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Charkhi Dadri News: टीम ने परंपरागत खेती के साथ एकीकृत खेती और बागवानी अपनाने के लिए किया प्रेरित
Thu, 07 Nov 2024 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 07 Nov 2024 11:51 PM IST
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फार्म में लगी नर्सरी पौधशाला, नेट हाउस और पॉली हाउस का अवलोकन करते हुए। स्रोत: टीम
नीति आयोग आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के तहत वीरवार को कांहड़ा गांव पहुंची टीम
संवाद न्यूज एजेंसी
बाढड़ा। नीति आयोग आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के तहत नीति आयोग और अटल भूजल की टीम ने गांव कांहड़ा में एग्रो फॉर्मर प्रोड्यूसर का दौरा किया। टीम ने परंपरागत खेती के साथ, एकीकृत खेती, बागवानी, पौधशाला एवं सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली आदि को अपनाने पर बल दिया।
एग्रो फॉर्मर प्रोड्यूसर के निदेशक महेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने 2007 में बागवानी विभाग के सहयोग से सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के तहत सात एकड़ में मौसमी किन्नू और रेड माल्टा की खेती शुरू की थी। इसके चार वर्ष पश्चात पैदावार शुरू हुई। प्रति वर्ष 20 से 22 लाख के फलों की बिक्री हो जाती है। इस पर चार से पांच लाख की लागत आती है।
टीम ने फार्म में लगी नर्सरी पौधशाला, नेट हाउस और पॉली हाउस का अवलोकन भी किया। नीति आयोग के एबी फेलो मनी प्रकाश ने बताया कि नीति आयोग ने खंड बाढड़ा को आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित कर रखा है। इसके तहत खंड के प्रगतिशील किसानों की प्रेरक प्रणालियों को नीति आयोग एवं प्रशासन को साझा करना है। ताकि, इस क्षेत्र में आगामी योजनाओं और परियोजनाओं पर ध्यान और विचार किया जा सके। खंड का समग्र विकास किया जा सके। इस मौके पर डीआईपी डॉ. तेजवीर सिंह, वीरेंद्र कुमार आदि भी उपस्थित रहे।
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फोटो 35
फार्म में लगी नर्सरी पौधशाला, नेट हाउस और पॉली हाउस का अवलोकन करती टीम। स्रोत : टीम
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संवाद न्यूज एजेंसी
बाढड़ा। नीति आयोग आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के तहत नीति आयोग और अटल भूजल की टीम ने गांव कांहड़ा में एग्रो फॉर्मर प्रोड्यूसर का दौरा किया। टीम ने परंपरागत खेती के साथ, एकीकृत खेती, बागवानी, पौधशाला एवं सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली आदि को अपनाने पर बल दिया।
एग्रो फॉर्मर प्रोड्यूसर के निदेशक महेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने 2007 में बागवानी विभाग के सहयोग से सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के तहत सात एकड़ में मौसमी किन्नू और रेड माल्टा की खेती शुरू की थी। इसके चार वर्ष पश्चात पैदावार शुरू हुई। प्रति वर्ष 20 से 22 लाख के फलों की बिक्री हो जाती है। इस पर चार से पांच लाख की लागत आती है।
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टीम ने फार्म में लगी नर्सरी पौधशाला, नेट हाउस और पॉली हाउस का अवलोकन भी किया। नीति आयोग के एबी फेलो मनी प्रकाश ने बताया कि नीति आयोग ने खंड बाढड़ा को आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित कर रखा है। इसके तहत खंड के प्रगतिशील किसानों की प्रेरक प्रणालियों को नीति आयोग एवं प्रशासन को साझा करना है। ताकि, इस क्षेत्र में आगामी योजनाओं और परियोजनाओं पर ध्यान और विचार किया जा सके। खंड का समग्र विकास किया जा सके। इस मौके पर डीआईपी डॉ. तेजवीर सिंह, वीरेंद्र कुमार आदि भी उपस्थित रहे।
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फार्म में लगी नर्सरी पौधशाला, नेट हाउस और पॉली हाउस का अवलोकन करती टीम। स्रोत : टीम