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अब भी चेतें: भूजल का अतिदोहन 47 गांवों को दे रहा दर्द

Sat, 26 Aug 2023 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sat, 26 Aug 2023 11:24 PM IST
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Still alert: overexploitation of groundwater is giving pain to 47 villages
विधायक नैना चौटाला।
चरखी दादरी। बाढड़ा उपमंडल के 47 गांवों में भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है। इन गांवों में हर वर्ष पानी का स्तर 3 से 9 फुट नीचे जा रहा है। अगर ये ही हालात रहे तो अगले 20 साल बाद इस क्षेत्र में खेती करना तो दूर पेयजल भी नसीब नहीं हो पाएगा। खंड के गांव धनासरी में हर वर्ष औसतन 9.2 फुट भूजल स्तर गिर रहा है। इस गांव में वर्ष 2010 में भूजल स्तर 196.2 था जो वर्ष 2020 में 278.9 व वर्तमान में 320.3 फुट पहुंच चुका है।
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अटल भूजल योजना के तहत आंकड़ों के किए गए विश्लेषण के अनुसार 2047 तक 535.7 फुट गहराई में पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। वर्तमान में यहां का भू-जल पीने और सिंचाई के योग्य नहीं है। इस पानी में टीडीएस एवं फ्लोराइड की मात्रा भी तय मानकों से अधिक है।
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अटल भूजल योजना के तहत खंड में भू-जल स्तर की लगातार निगरानी के लिए पिजोमीटर लगाए गए हैं। खंड के अधिकांश गांवों में भू-जल स्तर 200 फुट से नीचे पहुंच चुका है। पिछले 20 साल के दौरान बाढड़ा क्षेत्र में नहरी पानी के अभाव में भू-जल का अत्यधिक दोहन हुआ है। इसके चलते पिछले एक दशक में 70 प्रतिशत से अधिक बोरवेल व सार्वजनिक कुएं ठप हो चुके हैं। इसी रफ्तार से भू-जल स्तर में गिरावट जारी रही तो अगले 20 वर्षों के बाद क्षेत्र में पानी संकट खड़ा होना लाजमी है। संवाद
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2017 में डार्क जोन में शामिल, 2020 में हुए बाहर
बाढड़ा खंड के गांवों को 2017 में डार्क जोन शामिल किया गया था। इसके तहत यहां विभिन्न प्रकार की गतिविधियों जैसे बोरवेल करने व ट्यूबवेल लगवाने पर रोक लगाई गई थी। बाद में सरकार ने 2020 में बाढड़ा को डार्क जोन से बाहर कर दिया।

ये हैं जलस्तर गिरने के कारण
. नहरी पानी की कम उपलब्धता के चलते पानी का दोहन होना।
. गांवों में 70 प्रतिशत कुएं व बोरवेल ठप होना।
. 15 गांवों में ही फिलहाल नहरी पानी की उपलब्धता होना।
. मानसून सीजन में कई सालों से बारिश कम होना
. जोहड़ों व तालाबों का सूखना।
. जल संरक्षण के लोगों को सजग न होना।

जानिये...बाढड़ा खंड के किस गांव में क्या है भू-जल की स्थिति
गांव - वर्ष 2010 - वर्ष 2020- 20 साल बाद अनुमानित गिरावट -एक दशक में गिरावट - वर्तमान स्तर
आर्य नगर
180.5
246.1
424.1 65.61 266.2
बेरला
131.3
172.6
316.0 41.32 200.7


