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Charkhi Dadri News: जलघरों में फिल्टर मीडिया बदलने की कवायद शुरू, शुद्ध पेयजल की होगी आपूर्ति
Mon, 13 Mar 2023 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 13 Mar 2023 12:09 AM IST
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चरखी दादरी। शहर व गांवों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति करने के लिए नए मीडिया फिल्टर लगाने का काम जन स्वास्थ्य विभाग ने शुरू कर दिया है। नए मीडिया फिल्टर पर एक लाख का खर्च व फिल्टर की सफाई करवाने पर करीब 50 हजार रुपये तक का खर्च आता है। इस समय 20 नए फिल्टर लगाने का पूरा हो गया है जबकि 10 जलघरों में मीडिया फिल्टर की सफाई करवाई जा चुकी है। इससे लोगों को अब स्वच्छ पानी पीने को मिलेगा।
शहर में पेयजल का संकट हर मौसम में बना रहता है। इसके साथ पानी की गुणवत्ता भी खराब है। जो पानी सप्लाई होता है वह पीने लायक नहीं होता है। नगर की चंपापुरी कॉलोनी में करीब पांच दशक पुराना जलघर है। यह जलघर पुराने ढर्रे पर ही चला आ रहा है। अब यहां भी नया मीडिया फिल्टर लगने जा रहे हैं। रोड़ी, बजर व दवा डालकर पानी को साफ किया जाता है। पिछले साल स्वास्थ्य विभाग ने शहर के सभी सात बूस्टिंग स्टेशनों, जलघर, शहर में विभिन्न स्थानों पर लगे वाटर कूलर व घरों से अलग अलग सैंपल लिए थे। इस पानी का बैक्ट्रोलॉजिकल टेस्ट सैंपल जांच में फेल पाया गया था। विभाग पानी में नियमित रूप से क्लोरिन भी डालता है लेकिन अंतिम छोर पर पानी पहुंचने पर इसकी मात्रा कम हो जाती है।
विज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार पानी में न्यूट्रेंस के रूप में मुख्य तत्व ऑक्सीजन, आयरन, सल्फर, फ्लोराइड व फास्फेट के अलावा अन्य ऑर्गेनिक भी होते हैं। इनका संतुलित मात्रा में पानी में मौजूद होना जरूरी है। मानव शरीर में 75 प्रतिशत पानी जलवाष्प के रूप में बाहर निकलता है। ऐसे में पोषक युक्त पानी का सेवन ही फायदा पहुंचाता है। खारा पानी का सेवन करने से पेट संबंधी कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है। पेचिस रोग की भी शिकायत हो जाती है। शरीर में सोडिक की मात्रा बढ़ जाती है। आंत संबंधी रोगों को बढ़ावा मिलता है।
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- कई जलघरों में 40 साल पुराने हैं फिल्टर मीडिया
समस्या के स्थायी समाधान के लिए विभाग ने काम शुरू कर दिया है। इसके तहत जलघरों के 40 साल पुराने मीडिया फिल्टर या तो बदले जाएंगे या फिर इनकी सफाई की जाएगी। इस पर विभाग ने काम शुरू कर दिया है। विभाग नगर के चंपापुरी जलघर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी बनवाएगा। जिला 58 जलघर हैं जिनमें शहर के अलावा गांव ढाणी फौगाट, मिसरी, रावलधी, सांवड़, बौंदकलां, घसोला, मंदोला, आदमपुर, पैंतावास कलां, चरखी, झोझूकलां, बालरोड़, घिकाड़ा आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।
जहां मीडिया फिल्टर खत्म हो चुके हैं उनको बदलकर नया लगाया जाएगा। शेष मीडिया फिल्टरों की सफाई करवाई जाएगी। अब तक 10 जलघरों में लगे फिल्टरों की सफाई करवाई जा चुकी है। 20 जलघरों में नये मीडिया फिल्टर लगने जा रहे हैं।
-जगदीशचंद्र, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग
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शहर में पेयजल का संकट हर मौसम में बना रहता है। इसके साथ पानी की गुणवत्ता भी खराब है। जो पानी सप्लाई होता है वह पीने लायक नहीं होता है। नगर की चंपापुरी कॉलोनी में करीब पांच दशक पुराना जलघर है। यह जलघर पुराने ढर्रे पर ही चला आ रहा है। अब यहां भी नया मीडिया फिल्टर लगने जा रहे हैं। रोड़ी, बजर व दवा डालकर पानी को साफ किया जाता है। पिछले साल स्वास्थ्य विभाग ने शहर के सभी सात बूस्टिंग स्टेशनों, जलघर, शहर में विभिन्न स्थानों पर लगे वाटर कूलर व घरों से अलग अलग सैंपल लिए थे। इस पानी का बैक्ट्रोलॉजिकल टेस्ट सैंपल जांच में फेल पाया गया था। विभाग पानी में नियमित रूप से क्लोरिन भी डालता है लेकिन अंतिम छोर पर पानी पहुंचने पर इसकी मात्रा कम हो जाती है।
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विज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार पानी में न्यूट्रेंस के रूप में मुख्य तत्व ऑक्सीजन, आयरन, सल्फर, फ्लोराइड व फास्फेट के अलावा अन्य ऑर्गेनिक भी होते हैं। इनका संतुलित मात्रा में पानी में मौजूद होना जरूरी है। मानव शरीर में 75 प्रतिशत पानी जलवाष्प के रूप में बाहर निकलता है। ऐसे में पोषक युक्त पानी का सेवन ही फायदा पहुंचाता है। खारा पानी का सेवन करने से पेट संबंधी कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है। पेचिस रोग की भी शिकायत हो जाती है। शरीर में सोडिक की मात्रा बढ़ जाती है। आंत संबंधी रोगों को बढ़ावा मिलता है।
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- कई जलघरों में 40 साल पुराने हैं फिल्टर मीडिया
समस्या के स्थायी समाधान के लिए विभाग ने काम शुरू कर दिया है। इसके तहत जलघरों के 40 साल पुराने मीडिया फिल्टर या तो बदले जाएंगे या फिर इनकी सफाई की जाएगी। इस पर विभाग ने काम शुरू कर दिया है। विभाग नगर के चंपापुरी जलघर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी बनवाएगा। जिला 58 जलघर हैं जिनमें शहर के अलावा गांव ढाणी फौगाट, मिसरी, रावलधी, सांवड़, बौंदकलां, घसोला, मंदोला, आदमपुर, पैंतावास कलां, चरखी, झोझूकलां, बालरोड़, घिकाड़ा आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।
जहां मीडिया फिल्टर खत्म हो चुके हैं उनको बदलकर नया लगाया जाएगा। शेष मीडिया फिल्टरों की सफाई करवाई जाएगी। अब तक 10 जलघरों में लगे फिल्टरों की सफाई करवाई जा चुकी है। 20 जलघरों में नये मीडिया फिल्टर लगने जा रहे हैं।
-जगदीशचंद्र, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग