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खेत की मिट्टी जांच के लिए छह से 12 सेंटीमीटर गहराई से लें नमूने

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 21 Mar 2022 12:03 AM IST
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Take samples from six to 12 cm depth for soil test of the field
खेत का फोटो। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। रबी की फसलों की कटाई का काम पूरा होने के बाद खाली खेत से किसान मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं। मिट्टी की जांच करवाने का यह उचित समय माना जाता है। खेत से मिट्टी के नमूने छह से 12 सेंटीमीटर गहराई तक लेने चाहिए। मिट्टी के नमूने खेत में पांच से छह स्थानों से एकत्र किए जाएं। खेत में पेड़ के नीचे से मिट्टी का नमूना नहीं लेना चाहिए। बाग आदि की जमीन में मिट्टी के सैंपल 30 सेंटीमीटर गहराई तक लेने चाहिए। जब ट्यूबवेल से लगातार एक घंटा पानी की निकासी हो जाए तब पानी का सैंपल लें।
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इस समय किसान रबी की नकदी माने जाने वाली सरसों की फसल की कटाई के काम में जुटे हैं। अप्रैल के प्रथम सप्ताह में गेहूं कटाई शुरू हो जाएगी। 25 अप्रैल तक तकरीबन खेत खाली हो जाएंगे। उसके बाद अगली खरीफ की फसलों की बिजाई से पहले किसान को अपने खेत की मिट्टी व ट्यूबवेल के पानी की जांच करवानी चाहिए। मिट्टी जांच करवाने का यह उचित समय माना जाता है।
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मिट्टी की जांच करवाने से पता चल सकेगा कि मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है। जांच रिपोर्ट के अनुसार ही जमीन में खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। अधिकतर किसान मिट्टी की जांच नहीं करवाते और हर सीजन में एक निश्चित मात्रा में ही यूरिया व डीएपी खाद डालते रहते हैं, जिसका जमीन पर प्रतिकूल असर पड़ता है। जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ने के बजाय नुकसान होता है।
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इसी प्रकार पानी भी महत्वपूर्ण तत्व है। जो फसल के लिए अति जरूरी है। ज्यादा नमकीन एवं लवणीय पानी में बीज अंकुरित नहीं हो पाता। वही पानी फसल के लिए सही माना जाता है जिसमें संतुलित मात्रा में आवश्यक पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में खेत में लगे ट्यूबवेल के पानी की जांच भी साल में एक बार तो अवश्य करवानी चाहिए। ट्यूबवेल के पानी का सैंपल लेते समय किसान को सावधानी बरतनी चाहिए। जब ट्यूबवेल को चलते हुए एक घंटा हो जाए यानी लगातार एक घंटा तक जमीन से पानी की निकासी होने के बाद ही पानी का सैंपल लें। इससे रिपोर्ट सही ढंग से तैयार हो सकेगी।
हर जिले में मिट्टी व पानी की जांच के लिए लैब बनी हुई हैं। वैसे भी अब सरकार की योजना है कि किसान के खेत में जाकर मिट्टी के नमूने लेकर जांच की जाए और किसान को जांच रिपोर्ट के आधार पर ही रासायनिक खाद डालने की सलाह दी जाए। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन को उर्वरा बनाने के लिए फसल चक्र को जरूर अपनाएं। साल में एक बार ढेंचा या मूंग की बिजाई अवश्य करें। इससे जैविक खाद मिलती है तथा खेत का तापमान भी संतुलित बना रहता है। ट्यूबवेल को बारिश के सीजन में रिचार्ज करते रहें। आसपास गड्ढा बनाकर उसमें बारिश के पानी का संग्रहण किया जा सकता है। इससे बोरिंग ट्यू्बवेल के पानी की गुणवत्ता में काफी सुधार आएगा।

वर्जन
अप्रैल व मई का महीना मिट्टी की जांच के लिए उपयुक्त है। खाली खेत से पांच से छह स्थानों से नमूने लेने चाहिएं। जांच करवाने के बाद ही खेत में उसी अनुपात में खाद आदि डालना चाहिए। किसान इसके लिए कृषि विभाग कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। खाली जमीन में हरी खाद तैयार की जा सकती है।
- डॉ. जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी सहायक।
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