भांडवा
196.9
240.7
378.7 43.83 263.6



बिलावल
138.7
172.7
289 34.4 195.0



चांदवास
201.8
229.5
324.2 27.75 247.7



डालावास
196.9
236.3
325.4 39.46 239.6



डांडमा
187.1
240.7
388.4 53.67 258.2



धनासरी 196.2
278.9
535.7 82.78 320.3



डोहका दीना
131.3
180.3
306.5 49.9 192.0



डोहका मौजी
82.1
144.4
363.3 62.3 188.1



डोहका हरिया
82.1
177.2
413.2 95.1 195.4



डूडीवाला किशनपुरा 108.3
150.8
274.2 42.5 67.09



डूडीवाला नंदकरण
114.1
169.7
301.9 55.6 177.5



द्वारका
187.1
225
321.2 37.9
233.3



गोपी
180.8
213.9
291.1 33.1 217.8



गोविंदपुरा
180.5
246.1
456.5 65.6 282.2



हंसावास कलां
190.3
227.1
402.1 36.8 275.6



हुई
158.7
199.9
313.8 41.2 213.6



जगरामबास
190.3
227.6
354.3 37.3 251.7



जीतपुरा
183.8
207.9
287.8 24.1 222.4



जेवली
187.1
216.7
326.6 29.6 240.3



काकड़ोली हट्ठी 194.9
225.4
320.5 30.5 240.9




काकड़ोली हुक्मी
194.9
222.9
293.3 28.0 228.8



काकड़ोली सरदारा
194.3
237.9
368.5 43.6 257.3



कान्हड़ा
183.8
223.7
365.3 39.9 252.4



कारीआदू 181.5
217.9
395.5 36.4 268.0



कारी धारणी 180.5
216.6
344.4 36.1 242.4



कारी मोद
187.1
231.0
365.4 43.9 252.0



कारी रूपादास
193.6
218.2
278.4 24.6 222.5



कारी तोखा
193.6
218.2
298.0 24.6 232.2



खोरड़ा
147.7
190.3
361.1 42.6 230.6



किष्कंधा
187.1
231.0
426.9 43.9 282.4



लाड
201.2
238.6
354.6 37.4 257.2



लाडावास 204.1
225.8
286.5 21.7 233.4



मांढी पिरानू 167.4
184.3
233.3 16.9 191.0



मांढी हरिया
152.6
164.9
204.2 12.3 171.6



मांढी केहर
185.4
218.4
338.5 33.0 243.7



नांधा
204.1
260.9
421.7 56.8 281.6



नीमस बडेसरा
213.3
229.7
271.3 16.4 233.3



पंचगाव 196.9
226.4
303.0 29.5 233.7



रहड़ोदी 183.8
211.2
281.3 27.4 217.5



रामपुरा
95.2
149.0
301.6 53.8 168.8



रहड़ोदा 147.7
226.4
408.2 78.7 234.8



श्यामकलां
188.7
200.9
234.7 12.2 205.0



सिरसली
196.9
223.1
295.8 26.2 231.9



सूरजगढ़
201.8
227.2
351.9 25.4 262.6



उमरवास
180.5
210
300.5 29.5 224.2



नोट:- यह सभी जलस्तर के आंकड़े फुट में हैं।


बुजुर्ग बोले: पहले के मुकाबले काफी नीचे चलाया गया भू-जल स्तर

गांव पंचगावां निवासी 83 वर्षीय हवा सिंह नंबरदार ने बताया कि पहले 50 फुट पर पानी मिल जाता था लेकिन अब 180 फुट पर पानी मिलता है। लोग पहले कुओं से पानी निकालकर पीते थे, लेकिन अब उपकरणों के जरिये पानी निकाला जाता है।
- कारी मोद निवासी 80 वर्षीय गिरधारी ने बताया कि पहले 70 फुट पर पानी मिल जाता था लेकिन अब जलस्तर 200 फुट तक पहुंच गया है। अब लोग कुओं की जगह बोरवेल करने लगे है जिससे पानी की पूर्ति की जा रही है।

पिछले एक दशक में कृषि उपयोग के लिए उपलब्ध पानी के अनुसार अधिक दोहन हुआ है, जिसके कारण भूजल स्तर में गिरावट आ रही है। मानसून सीजन में बारिश का कम होना भी भूजल स्तर में गिरावट का प्रमुख कारण है। खंड के अलग-अलग गांवों में भूजल स्तर में दो से 9 फुट औसतन गिरावट दर्ज की गई है।

- राकेश निमहोरिया, एचएएस-1, जल वैज्ञानिक, भूजल कोष
दिल्ली रोड के कई गांवों में मानसून सीजन के दौरान जलभराव होता है। उस पानी को अगर बाढड़ा तक पहुंचाने की सरकार परियोजना तैयार करवाए तो दोनों क्षेत्र के लोगों को फायदा पहुंचेगा। दिल्ली रोड के लोगों को जलभराव से राहत मिलेगी तो बाढड़ा क्षेत्र में पानी की कमी दूर होगी। जल संरक्षण के लिए सरकार तमाम प्रयास कर रही है और मेरी लोगों से अपील है कि वो भी सहयोग करें।

- नैना चौटाला, विधायक जजपा, बाढड़ा


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