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Charkhi Dadri News: - पशु अपशिष्ट संयंत्रों पर केंद्र सरकार देगी 15 से 40 हजार प्रति किलोवाट सब्सिडी
Mon, 14 Jul 2025 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 14 Jul 2025 11:38 PM IST
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- गोशालाओं, डेयरी और संस्थागत इकाइयां उठा सकती हैं योजना का लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण के सहयोग से बायोगैस उपयोग कार्यक्रम को ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में तेजी से प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी प्रदान की जा रही है। बायोगैस एक स्वच्छ, प्रदूषण रहित, धुआं रहित और किफायती ईंधन है, जो 55 से 70 प्रतिशत मीथेन गैस से भरपूर होता है। इसे गोबर गैस संयंत्र के माध्यम से पशुओं के गोबर और जैविक पदार्थों से उत्पन्न किया जाता है।
उपायुक्त मुनीश शर्मा ने कहा है कि हरियाणा में लगभग 7.6 मिलियन पशुधन हैं। इससे प्रतिदिन लगभग 3.8 मिलियन घन मीटर बायोगैस उत्पन्न करने की क्षमता है जो लगभग 300 मेगावाट विद्युत उत्पादन में सहायक हो सकती है। इस गैस को शुद्ध कर बायोगैस के रूप में भी प्रयोग में लाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि संस्थागत बायोगैस कार्यक्रम गोशाला, डेयरी और संस्थागत इकाइयों में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार 40 प्रतिशत की आर्थिक सहायता दे रही है। अब तक राज्य में 114 संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इस योजना के अंतर्गत 25 से 85 घन मीटर क्षमता वाले संयंत्रों के लिए 1 लाख 27 हजार से 3 लाख 95 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है।
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इसी प्रकार, बायोगैस पावर (ऑफ ग्रिड) उत्पादन कार्यक्रम के तहत पशु अपशिष्ट से उत्पादित बायोगैस का उपयोग करके 3 से 250 किलोवाट तक की विद्युत उत्पादन क्षमता वाले संयंत्रों पर केंद्र सरकार की ओर से 15 हजार से 40 हजार रुपये प्रति किलोवाट तक की सब्सिडी दी जाती है।
उन्होंने बताया कि इच्छुक संस्था एवं व्यक्ति को निर्धारित प्रपत्र के साथ आवेदन करना होगा। परियोजना को छह माह के भीतर पूर्ण करना अनिवार्य है। आवेदन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर स्वीकार किए जाएंगे जबकि गोशाला व धार्मिक संस्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी।
उपायुक्त ने बताया कि परियोजना की गारंटी के लिए 25 से 45 क्यूबिक मीटर संयंत्र के लिए 30 हजार एवं 60 से 85 क्यूबिक मीटर संयंत्र के लिए 50 हजार रुपये की राशि सुरक्षा निधि के रूप में जमा करनी होगी, जो कार्य पूर्ण होने पर वापस की जाएगी।
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चरखी दादरी। हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण के सहयोग से बायोगैस उपयोग कार्यक्रम को ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में तेजी से प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी प्रदान की जा रही है। बायोगैस एक स्वच्छ, प्रदूषण रहित, धुआं रहित और किफायती ईंधन है, जो 55 से 70 प्रतिशत मीथेन गैस से भरपूर होता है। इसे गोबर गैस संयंत्र के माध्यम से पशुओं के गोबर और जैविक पदार्थों से उत्पन्न किया जाता है।
उपायुक्त मुनीश शर्मा ने कहा है कि हरियाणा में लगभग 7.6 मिलियन पशुधन हैं। इससे प्रतिदिन लगभग 3.8 मिलियन घन मीटर बायोगैस उत्पन्न करने की क्षमता है जो लगभग 300 मेगावाट विद्युत उत्पादन में सहायक हो सकती है। इस गैस को शुद्ध कर बायोगैस के रूप में भी प्रयोग में लाया जा सकता है।
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उन्होंने बताया कि संस्थागत बायोगैस कार्यक्रम गोशाला, डेयरी और संस्थागत इकाइयों में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार 40 प्रतिशत की आर्थिक सहायता दे रही है। अब तक राज्य में 114 संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इस योजना के अंतर्गत 25 से 85 घन मीटर क्षमता वाले संयंत्रों के लिए 1 लाख 27 हजार से 3 लाख 95 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है।
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इसी प्रकार, बायोगैस पावर (ऑफ ग्रिड) उत्पादन कार्यक्रम के तहत पशु अपशिष्ट से उत्पादित बायोगैस का उपयोग करके 3 से 250 किलोवाट तक की विद्युत उत्पादन क्षमता वाले संयंत्रों पर केंद्र सरकार की ओर से 15 हजार से 40 हजार रुपये प्रति किलोवाट तक की सब्सिडी दी जाती है।
उन्होंने बताया कि इच्छुक संस्था एवं व्यक्ति को निर्धारित प्रपत्र के साथ आवेदन करना होगा। परियोजना को छह माह के भीतर पूर्ण करना अनिवार्य है। आवेदन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर स्वीकार किए जाएंगे जबकि गोशाला व धार्मिक संस्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी।
उपायुक्त ने बताया कि परियोजना की गारंटी के लिए 25 से 45 क्यूबिक मीटर संयंत्र के लिए 30 हजार एवं 60 से 85 क्यूबिक मीटर संयंत्र के लिए 50 हजार रुपये की राशि सुरक्षा निधि के रूप में जमा करनी होगी, जो कार्य पूर्ण होने पर वापस की जाएगी।