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बर्तनों के बचे बजट से होगा दूध पाउडर की बकाया राशि का भुगतान
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राजकीय स्कूलों में मिड-डे-मील में मिलने वाले दूध के बकाया का भुगतान नहीं होने पर इसका असर आपूर्ति पर पड़ रहा है। दादरी के अलावा बाढड़ा और बौंदकलां के कई स्कूलों में दिसंबर और जनवरी के वितरण के लिए दूध पाउडर नहीं पहुंचा है। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों में दूध पाउडर की आपूर्ति को सुचारु करने के लिए अब बर्तनों की बची हुई राशि से बकाया भुगतान करने की योजना तैयार की है। इसके लिए विभाग ने सभी स्कूलों से विवरण मांगा है। नवंबर के दूध के करीब चार लाख रुपये बकाया पड़े हैं।
पहली से आठवीं कक्षा तक प्रत्येक बच्चे को 200 ग्राम दूध पाउडर देने का प्रावधान है। जिले में 20 हजार बच्चों को पांच फ्लेवर का दूध पिलाया जाता है। जिले में 120 प्राइमरी और 48 अपर प्राइमरी स्कूल हैं। सरकार की ओर से राजकीय स्कूलों मेें दोपहर के भोजन में सप्ताह में तीन दिन दूध दिया जाता है। प्रति विद्यार्थी को 200 ग्राम दूध का पाउडर दिया जाता है, ताकि बच्चों का स्वास्थ्य बना रहे। वैसे तो दोपहर के भोजन में 16 प्रकार के व्यंजन शामिल हैं, लेकिन बच्चों को सीमित व्यंजन ही परोसे जा रहे हैं। इनमें ज्यादातार गेहूं व चावल से बने उत्पाद शामिल हैं। मूंग-चावल की खिचड़ी, गेहूं का दलिया, सब्जी रोटी, भरवा पराठा, दाल-रोटी, नमकीन चावल आदि दोपहर के भोजन में खिलाए जाते हैं। बाढड़ा खंड शिक्षा अधिकार जलधीर कलकल ने बताया कि नंबवर के दूध का भुगतान नहीं होने पर कंपनी ने दिसंबर के दूध पाउडर की सप्लाई बंद कर दी है। इसकी सूचना शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को दी गई, तो भुगतान को लेकर मंथन शुरू हुआ। अब सरकार ने निर्देश दिए है कि दूध की पेमेंट का भुगतान बर्तनों की बची हुई राशि से कर दी जाए।
पिछले साल बर्तनों की खरीद के लिए मिला था बजट
पिछले साल सभी स्कूलों में मिड-डे-मील के लिए बर्तन खरीदे गए थे। इसके लिए सरकार ने बच्चों की संख्या के आधार पर स्कूलों को बजट जारी किया था। बर्तन खरीदने के बाद बजट की कुछ राशि स्कूलों के पास बची हुई है। अब शिक्षा विभाग अधिकारियों ने इस बजट का डाटा जुटाना शुरू कर दिया है, ताकि कुल बची राशि का आंकलन हो सके।
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जल्दी ही दूध की पेमेंट कर दी जाएगी। बर्तनों की बचे हुए बजट से इसका भुगतान किया जाना है। इसके लिए पूरा विवरण मांगा जा रहा है। जिला में करीब 20 हजार बच्चे इस योजना से जुड़े हैं। दूध की आपूर्ति कंपनी से होती है।
वीरेंद्र मलिक, डीईईओ, शिक्षा विभाग
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पहली से आठवीं कक्षा तक प्रत्येक बच्चे को 200 ग्राम दूध पाउडर देने का प्रावधान है। जिले में 20 हजार बच्चों को पांच फ्लेवर का दूध पिलाया जाता है। जिले में 120 प्राइमरी और 48 अपर प्राइमरी स्कूल हैं। सरकार की ओर से राजकीय स्कूलों मेें दोपहर के भोजन में सप्ताह में तीन दिन दूध दिया जाता है। प्रति विद्यार्थी को 200 ग्राम दूध का पाउडर दिया जाता है, ताकि बच्चों का स्वास्थ्य बना रहे। वैसे तो दोपहर के भोजन में 16 प्रकार के व्यंजन शामिल हैं, लेकिन बच्चों को सीमित व्यंजन ही परोसे जा रहे हैं। इनमें ज्यादातार गेहूं व चावल से बने उत्पाद शामिल हैं। मूंग-चावल की खिचड़ी, गेहूं का दलिया, सब्जी रोटी, भरवा पराठा, दाल-रोटी, नमकीन चावल आदि दोपहर के भोजन में खिलाए जाते हैं। बाढड़ा खंड शिक्षा अधिकार जलधीर कलकल ने बताया कि नंबवर के दूध का भुगतान नहीं होने पर कंपनी ने दिसंबर के दूध पाउडर की सप्लाई बंद कर दी है। इसकी सूचना शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को दी गई, तो भुगतान को लेकर मंथन शुरू हुआ। अब सरकार ने निर्देश दिए है कि दूध की पेमेंट का भुगतान बर्तनों की बची हुई राशि से कर दी जाए।
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पिछले साल बर्तनों की खरीद के लिए मिला था बजट
पिछले साल सभी स्कूलों में मिड-डे-मील के लिए बर्तन खरीदे गए थे। इसके लिए सरकार ने बच्चों की संख्या के आधार पर स्कूलों को बजट जारी किया था। बर्तन खरीदने के बाद बजट की कुछ राशि स्कूलों के पास बची हुई है। अब शिक्षा विभाग अधिकारियों ने इस बजट का डाटा जुटाना शुरू कर दिया है, ताकि कुल बची राशि का आंकलन हो सके।
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जल्दी ही दूध की पेमेंट कर दी जाएगी। बर्तनों की बचे हुए बजट से इसका भुगतान किया जाना है। इसके लिए पूरा विवरण मांगा जा रहा है। जिला में करीब 20 हजार बच्चे इस योजना से जुड़े हैं। दूध की आपूर्ति कंपनी से होती है।
वीरेंद्र मलिक, डीईईओ, शिक्षा विभाग