{"_id":"6916271e3c9412b59404c044","slug":"special-on-world-diabetes-day-the-sweet-disease-gripping-youth-and-women-charkhi-dadri-news-c-126-1-cdr1010-147487-2025-11-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"वर्ल्ड डायबिटीज डे पर विशेष : युवाओं और महिलाओं को जकड़ रही ‘मीठी बीमारी’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वर्ल्ड डायबिटीज डे पर विशेष : युवाओं और महिलाओं को जकड़ रही ‘मीठी बीमारी’
विज्ञापन
मोहित बेरलिया
चरखी दादरी। जिला नागरिक अस्पताल से लेकर निजी क्लीनिक तक डायबिटीज यानी शुगर के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस मीठी बीमारी में युवा और महिलाएं तेजी से जकड़ रही हैं। पहले यह बीमारी 40 वर्ष से ऊपर आम थी, लेकिन अब 14 से 25 वर्ष के किशोर और युवा इसके प्रभाव में आ रहे हैं। जीवनशैली और खानपान में बदलाव ने इसे एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना दिया है। हर साल 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को डायबिटीज यानी शुगर की बीमारी के प्रति जागरूक करना है।
जिला नागरिक अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार प्रतिदिन औसतन 40 से 50 मरीज ब्लड शुगर जांच और इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें लगभग 35 फीसदी महिलाएं और 20 फीसदी युवा शामिल हैं। सबसे ज्यादा मरीज 20 से 45 वर्ष की उम्र के हैं। नागरिक अस्पताल के डिप्टी सीएमओ डॉ. राहुल अरोड़ा का कहना है कि युवाओं में डायबिटीज का बढ़ना उनके खानपान और जीवनशैली में गड़बड़ी का संकेत है। वहीं महिलाओं में गेस्टेशनल डायबिटीज के केस तेजी से बढ़ रहे हैं, जो आगे चलकर स्थायी डायबिटीज का कारण बन सकते हैं। संवाद
हरी सब्जियों का करें सेवन : डॉ. सुनील
दादरी के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. सुनील जांगड़ा का मानना है कि डायबिटीज के प्रारंभिक चरण को प्राकृतिक उपायों से नियंत्रित किया जा सकता है। करेला, नीम, मेथीदाना और त्रिफला ब्लड शुगर को संतुलित रखने में बेहद प्रभावी हैं। इसके अलावा, नियमित योग और प्राणायाम करने वालों में डायबिटीज के मामले कम देखे जाते हैं। आजकल बच्चे सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं, दिन में फास्ट फूड खाते हैं और रात को देर से सोते हैं, जिससे शरीर को पर्याप्त नींद और व्यायाम नहीं मिल पाता, जो डायबिटीज के बढ़ते जोखिम को बढ़ाता है।
विज्ञापन
डायबिटीज के प्रकार
टाइप-1: शरीर में इंसुलिन का न बनना, आमतौर पर बच्चों और किशोरों में।
टाइप-2: इंसुलिन बनने के बावजूद सही तरीके से काम न करना, जीवनशैली से जुड़ी।
गेस्टेशनल: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में विकसित होती है, प्रसव के बाद भी स्थायी हो सकती है।
लक्षण और चेतावनी
बार-बार पेशाब, अत्यधिक प्यास, थकान, घावों का देर से भरना, वजन घटना और धुंधला दिखाई देना मुख्य लक्षण हैं। कम उम्र में डायबिटीज भविष्य में किडनी, हृदय, आंखों और नसों को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनशैली सुधारकर डायबिटीज को रोका जा सकता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज चलना, योगाभ्यास, मीठे और तले भोजन का सेवन सीमित करना, नियमित दिनचर्या अपनाना और हर छह महीने में ब्लड शुगर टेस्ट करवाना जरूरी है।
विज्ञापन
चरखी दादरी। जिला नागरिक अस्पताल से लेकर निजी क्लीनिक तक डायबिटीज यानी शुगर के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस मीठी बीमारी में युवा और महिलाएं तेजी से जकड़ रही हैं। पहले यह बीमारी 40 वर्ष से ऊपर आम थी, लेकिन अब 14 से 25 वर्ष के किशोर और युवा इसके प्रभाव में आ रहे हैं। जीवनशैली और खानपान में बदलाव ने इसे एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना दिया है। हर साल 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को डायबिटीज यानी शुगर की बीमारी के प्रति जागरूक करना है।
जिला नागरिक अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार प्रतिदिन औसतन 40 से 50 मरीज ब्लड शुगर जांच और इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें लगभग 35 फीसदी महिलाएं और 20 फीसदी युवा शामिल हैं। सबसे ज्यादा मरीज 20 से 45 वर्ष की उम्र के हैं। नागरिक अस्पताल के डिप्टी सीएमओ डॉ. राहुल अरोड़ा का कहना है कि युवाओं में डायबिटीज का बढ़ना उनके खानपान और जीवनशैली में गड़बड़ी का संकेत है। वहीं महिलाओं में गेस्टेशनल डायबिटीज के केस तेजी से बढ़ रहे हैं, जो आगे चलकर स्थायी डायबिटीज का कारण बन सकते हैं। संवाद
विज्ञापन
हरी सब्जियों का करें सेवन : डॉ. सुनील
दादरी के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. सुनील जांगड़ा का मानना है कि डायबिटीज के प्रारंभिक चरण को प्राकृतिक उपायों से नियंत्रित किया जा सकता है। करेला, नीम, मेथीदाना और त्रिफला ब्लड शुगर को संतुलित रखने में बेहद प्रभावी हैं। इसके अलावा, नियमित योग और प्राणायाम करने वालों में डायबिटीज के मामले कम देखे जाते हैं। आजकल बच्चे सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं, दिन में फास्ट फूड खाते हैं और रात को देर से सोते हैं, जिससे शरीर को पर्याप्त नींद और व्यायाम नहीं मिल पाता, जो डायबिटीज के बढ़ते जोखिम को बढ़ाता है।
विज्ञापन
डायबिटीज के प्रकार
टाइप-1: शरीर में इंसुलिन का न बनना, आमतौर पर बच्चों और किशोरों में।
टाइप-2: इंसुलिन बनने के बावजूद सही तरीके से काम न करना, जीवनशैली से जुड़ी।
गेस्टेशनल: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में विकसित होती है, प्रसव के बाद भी स्थायी हो सकती है।
लक्षण और चेतावनी
बार-बार पेशाब, अत्यधिक प्यास, थकान, घावों का देर से भरना, वजन घटना और धुंधला दिखाई देना मुख्य लक्षण हैं। कम उम्र में डायबिटीज भविष्य में किडनी, हृदय, आंखों और नसों को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनशैली सुधारकर डायबिटीज को रोका जा सकता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज चलना, योगाभ्यास, मीठे और तले भोजन का सेवन सीमित करना, नियमित दिनचर्या अपनाना और हर छह महीने में ब्लड शुगर टेस्ट करवाना जरूरी है।