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जगह का फंसा पेच, 35 गांवों में नहरी पानी की आपूर्ति करने के प्रोजेक्ट पर लगा ब्रेक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 12 Aug 2021 12:12 AM IST
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Stuck in place, brake on project to supply canal water in 35 villages
ट्यूबवेल जिसके जरिये आपूर्ति होती है। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। डार्क जोन में शामिल बाढड़ा उपमंडल के 35 गांवों में नहरी पानी की आपूर्ति करने की योजना पर जगह का पेच फंसने से काम शुरू नहीं हो पा रहा है। 97 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए जनस्वास्थ्य विभाग पांच माह पहले टेंडर अलॉट कर चुका है। एजेंसी के अधिकारी जब काम शुरू करवाने के लिए साइट पर पहुंचे तो वन विभाग के अधिकारियों ने नीमड़-बड़ेसरा में जलधर के लिए चिह्नित जमीन को विभाग की बताया। अधिकारियों के बताया कि ग्राम पंचायत यह जमीन वन विभाग को कई वर्षों पहले ही पौधरोपण के लिए दे चुकी है। इस पचड़े के कारण अब तक इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं हो पाया है।
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करीब डेढ़ साल पहले बाढड़ा उपमंडल के 35 गांवों में ट्यूबवेल के पानी की आपूर्ति की बजाय नहरी पानी पहुंचाने की योजना तैयार की गई थी। इसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रोजेक्ट का प्रारूप तैयार किया। सरकार की ओर से स्वीकृति मिलने के बाद एस्टीमेट तैयार किया गया। सूत्रों के अनुसार विभाग की ओर से करीब 100 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार कर सरकार के पास भेजा गया था। सरकार ने इसके लिए 97 करोड़ 17 लाख का बजट स्वीकृत किया था। इसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग ने फरवरी में टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। मार्च में इस प्रोजेक्ट का टेंडर अलॉट हो गया। जब जनस्वास्थ्य विभाग और टेंडर लेने वाली एजेंसी के अधिकारी काम शुरू करवाने के लिए मौके पर पहुंचे तो वन विभाग ने नीमड़-बड़ेसरा में जलघर के लिए चिह्नित जमीन को वन विभाग की बताया। इस प्रोजेक्ट पर तब से ही जमीन का पेच फंसा हुआ है, जो अब तक नहीं सुलझ पाया है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि वो जमीन के पेच को सुलझाने के लिए प्रयासरत हैं और यह मामला एसडीएम और डीसी समेत राजस्व विभाग के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में भी है। संवाद
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35 गांवों की एक लाख से ज्यादा आबादी को होगा फायदा
बाढड़ा क्षेत्र के गांवों के लिए यह प्रोजेक्ट फायदेमंद हैं और जगह की अड़चन को दूर करने के लिए हर स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है। इन गांवों में पेयजल की भारी किल्लत है और ग्रामीण लंबे समय से यह दंश झेल रहे हैं। यह योजना तैयार होने पर इन 35 गांवों की एक लाख से ज्यादा आबादी को पेयजल संकट से निजात और नहरी पानी की आपूर्ति मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन टेंडर अलॉट होने के पांच माह बाद भी काम शुरू नहीं होने से उम्मीद धूमिल होती नजर आ रही है।
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नहरी पानी आपूर्ति के लिए ये है योजना
जनस्वास्थ्य विभाग ने इन गांवों में नहरी पानी आपूर्ति की जो याजना तैयार की है, उसके मुताबिक नीमड़-बड़ेसरा में एक बड़ा जलघर बनना है। इसके अलावा 37 गांवों में बूस्टिंग स्टेशन बनने हैं। पांच इंटरमीडिएट पंपिंग सिस्टम का निर्माण भी इसी योजना के तहत करवाया जाएगा। नीमड़-बड़ेसरा जलघर में पानी पहुंचाने और फिर यहां से पाली का उठान अन्य गांवों के बूस्टर तक पहुंचाने के लिए पाइप लाइन डाली जानी हैं।
सभी गांवों में बिछाई जाएंगी पाइप लाइनें
विभागीय सूत्रों के अनुसार इस प्रोजेक्ट के तहत सभी गांवों में नई पाइपलाइन डाली जाएंगी। 1,25786 मीटर लंबर चार इंची, 70117 मीटर लंबी छह इंची, 27875 मीटर लंबी आठ इंची, 16650 मीटर लंबी 10 इंची, 12980 मीटर लंबी 12 इंची और पांच हजार मीटर लंबाई में 28 इंची पाइप लाइन डाली जानी है।
प्रोजेक्ट से जुड़े हैं ये गांव
यह प्रोजेक्ट बाढड़ा, भांडवा, बिलावल, चांदवास, धनासरी, हंसावास कलां, हंसावास खुर्द, हुई, जेवली, कांहड़ा, किष्कंधा, लाड, मांढी हरिया, मांढी केहर, मांढी पिरानू, नांधा, नीमड़-बड़ेसरा, रहडोदा, रहड़ोदी, बड़राई, गोपालवास, कुब्जानगर, माई कलां, नौरंगाबास जाटान, पिचोपा कलां, पिचोपा खुर्द समेत 35 गांवों से जुड़ा है।
इन गांवों को पेयजल संकट से निजात दिलाना बेहद जरूरी है और इसी के मद्देनजर ये योजना तैयार करवाई गई थी। जमीनी अड़चन के कारण प्रोजेक्ट पर ब्रेक लगा हुआ है। अड़चन को दूर करवाने के लिए हम प्रयासरत हैं और जल्द से जल्द धरातल पर काम शुरू करवाना हमारा लक्ष्य है।

नैना चौटाला, विधायक, बाढड़ा
जमीन अड़चन की वजह से हम नीमड़-बड़ेसरा में बनने वाले बड़े जलघर का निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं कर पाए हैं। यह मामला प्रशासन के संज्ञान में भी हैं और बाढड़ा एसडीएम स्वयं अड़चन को दूर करवाने के लिए प्रयासरत हैं।
पवन कादयान, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग
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