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Charkhi Dadri News: बिजली निगम ने 30 में से 25 फीडर का लोड किया संतुलित, अब किसानों को मिलेगी निर्बाध बिजली
Thu, 18 Jun 2026 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 18 Jun 2026 11:46 PM IST
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पावर सब स्टेशन।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। जिले के कृषि क्षेत्र में अब किसानों को बिजली आपूर्ति संबंधी परेशानियों से काफी हद तक राहत मिलने जा रही है। बिजली निगम ने कृषि पंप (एपी) फीडरों पर बढ़ते लोड को कम करने के लिए चलाए गए अभियान के तहत जिले के 30 में से 25 एपी फीडरों का लोड संतुलित कर दिया है। निगम अधिकारियों का दावा है कि जिन फीडरों पर 1800 एम्पीयर से अधिक भार था उनका लोड बांटने का काम तेजी से किया गया है जिससे अब ओवरलोडिंग की समस्या नहीं रहेगी और फॉल्ट भी कम आएंगे।
पांच हजार ट्यूबवेलों को मिलेगा लाभ
जिले में एपी फीडरों के माध्यम से करीब पांच हजार बिजली चालित ट्यूबवेलों को बिजली आपूर्ति की जा रही है। अब तक कई फीडरों पर अत्यधिक लोड होने के कारण बार-बार फॉल्ट आने, ट्रांसफार्मर खराब होने और किसानों को निर्धारित समय के अनुसार बिजली न मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसे देखते हुए बिजली निगम ने रबी सीजन की फसलों की कटाई के बाद फीडरों के सुदृढ़ीकरण का कार्य शुरू किया था।
ट्रांसफार्मर व जर्जर तार बदले
निगम की ओर से ओवरलोड ट्रांसफार्मरों को बदलकर अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। इसके अलावा जर्जर तारों को बदला जा रहा है और जरूरत के अनुसार नए बिजली पोल भी स्थापित किए गए हैं। खेतों से होकर गुजरने वाली एपी फीडर लाइनों पर प्रत्येक ट्यूबवेल के लिए अलग ट्रांसफार्मर की व्यवस्था की गई है जिससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
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55 प्रतिशत क्षेत्र रेतिला
जिले का करीब 55 प्रतिशत कृषि क्षेत्र रेतीला है जहां किसान मुख्य रूप से भूमिगत जल पर निर्भर हैं। रेतीले क्षेत्रों में भूजल स्तर काफी नीचे होने से मोटरों के माध्यम से पानी निकालकर सिंचाई करनी पड़ती है। हालांकि जिले से नहरें गुजरती हैं लेकिन रेत के टीलों और सीमित जल उपलब्धता के कारण नहरी पानी से पूरी तरह सिंचाई संभव नहीं हो पाती। खरीफ सीजन की फसलें भी काफी हद तक मानसून की बारिश पर निर्भर रहती है।
बारिश न होने से नीचे गया भूजल
पिछले कई वर्षों से सामान्य से कम बारिश होने से भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है जिससे भविष्य में पेयजल संकट गहराने की आशंकाएं भी बढ़ रही हैं। बिजली निगम की ओर से लंबित किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने का कार्य भी पूरा किया गया है। करीब छह वर्षों से लंबित पड़े कनेक्शनों को जारी करने के साथ-साथ किसान अब सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणालियों को भी अपनाने लगे हैं।
वर्सन:
ओवरलोड फीडरों का लोड कम कर दिया गया है। अब ओवरलोडिंग की समस्या नहीं रहेगी। फॉल्ट भी कम आएंगे और किसानों को निर्धारित समयसारिणी के अनुसार पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। - राम सिंह, एसडीओ, बिजली निगम
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पांच हजार ट्यूबवेलों को मिलेगा लाभ
जिले में एपी फीडरों के माध्यम से करीब पांच हजार बिजली चालित ट्यूबवेलों को बिजली आपूर्ति की जा रही है। अब तक कई फीडरों पर अत्यधिक लोड होने के कारण बार-बार फॉल्ट आने, ट्रांसफार्मर खराब होने और किसानों को निर्धारित समय के अनुसार बिजली न मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसे देखते हुए बिजली निगम ने रबी सीजन की फसलों की कटाई के बाद फीडरों के सुदृढ़ीकरण का कार्य शुरू किया था।
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ट्रांसफार्मर व जर्जर तार बदले
निगम की ओर से ओवरलोड ट्रांसफार्मरों को बदलकर अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। इसके अलावा जर्जर तारों को बदला जा रहा है और जरूरत के अनुसार नए बिजली पोल भी स्थापित किए गए हैं। खेतों से होकर गुजरने वाली एपी फीडर लाइनों पर प्रत्येक ट्यूबवेल के लिए अलग ट्रांसफार्मर की व्यवस्था की गई है जिससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
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55 प्रतिशत क्षेत्र रेतिला
जिले का करीब 55 प्रतिशत कृषि क्षेत्र रेतीला है जहां किसान मुख्य रूप से भूमिगत जल पर निर्भर हैं। रेतीले क्षेत्रों में भूजल स्तर काफी नीचे होने से मोटरों के माध्यम से पानी निकालकर सिंचाई करनी पड़ती है। हालांकि जिले से नहरें गुजरती हैं लेकिन रेत के टीलों और सीमित जल उपलब्धता के कारण नहरी पानी से पूरी तरह सिंचाई संभव नहीं हो पाती। खरीफ सीजन की फसलें भी काफी हद तक मानसून की बारिश पर निर्भर रहती है।
बारिश न होने से नीचे गया भूजल
पिछले कई वर्षों से सामान्य से कम बारिश होने से भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है जिससे भविष्य में पेयजल संकट गहराने की आशंकाएं भी बढ़ रही हैं। बिजली निगम की ओर से लंबित किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने का कार्य भी पूरा किया गया है। करीब छह वर्षों से लंबित पड़े कनेक्शनों को जारी करने के साथ-साथ किसान अब सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणालियों को भी अपनाने लगे हैं।
वर्सन:
ओवरलोड फीडरों का लोड कम कर दिया गया है। अब ओवरलोडिंग की समस्या नहीं रहेगी। फॉल्ट भी कम आएंगे और किसानों को निर्धारित समयसारिणी के अनुसार पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। - राम सिंह, एसडीओ, बिजली निगम