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दूषित पानी से गुजरकर पहुंचे मंदिर श्रद्धालु, किया जलाभिषेक
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सरदार झाडू सिंह चौक रोड स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में भरे पानी से गजरते श्रद्धालु।
- फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। शिवरात्रि पर्व पर मंदिरों में पूजा करने पहुंचे श्रद्धालुओं को जलभराव के चलते परेशानियों से दो-चार होना पड़ा। शहर के दो मंदिरों के बाहर मुख्य सड़क पर पानी भरा रहा, जबकि तीसरे मंदिर के तो अंदर तक पानी पहुंच गया। समय रहते प्रशासन और संबंधित विभागों ने मंदिरों के समीप से पानी निकासी की व्यवस्था नहीं की, जिसके चलते श्रद्धालुओं ने रोष भी जताया। शुक्रवार को जलाभिषेक करने पहुंचे श्रद्धालुओं को मंदिरों के अंदर पहुंचने से पहले बाहर भरे दूषित पानी से होकर गुजरना पड़ा।
जिले में शिवरात्रि पर्व पर 70 मंदिरों में बीस हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने पूजा की। गांवों में तो स्थिति ठीक रही, लेकिन शहर में बेपटरी सीवर व्यवस्था और जलभराव के चलते मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शहर के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में दो फुट तक पानी भरा रहा। सुबह नौ से दस बजे तक यहां 80 श्रद्धालु पहुंचे, जिनमें से कुछ तो जलभराव को देखकर लौट गए, जबकि कुछ पानी की परवाह किए बिना अंदर तक पहुंचे और वहां पर शिवलिंग का जलाभिषेक किया। कमोबख्श ऐसी स्थिति वार्ड-14 के मंदिर की रही। यहां दूषित पानी मंदिर के अंदर तक तो नहीं पहुंचा, लेकिन गेट के सामने सड़क पर करीब 200 मीटर की दूरी में पानी भरा रहने से श्रद्धालुओं को परेशानियां हुईं। वहीं, हनुमान बगीची स्थित बड़ा हनुमान मंदिर के बाहर भी जलभराव रहा। यहां करीब पांच सौ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे।
200 श्रद्धालुओं ने डाक विभाग से मंगवाया गंगाजल
बौंदकलां क्षेत्र के दस और झोझूकलां क्षेत्र के 15 मंदिरों में श्रद्घालुओं ने जलाभिषेक किया। इसी प्रकार बाढड़ा क्षेत्र के 20 मंदिरों में आठ हजार श्रद्धालु शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने पहुंचे। दोपहर तक जिले के मंदिर बम-बम भोले के जयकारों से गूंजते रहे। जिले में 200 से अधिक श्रद्धालुओं ने डाक विभाग के जरिये शिवरात्रि पर हरिद्वार से गंगाजल मंगवाया।
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मंदिरों के बाहर लगा मेला, खरीदारी को लेकर कम रहा रुझान
प्राचीव शिव मंदिर के सामने मेला भी लगा, जिसमें खिलौनों के अलावा अन्य सामान की स्टाल लगीं। हालांकि खरीदारी को लेकर उत्साह काफी कम रहा। स्टाल धारक मामनराम और फूलपति ने बताया कि सामान्य दिनों के मुकाबले इस साल कमाई दस प्रतिशत ही है। पहले मेले में एक दिन में पांच से छह हजार की कमाई हो जाती थी, लेकिन इस बार पांच सौ से छह सौ रुपये के सामान की ही बिक्री हुई है।
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जिले में शिवरात्रि पर्व पर 70 मंदिरों में बीस हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने पूजा की। गांवों में तो स्थिति ठीक रही, लेकिन शहर में बेपटरी सीवर व्यवस्था और जलभराव के चलते मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शहर के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में दो फुट तक पानी भरा रहा। सुबह नौ से दस बजे तक यहां 80 श्रद्धालु पहुंचे, जिनमें से कुछ तो जलभराव को देखकर लौट गए, जबकि कुछ पानी की परवाह किए बिना अंदर तक पहुंचे और वहां पर शिवलिंग का जलाभिषेक किया। कमोबख्श ऐसी स्थिति वार्ड-14 के मंदिर की रही। यहां दूषित पानी मंदिर के अंदर तक तो नहीं पहुंचा, लेकिन गेट के सामने सड़क पर करीब 200 मीटर की दूरी में पानी भरा रहने से श्रद्धालुओं को परेशानियां हुईं। वहीं, हनुमान बगीची स्थित बड़ा हनुमान मंदिर के बाहर भी जलभराव रहा। यहां करीब पांच सौ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे।
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200 श्रद्धालुओं ने डाक विभाग से मंगवाया गंगाजल
बौंदकलां क्षेत्र के दस और झोझूकलां क्षेत्र के 15 मंदिरों में श्रद्घालुओं ने जलाभिषेक किया। इसी प्रकार बाढड़ा क्षेत्र के 20 मंदिरों में आठ हजार श्रद्धालु शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने पहुंचे। दोपहर तक जिले के मंदिर बम-बम भोले के जयकारों से गूंजते रहे। जिले में 200 से अधिक श्रद्धालुओं ने डाक विभाग के जरिये शिवरात्रि पर हरिद्वार से गंगाजल मंगवाया।
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मंदिरों के बाहर लगा मेला, खरीदारी को लेकर कम रहा रुझान
प्राचीव शिव मंदिर के सामने मेला भी लगा, जिसमें खिलौनों के अलावा अन्य सामान की स्टाल लगीं। हालांकि खरीदारी को लेकर उत्साह काफी कम रहा। स्टाल धारक मामनराम और फूलपति ने बताया कि सामान्य दिनों के मुकाबले इस साल कमाई दस प्रतिशत ही है। पहले मेले में एक दिन में पांच से छह हजार की कमाई हो जाती थी, लेकिन इस बार पांच सौ से छह सौ रुपये के सामान की ही बिक्री हुई है।

मेले में खरीदारी करते लोग।- फोटो : CharkhiDadri

मंदिर परिसर के शिवलिंग पर जलाभिषेक करते श्रद्धालु।- फोटो : CharkhiDadri