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Charkhi Dadri News: जिले में दूसरी बार पिता के बाद पुत्र बना विधायक
Thu, 10 Oct 2024 04:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 10 Oct 2024 04:42 AM IST
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चरखी दादरी। जिले में 28 साल बाद दूसरी बार पिता के बाद पुत्र विधायक बना है। इससे पहले बाढड़ा हलके में यह रिकॉर्ड बना था, लेकिन इस विधानसभा चुनाव में दादरी हलके से सतपाल सांगवान के परिवार ने यह रिकॉर्ड बनाया है।
बता दें कि बाढड़ा हलके में पहले अत्तर सिंह मांढ़ी और उनके बेटे नृपेंद्र सिंह ने यह रिकॉर्ड बनाया था। अत्तर सिंह मांढ़ी ने साल 1967 से 1991 तक सात चुनाव लड़े और शुरुआती व अंतिम चुनाव में ही जीत हासिल की। इसके बाद साल 1996 में उन्होंने अपने बेटे नृपेंद्र सिंह को चुनाव मैदान में उतारा। इस दौरान नृपेंद्र सिंह ने पिता की तरह पहले चुनाव में सफलता हासिल की और कुल मतदान में से 42,152 वोट हासिल कर विधायक बने। इसके बाद इन्होंने तीन और चुनाव लड़े, लेकिन सफलता नहीं मिली। अत्तर सिंह का बेटा ही नहीं बल्कि पोता भी विधायक बन चुका है। सुखविंद्र मांढ़ी ने बाढड़ा हलके से दो चुनाव लड़े थे और इसमें से वह भी पहले चुनाव में सफल हो पाए।
इस बार यह कारनामा सतपाल सांगवान के परिवार ने किया है। सतपाल सांगवान ने अपना पहला चुनाव 1996 में लड़ा और बहुमत हासिल कर सत्ता में आए। इसके बाद उन्होंने 2019 तक पांच चुनाव लड़े। इनमें साल 2009 में दूसरी बार भी 27790 मत लेकर विधायक बने। इसके बाद अब 15 साल सीट हाथ न आने पर उन्होंने अपने बेटे सुनील सांगवान को भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतारा और सत्ता में वापसी की। सुनील सांगवान ने भी अपने पिता की तरह पहले चुनाव में जीत हासिल की है। उन्हाेंने चुनाव में 65,568 वोट हासिल किए और दादरी हलके में 28 साल पहले बने रिकॉर्ड की याद ताजा कर दी।
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बता दें कि बाढड़ा हलके में पहले अत्तर सिंह मांढ़ी और उनके बेटे नृपेंद्र सिंह ने यह रिकॉर्ड बनाया था। अत्तर सिंह मांढ़ी ने साल 1967 से 1991 तक सात चुनाव लड़े और शुरुआती व अंतिम चुनाव में ही जीत हासिल की। इसके बाद साल 1996 में उन्होंने अपने बेटे नृपेंद्र सिंह को चुनाव मैदान में उतारा। इस दौरान नृपेंद्र सिंह ने पिता की तरह पहले चुनाव में सफलता हासिल की और कुल मतदान में से 42,152 वोट हासिल कर विधायक बने। इसके बाद इन्होंने तीन और चुनाव लड़े, लेकिन सफलता नहीं मिली। अत्तर सिंह का बेटा ही नहीं बल्कि पोता भी विधायक बन चुका है। सुखविंद्र मांढ़ी ने बाढड़ा हलके से दो चुनाव लड़े थे और इसमें से वह भी पहले चुनाव में सफल हो पाए।
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इस बार यह कारनामा सतपाल सांगवान के परिवार ने किया है। सतपाल सांगवान ने अपना पहला चुनाव 1996 में लड़ा और बहुमत हासिल कर सत्ता में आए। इसके बाद उन्होंने 2019 तक पांच चुनाव लड़े। इनमें साल 2009 में दूसरी बार भी 27790 मत लेकर विधायक बने। इसके बाद अब 15 साल सीट हाथ न आने पर उन्होंने अपने बेटे सुनील सांगवान को भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतारा और सत्ता में वापसी की। सुनील सांगवान ने भी अपने पिता की तरह पहले चुनाव में जीत हासिल की है। उन्हाेंने चुनाव में 65,568 वोट हासिल किए और दादरी हलके में 28 साल पहले बने रिकॉर्ड की याद ताजा कर दी।
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