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Charkhi Dadri News: दोस्तों के कटाक्ष ने बना दिया सुनील फौगाट को आईएएस
Tue, 23 May 2023 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 23 May 2023 10:54 PM IST
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चरखी दादरी। गांव झींझर निवासी सुनील फौगाट को संघ लोक सेवा आयोग की ओर से घोषित परिणाम में 77वीं रैंक हासिल की है। सुनील फौगाट ने अपनी तीसरे प्रयास में यह परीक्षा अच्छे रैंक से पास की है। सुनील पिछली बार साक्षात्कार में असफल हो गया था। सुनील ने यह मुकाम आठ से दस घंटे की पढ़ाई कर हासिल किया है। सुनील ने बताया कि आत्म विश्वास, दृढ़ संकल्प, नियमित पढ़ाई करने से बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
60 लाख रुपये का पैकेज ठुकराया
सेना से रिटायर्ड सूबेदार रणबीर फौगाट ने बताया कि बेटे सुनील ने गांव अचीना स्थित डायमंड वेली स्कूल से दसवीं कक्षा पास की थी। इसके बाद उसने आरईडी स्कूल छुछकवास से बारहवीं कक्षा पास की। सुनील ने एनडीए परीक्षा भी पास की है, लेकिन उसने ज्वाइन नहीं किया। इसी दौरान उसका बीएसएफ में असिस्टेंट कमांंडेंट के पद पर भी चयन हुआ लेकिन यह नौकरी भी उसने ज्वाइन नहीं की। इसके बाद उसने भोपाल से बीटेक की। बीटेक के बाद सुनील को कंपनी की ओर से 60 लाख रुपये सालाना पैकेज का ऑफर मिला लेकिन उसने यह भी स्वीकार नहीं किया।
दोस्तों के कटाक्ष से मिली प्रेरणा
पिता रणबीर सिंह ने बताया कि सुनील कुमार को उसके कुछ दोस्तों के कटाक्ष से आईएएस बनने की प्रेरणा मिली। दोस्तों ने एक दिन सुनील को यह कह दिया कि पढ़ाई में इतना होशियार है तो आईएएस बनकर दिखा दे। उस दिन के बाद ही सुनील ने दृढ़ निश्चय कर लिया था कि सिविल सेवा परीक्षा पास करनी है। उसने तीसरे प्रयास में 77वीं रैंक प्राप्त कर यह परीक्षा पास कर डाली। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए उसने करीब एक साल तक दिल्ली में कोचिंग भी ली। उसके बाद दो साल तक खुद तैयारी की। सुनील के पिता रणबीर ने करीब 28 साल सेना में रहते हुए देशसेवा की। सुनील की माता अनिता गृहिणी है।
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60 लाख रुपये का पैकेज ठुकराया
सेना से रिटायर्ड सूबेदार रणबीर फौगाट ने बताया कि बेटे सुनील ने गांव अचीना स्थित डायमंड वेली स्कूल से दसवीं कक्षा पास की थी। इसके बाद उसने आरईडी स्कूल छुछकवास से बारहवीं कक्षा पास की। सुनील ने एनडीए परीक्षा भी पास की है, लेकिन उसने ज्वाइन नहीं किया। इसी दौरान उसका बीएसएफ में असिस्टेंट कमांंडेंट के पद पर भी चयन हुआ लेकिन यह नौकरी भी उसने ज्वाइन नहीं की। इसके बाद उसने भोपाल से बीटेक की। बीटेक के बाद सुनील को कंपनी की ओर से 60 लाख रुपये सालाना पैकेज का ऑफर मिला लेकिन उसने यह भी स्वीकार नहीं किया।
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दोस्तों के कटाक्ष से मिली प्रेरणा
पिता रणबीर सिंह ने बताया कि सुनील कुमार को उसके कुछ दोस्तों के कटाक्ष से आईएएस बनने की प्रेरणा मिली। दोस्तों ने एक दिन सुनील को यह कह दिया कि पढ़ाई में इतना होशियार है तो आईएएस बनकर दिखा दे। उस दिन के बाद ही सुनील ने दृढ़ निश्चय कर लिया था कि सिविल सेवा परीक्षा पास करनी है। उसने तीसरे प्रयास में 77वीं रैंक प्राप्त कर यह परीक्षा पास कर डाली। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए उसने करीब एक साल तक दिल्ली में कोचिंग भी ली। उसके बाद दो साल तक खुद तैयारी की। सुनील के पिता रणबीर ने करीब 28 साल सेना में रहते हुए देशसेवा की। सुनील की माता अनिता गृहिणी है।
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