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दादरी दे लोकां ने दिल जित लेया साडा...
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The people of Dadri won our hearts
- फोटो : CharkhiDadri
दादरी दे लोकां ने साडा दिल जित लेया। चंद घंटेयां चे इथे जेड़ा मान ते स्पोर्ट मिल्या ओ सारी जिदंगी याद रहूगा। यह बात रात साढ़े नौ बजे राजस्थान कूच करने से पहले विदाई लेते हुए काफिले की अगुवाई कर रहे सरदार पृथ्वी सिंह ने जिले के सामाजिक संगठनों के सदस्यों का आभार जताते कही। दोनों तरफ से एक-दूसरे को उज्ज्वल भविष्य की बधाई दी और इसके बाद राजस्थान के किसान अपने ट्रैक्टरों और गाड़ियों में शाहजहांपुर बॉर्डर के लिए रवाना हुए।
हुआ यूं कि राजस्थान के गंगानगर और हनुमानगढ़ जिले के करीब 200 किसान 16 ट्रैक्टरों और चार गाड़ियों में शाहजहांपुर बॉर्डर जाने के लिए टीकरी बॉर्डर से रवाना हुए थे। शाम छह बजे दादरी पुलिस प्रशासन ने महेंद्रगढ़ चौक पर उन्हें रोक लिया। पुलिस के रास्ता रोकने के बाद किसान वहीं रुक गए और करीब सवा घंटे बाद एनएच-334 बी पर महेंद्रगढ़ चौक पर जाम लगा दिया। इधर, प्रशासन द्वारा किसानों का रास्ता रोकने पर जिले के किसान संगठनों के पदाधिकारी, बार एसोसिएशन प्रधान समेत फौगाट और सांगवान खाप के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए।
बार एसोसिएशन प्रधान सुरेंद्र मैहड़ा ने कहा कि सड़कें उखाड़ना, शांतिपूर्वक ढंग से जा रहे किसानों का रास्ता रोकना, जबरन कानून थोपना ये कुशल प्रशासक का काम नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। वहीं, किसानों के समर्थन में उतरे सब्जी मंडी प्रधान नितिन जांघू ने कहा कि जिले का प्रत्येक वर्ग राजस्थान के किसानों के साथ है। प्रशासन का रास्ता रोकना और सशर्त जिले की सीमा से निकलने की अनुमति देना गलत है। उन्होंने कहा कि जिले के व्यापारी किसानों के साथ हैं।
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रात्रि भोजन पर चली दिल्ली में चल रहे आंदोलन पर चर्चा
जाम खोलने के बाद जिले के संगठनों के पदाधिकारियों और राजस्थान के किसानों ने एक होटल में साथ बैठकर रात्रि भोजन किया। करीब एक घंटे बाद होटल से बाहर निकले। इससे पहले रात्रि भोजन करते समय भी जिले के लोगों और राजस्थान के किसानों के बीच दिल्ली आंदोलन को लेेकर ही चर्चा चली।
स्थानीय संगठन आए समर्थन में तो प्रशासन ने हटाई शर्त
शांतिपूर्वक ढंग से राजस्थान कूच कर रहे किसान पुलिस प्रशासन के रूट डायवर्ट करने की शर्त पर भड़क गए और वो प्रशासन पर जबरन रास्ता रोकने का आरोप लगाने लगे। यह बात जिले के किसान समेत सामाजिक और अन्य संगठनों के पदाधिकारियों को पता चली तो वे तुरंत मौके पर पहुंच गए। किसानों ने भीड़ बढ़ने पर रोड जाम कर दी। प्रशासन के रोकने के करीब सवा घंटे बाद किसानों ने रोड जाम की। वहीं, स्थानीय संगठनों के किसानों की मदद में आने पर प्रशासन ने जिले की सीमा से सशर्त निकलने की शर्त हटाई।
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हुआ यूं कि राजस्थान के गंगानगर और हनुमानगढ़ जिले के करीब 200 किसान 16 ट्रैक्टरों और चार गाड़ियों में शाहजहांपुर बॉर्डर जाने के लिए टीकरी बॉर्डर से रवाना हुए थे। शाम छह बजे दादरी पुलिस प्रशासन ने महेंद्रगढ़ चौक पर उन्हें रोक लिया। पुलिस के रास्ता रोकने के बाद किसान वहीं रुक गए और करीब सवा घंटे बाद एनएच-334 बी पर महेंद्रगढ़ चौक पर जाम लगा दिया। इधर, प्रशासन द्वारा किसानों का रास्ता रोकने पर जिले के किसान संगठनों के पदाधिकारी, बार एसोसिएशन प्रधान समेत फौगाट और सांगवान खाप के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए।
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बार एसोसिएशन प्रधान सुरेंद्र मैहड़ा ने कहा कि सड़कें उखाड़ना, शांतिपूर्वक ढंग से जा रहे किसानों का रास्ता रोकना, जबरन कानून थोपना ये कुशल प्रशासक का काम नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। वहीं, किसानों के समर्थन में उतरे सब्जी मंडी प्रधान नितिन जांघू ने कहा कि जिले का प्रत्येक वर्ग राजस्थान के किसानों के साथ है। प्रशासन का रास्ता रोकना और सशर्त जिले की सीमा से निकलने की अनुमति देना गलत है। उन्होंने कहा कि जिले के व्यापारी किसानों के साथ हैं।
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रात्रि भोजन पर चली दिल्ली में चल रहे आंदोलन पर चर्चा
जाम खोलने के बाद जिले के संगठनों के पदाधिकारियों और राजस्थान के किसानों ने एक होटल में साथ बैठकर रात्रि भोजन किया। करीब एक घंटे बाद होटल से बाहर निकले। इससे पहले रात्रि भोजन करते समय भी जिले के लोगों और राजस्थान के किसानों के बीच दिल्ली आंदोलन को लेेकर ही चर्चा चली।
स्थानीय संगठन आए समर्थन में तो प्रशासन ने हटाई शर्त
शांतिपूर्वक ढंग से राजस्थान कूच कर रहे किसान पुलिस प्रशासन के रूट डायवर्ट करने की शर्त पर भड़क गए और वो प्रशासन पर जबरन रास्ता रोकने का आरोप लगाने लगे। यह बात जिले के किसान समेत सामाजिक और अन्य संगठनों के पदाधिकारियों को पता चली तो वे तुरंत मौके पर पहुंच गए। किसानों ने भीड़ बढ़ने पर रोड जाम कर दी। प्रशासन के रोकने के करीब सवा घंटे बाद किसानों ने रोड जाम की। वहीं, स्थानीय संगठनों के किसानों की मदद में आने पर प्रशासन ने जिले की सीमा से सशर्त निकलने की शर्त हटाई।