रही है। कड़कड़ाती ठंड में प्रतिदिन सौ से अधिक लोग यहां आकर गर्म वस्त्र प्राप्त करते हैं। अब तक एक लाख से अधिक किताबें यहां लोग यहां दान कर चुके हैं जिन्हें जरूरतमंदों युवाओं तक पहुंचाया जा चुका है। घरेलू सामान तक लोग यहां से प्राप्त कर रहे हैं। - अभिषेक जैन, शिक्षक एवं समाजसेवी