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Charkhi Dadri News: दोनों सीटों पर बाहरी प्रत्याशी उतारने से खफा सुखविंद्र मांढ़ी ने छोड़ी भाजपा
Fri, 06 Sep 2024 05:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 06 Sep 2024 05:05 AM IST
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पूर्व विधायक सुखविंद्र मांढ़ी। संवाद
पूर्व विधायक 18 साल से जुड़े थे भाजपा से, प्रत्याशियों का सही चयन न होने पर भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष के पद से दिया इस्तीफा
वीरवार को समर्थकों ने भी प्रदर्शन कर भाजपा को दिए चुनाव में बगावत के संकेत
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। बाढड़ा से पूर्व विधायक सुखविंद्र मांढ़ी ने दादरी जिले के दोनों प्रत्याशियों के नामों की घोषणा होते ही भाजपा को अलविदा कह दिया। उन्होंने पद से दिया गया इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली को भेज दिया। वीरवार को संवाददाता से हुई बातचीत में उन्होंने भाजपा छोड़ने का कारण जिले की दोनों सीटों से बाहरी उम्मीदवार उतारना बताया।
पूर्व विधायक एवं भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि टिकट कटने का उन्हें दुख नहीं है। मन में टीस संगठन के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले योग्य दावेदारों की अनदेखी से है। उन्होंने बताया कि भाजपा ने दादरी और बाढड़ा विधानसभा सीट से कुछ समय पहले और हाल ही में शामिल होने वाले को मौका दिया। इससे सच्चे व स्वाभिमानी कार्यकर्ताओं को ठेस पहुंची है।
बता दें कि भाजपा ने दादरी से पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान के बेटे एवं जेल अधीक्षक पद से वीआरएस लेकर एक दिन पहले ही भाजपा ज्वाइन करने वाले सुनील सांगवान को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं, पूर्व विधायक सुखविंद्र मांढ़ी के गढ़ बाढड़ा हलके से उमेद पातुवास को उम्मीदवार घोषित किया है। उमेद पातुवास ने कुछ समय पहले ही भाजपा का दामन थामा था। वह एक चुनाव निर्दलीय भी लड़ चुके हैं।
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- भाजपा ने दो बार बनाया प्रत्याशी, एक बार मिली जीत
सुखविंद्र मांढ़ी 18 साल भाजपा में रहे। उन्हें संगठन ने दो विधानसभा चुनाव में अपना प्रत्याशी बनाया। वर्ष 2014 का विधानसभा चुनाव जीतकर वह विधायक बने जबकि वर्ष 2019 में उन्हें लगातार दूसरी बार कामयाबी नहीं मिल पाई। बाढड़ा हलके से पिछले चुनाव में नैना चौटाला विजेता बनीं और उनका बड़ा कद सुखविंद्र मांढ़ी की हार का कारण रहा। इस बार भी सुखविंद्र मांढ़ी को टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा था।
- मौजूदा चुनाव लड़ने की स्थिति अभी नहीं स्पष्ट
भाजपा से इस्तीफा देने के बाद किसी संगठन या निर्दलीय चुनाव लड़ने के सवाल का जवाब देते हुए सुखविंद्र मांढ़ी ने कहा कि फिलहाल इसका तो मुझे भी नहीं पता। उन्हाेंने कहा कि इतना पता है कि 24 मई 2006 को भाजपा ज्वाइन की थी। उसके बाद से संगठन के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में काम किया।
- समर्थकों ने वीरवार को बाढड़ा में किया प्रदर्शन
भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र मांढ़ी के इस्तीफे के बाद किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष विकास उर्फ भल्ले ने भी पद से इस्तीफा देने के साथ ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ दी। वहीं, सुखविंद्र मांढ़ी समर्थकों ने वीरवार को बाढड़ा में भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन किया और संगठन का झंडा जलाकर रोष जताया। इस प्रदर्शन से सुखविंद्र समर्थकों ने चुनाव में भाजपा के वोट बैंक को नुकसान पहुंचाने के संकेत भी दे दिए।
फोटो 15
पूर्व विधायक सुखविंद्र मांढ़ी। संवाद
फोटो 16
वीरवार को बाढड़ा में प्रदर्शन करते पूर्व विधायक सुखविंद्र मांढ़ी के समर्थक। संवाद
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वीरवार को समर्थकों ने भी प्रदर्शन कर भाजपा को दिए चुनाव में बगावत के संकेत
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। बाढड़ा से पूर्व विधायक सुखविंद्र मांढ़ी ने दादरी जिले के दोनों प्रत्याशियों के नामों की घोषणा होते ही भाजपा को अलविदा कह दिया। उन्होंने पद से दिया गया इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली को भेज दिया। वीरवार को संवाददाता से हुई बातचीत में उन्होंने भाजपा छोड़ने का कारण जिले की दोनों सीटों से बाहरी उम्मीदवार उतारना बताया।
पूर्व विधायक एवं भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि टिकट कटने का उन्हें दुख नहीं है। मन में टीस संगठन के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले योग्य दावेदारों की अनदेखी से है। उन्होंने बताया कि भाजपा ने दादरी और बाढड़ा विधानसभा सीट से कुछ समय पहले और हाल ही में शामिल होने वाले को मौका दिया। इससे सच्चे व स्वाभिमानी कार्यकर्ताओं को ठेस पहुंची है।
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बता दें कि भाजपा ने दादरी से पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान के बेटे एवं जेल अधीक्षक पद से वीआरएस लेकर एक दिन पहले ही भाजपा ज्वाइन करने वाले सुनील सांगवान को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं, पूर्व विधायक सुखविंद्र मांढ़ी के गढ़ बाढड़ा हलके से उमेद पातुवास को उम्मीदवार घोषित किया है। उमेद पातुवास ने कुछ समय पहले ही भाजपा का दामन थामा था। वह एक चुनाव निर्दलीय भी लड़ चुके हैं।
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- भाजपा ने दो बार बनाया प्रत्याशी, एक बार मिली जीत
सुखविंद्र मांढ़ी 18 साल भाजपा में रहे। उन्हें संगठन ने दो विधानसभा चुनाव में अपना प्रत्याशी बनाया। वर्ष 2014 का विधानसभा चुनाव जीतकर वह विधायक बने जबकि वर्ष 2019 में उन्हें लगातार दूसरी बार कामयाबी नहीं मिल पाई। बाढड़ा हलके से पिछले चुनाव में नैना चौटाला विजेता बनीं और उनका बड़ा कद सुखविंद्र मांढ़ी की हार का कारण रहा। इस बार भी सुखविंद्र मांढ़ी को टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा था।
- मौजूदा चुनाव लड़ने की स्थिति अभी नहीं स्पष्ट
भाजपा से इस्तीफा देने के बाद किसी संगठन या निर्दलीय चुनाव लड़ने के सवाल का जवाब देते हुए सुखविंद्र मांढ़ी ने कहा कि फिलहाल इसका तो मुझे भी नहीं पता। उन्हाेंने कहा कि इतना पता है कि 24 मई 2006 को भाजपा ज्वाइन की थी। उसके बाद से संगठन के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में काम किया।
- समर्थकों ने वीरवार को बाढड़ा में किया प्रदर्शन
भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र मांढ़ी के इस्तीफे के बाद किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष विकास उर्फ भल्ले ने भी पद से इस्तीफा देने के साथ ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ दी। वहीं, सुखविंद्र मांढ़ी समर्थकों ने वीरवार को बाढड़ा में भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन किया और संगठन का झंडा जलाकर रोष जताया। इस प्रदर्शन से सुखविंद्र समर्थकों ने चुनाव में भाजपा के वोट बैंक को नुकसान पहुंचाने के संकेत भी दे दिए।
फोटो 15
पूर्व विधायक सुखविंद्र मांढ़ी। संवाद
फोटो 16
वीरवार को बाढड़ा में प्रदर्शन करते पूर्व विधायक सुखविंद्र मांढ़ी के समर्थक। संवाद